किसान पुत्र व महाजन बेटे के बीच बड़ीसादड़ी में कड़ा मुकाबला

चित्तौड़गढ़ (सलमान)। प्रदेश में विधानसभा चुनाव में महज कुछ ही दिन शेष है और चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के देर रात तक ताबड़तोड़ दौरे का सिलसिला जारी है। कोई भी प्रत्याशी चुनावी रण में पीछे नही रहना चाहता हैं। चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशी अपने-अपने पक्ष में मतदाताओं को लुभाने का हर संभव कवायद करते नज़र आ है।
चित्तौड़गढ़ जिले की बड़ीसादड़ी विधानसभा में सर्वाधिक 12 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है, लेकिन मुख्य मुकाबला कांग्रेस के बद्री लाल जाट जगपुरा और भाजपा के गौतम दक के बीच है। जहां गौतम दक 2013 से 2018 में विधायक रह चुके है। वहीं बद्री लाल जाट जगपुरा पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं जो अभी डेयरी चैयरमेन है।बड़ीसादड़ी विधानसभा में गौतम दक को पुराने अनुभव का लाभ मिल रहा है तो बद्रीलाल जाट की छवि किसान पुत्र की बन रही है। बड़ीसादड़ी विधानसभा क्षेत्र को देखा जाये तो इस क्षेत्र में एक नगर पालिका क्षेत्र बड़ीसादड़ी है जबकि बड़ी सादड़ी और डूंगला पंचायत समिति की 26-26 ग्राम पंचायतें, भदेसर की 7 और
प्रतापगढ़ जिले के धमोत्तर पंचायत समिति की 18 ग्राम पंचायतें शामिल है। एक निकाय और 77 ग्राम पंचायतों से मिलकर यह।विधानसभा क्षेत्र बना है जिसमें ज्यादातर ग्रामीण है और मुख्य पेशा कृषि और कृषि आधारित उद्योग हैं। वही धमोत्तर क्षेत्र की 18 ग्राम पंचायतें आदिवासी बाहुल्य हैं। जिसमें एसटी की जनसंख्या सर्वाधिक हैं।
2023 का यह विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण बन गया है। कांग्रेस के प्रत्याशी बद्रीलाल जाट वर्तमान गहलोत सरकार की योजनाओं को लेकर चुनाव मैदान में उतरे है और सरकार की योजनाओं के दम पर जीतने का दावा कर रहे है। वहीं भाजपा के गौतम दक सरकार की विफलताओं के साथ-साथ कांग्रेस प्रत्याशी को बाहरी बताकर सफलता हासिल करने के जुगाड़ 
में है। हालांकि धमोत्तर क्षेत्र में बीएपी के प्रत्याशी फौजी लाल मीणा दोनों ही पार्टियों के समीकरण बिगाड़ सकते है। वर्तमान समय में भाजपा और कांग्रेस के दोनों प्रत्याशी छोटी-छोटी सभाओं और नुक्कड़ सभाओं के जरिये जनसम्पर्क में जुटे है। अब देखना यह है कि बड़ीसादड़ी क्षेत्र के मतदाता ईवीएम के किस बटन को चुनते है। यह आगामी तीन दिसम्बर को पता लग पायेगा।

◆ब्राह्मण, राजपूत व जैन प्रभावी, आदिवासी निर्णायक

बड़ीसादड़ी विधानसभा क्षेत्र में यदि जातिगत समीकरण देखे जाये
तो सर्वाधिक मतदाता जनजाति के है। जिनमें से मीणा करीब 42 हजार और 4 हजार भील समुदाय के है। जो निर्णायक भूमिका में है, लेकिन इस क्षेत्र में करीब 25 हजार ब्राह्मण, 14 से 15 हजार राजपूत, 10 से 12 हजार जाट, 12 हजार महाजन (जैन, माहेश्वरी) मतदाताओं के साथ करीब 10 से 12 हजार अल्पसंख्यक मतदाता है। इस विधानसभा क्षेत्र में जैन समुदाय का प्रभाव है और भाजपा से करीब 4 बार जैन समुदाय के विधायक निर्वाचित हो चुके है। पूर्व में चुने गये इन विधायकों में वर्तमान
राज्यपाल गुलाबचन्द कटारिया, वृद्धिचन्द जैन, गौतम दक और ललित ओस्तवाल विधायक रह चुके है। इस विधानसभा क्षेत्र में प्रमुख जातियों के अलावा अनुसूचित जाति में करीब 10 हजार मेघवाल, 3 हजार रेगर, 5 हजार खटीक, 4 हजार हरिजन सहित धोबी, कोली जैसी जातियां है वहीं ओबीसी जातियों में गुर्जर, जणवा, कलाल, सुथार, धाकड़, लौहार, सेन, माली, कुम्हार, पाटीदार, अहीर, वैष्णव, कुमावत, तेली, नायक, खरोल, गाड़ी लौहार सहित करीब 12 हजार गाडरी और 7 हजार डांगी जैसी किसानी जातियां है। जो परिणाम को प्रभावित करती है।

●विकास की दरकार, रोजगार सहित किसानों की समस्याएं प्रमुख मुद्दा

इस विधानसभा क्षेत्र में ज्यादातर लोग या तो कृषि पर निर्भर है या मजदूरी या व्यापार करते है। बड़ी संख्या में इस क्षेत्र के लोग महानगरों में छोटे-मोटे व्यवसाय पर आश्रित है। इस क्षेत्र में सीतामाता अभयारण्य का क्षेत्र आता है और उसे राष्ट्रीय पार्क बनाने की मांग भी लम्बे समय से लम्बित है वहीं बड़ीसादड़ी होड़ा चौराहा वाया बानसी को स्टेट हाईवे बनाने की मांग भी लगातार चल रही है हालांकि कांग्रेस सरकार ने मॉडल स्कूल और कुछ चिकित्सा के क्षेत्र में काम किया है, लेकिन अभी भी किसानों के लिए बिजली और सिंचाई की समस्याएं लम्बित है। बड़ीसादड़ी विधानसभा क्षेत्र में बड़े कल कारखानों और उद्योगों का अभाव है और इस चुनाव में बड़ा उद्योग लगाने का भी मुद्दा बना हुआ है। जिससे क्षेत्र में रोजगार मिल सके।

●अफीम किसानों की समस्याएं चर्चा में

बड़ीसादड़ी विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में अफीम किसान है और वर्ष में एक बार अफीम की खेती की उपज से उम्मीद लगाये रहते है, लेकिन इस चुनाव में अफीम के किसानों पर पड़ रही दोहरी मार मुद्दा
बना हुआ है। केन्द्र सरकार की सीपीएस पद्धति का विरोध होने के साथ-साथ 8/29 धारा भी भारी चर्चाओं में है, क्योंकि
क्षेत्र के कई किसान डोडाचूरा और अफीम के मामलो में फंस चुके है। कुल मिलाकर पूरा क्षेत्र कृषि आधारित है और ज्यादातर किसान और मजदूर वर्ग के मतदाता निवास करते है।

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