यूआईटी में भ्रष्टाचार की खुली पोल, अब अन्य शिकायतों की भी होगी जांच

●शिकायत के बाद जिला कलक्टर ने यूआईटी संविदाकर्मी को हटाया

चित्तौड़गढ़। आए दिन नगर विकास न्यास में भ्रष्टाचार की शिकायतें आम होती जा रही है। पट्टे जारी करने और भू-रूपांतरण जैसे कामों के मामले में आए दिन शिकायतें मिलती रही है। भ्रष्टाचार और नियमितताओं के चलते यूआईटी में लम्बे समय से एकल पट्टों की पत्रावलियां निस्तारित नहीं हो पा रही है और कई लोग एकल पट्टों के लिए यूआईटी के दर पर चप्पलें घिस रहे है। गुरुवार को जिला कलक्टर अरविन्द कुमार पोसवाल द्वारा भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद यूआईटी के एक संविदाकर्मी के खिलाफ कार्यवाही करते हुए उसे हटाकर ब्लैक लिस्टेड कर दिया है, लेकिन यूआईटी में सेवानिवृति के बाद संविदा पर काम कर रहे उपनगर नियोजक मनमोहन कुमावत के विरूद्ध भी जांच के आदेश दिए है। हांलाकि शिकायतकर्ता ने मनमोहन कुमावत द्वारा रूपये मांगे जाने की शिकायत जिला कलक्टर को जन सुनवाई के दौरान प्रस्तुत की थी। जिसमें मनमोहन कुमावत ने भू-रूपान्तरण के बदले 3 लाख रूपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने सिलसिले वार शिकायत में बताया कि फाईल लगाने पर 50 हजार, भूखंड एकीकरण पर 50 हजार और सितम्बर माह में 2 लाख रूपये मनमोहन कुमावत के मांगे जाने पर उसके अधीनस्थ संविदाकर्मी राहुल छीपा को दिये, लेकिन आठ माह बीत जाने के बावजूद उसका भू-खंड उपयोग परिवर्तन नहीं हो पाया है। जिला कलक्टर ने इस मामले में संज्ञान लेकर राहुल छीपा को नौकरी से हटाते हुए ब्लैक लिस्ट करने के आदेश जारी किए है।

खुद पर आती देख अधीनस्थ की दी बलि
जिला कलक्टर द्वारा जारी किये गए आदेश में उल्लेख है कि अफसर खां पुत्र शरीफ खां द्वारा की शिकायत में नगर विकास न्यास में कार्यरत राहुल छीपा द्वारा भ्रष्टाचार किया जा रहा है। इस पर उपनगर नियोजक मनमोहन कुमावत ने एक दिन पूर्व 14 दिसम्बर को जिला कलक्टर को प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर राहुल छीपा की शिकायतों पर उसे हटाने संबंधी जानकारी दी। अब सवाल यह है कि जिस शिकायत का उल्लेख स्वयं मनमोहन कुमावत ने किया है वह शिकायत उनके खिलाफ भी थी लेकिन खुद की खाल बचाने के लिए मनमनोहन कुमावत ने अपने ही अधीनस्थ की बलि देकर खुद का दामन बचाने की कोशिश की है।

बदाम देवी मामले की भी होगी जांच
नगर विकास न्यास में व्यापक तौर पर चले रहे भ्रष्टाचार के बीच जिला कलक्टर द्वारा संविदाकर्मी को हटाये जाने के बाद अब कई मामले सामने आने लगे है। भ्रष्टाचार के मामले में मनमोहन कुमावत के लिए 3 लाख रूपये रिश्वत लेने वाले राहुल छीपा को तो हटा दिया गया है लेकिन जानकारी है कि जिला कलक्टर के पास बदाम देवी के नाम से लम्बित एक फाइल में भी भ्रष्टाचार में शिकायत हुई है। इस मामले में भी कलक्टर स्तर पर जांच की जा रही है।
विजिलेंस में मामले की होगी जांच
यूआईटी में लगातार हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर जिला कलक्टर ने यह मामले विजिलेंस में भिजवाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में जानकारी है कि यूआईटी के भ्रष्टाचार संबंधी मामलों को विजिलेंस कमेटी में दिया गया है ताकि यहां कार्यरत दूसरे कार्मिकों और बिचौलियों की भी जांच की जा सके।

इनका कहना हें कि-
-मैनें 4-5 दिन पहले ही कार्यभार ग्रहण किया है और यह मामला सितम्बर का है। मेरी जानकारी में नहीं है। जिला कलक्टर के आदेश की पालना की जा रही है।
दिनेश कुमार मंडोवरा
सचिव, यूआईटी, चित्तौड़गढ़

-यूआईटी में विभिन्न मामलों में मिली शिकायतों को लेकर एक संविदाकर्मी को हटाकर ब्लैक लिस्टेड किया गया है वहीं जांच विजिलेंस में दी गई है। इस प्रकरण के अतिरिक्त बदाम देवी प्रकरण की भी जांच की जा रही है और अन्य शिकायतों की भी जांच कर कार्यवाही की जायेगी।
-अरविन्द कुमार पोसवाल
अध्यक्ष, यूआईटी एवं जिला कलक्टर चित्तौड़गढ़

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