पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना से भीलवाड़ा, शाहपुरा व चितौड़गढ़ जिले को जोड़ा जाए : रामपाल


 
●2050 तक पेयजल की समस्या का होगा समाधान, रूकेगा उद्योगों का पलायन

 भीलवाड़ा। (पंकज पोरवाल) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व जिला अध्यक्ष रामपाल शर्मा ने भीलवाडा, शाहपुरा और चितौडगढ जिले को केंद्र एवं राज्य सरकार की पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना से जोड़ने की मांग उठाई। शर्मा ने मंगलवार को अपने निवास पर पत्रकारों को बताया कि तीनों जिलों के भविष्य एवं विकास को ध्यान में रखते हुए ईआरसीपी योजना से जोड़ना अतिआवश्यक है ताकि राजस्थान की इस महत्वकांशी योजना का पूर्ण रूप से लाभ मिल सके। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष रामपाल शर्मा ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान उक्त मांग बताते हुए कहा कि इसके लिए फरवरी माह में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री को जिला कलक्टर के माध्यम से ज्ञापन दिया था। वहीं जिले के सभी विधायकों, संसद सदस्य आदि को भी ज्ञापन दिये गये थे। इनमें से पूर्व विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी का पत्रोŸार ही प्राप्त हुआ है। शेष से फिर सम्पर्क किया जाएगा। इसके लिए शीघ्र ही एक समिति का गठन किया जाएगा। जिसमें भू-गर्भ शास्त्री, विषय विशेषज्ञ, अधिवक्ता, विशिष्ट सामाजिक एवं राजनैतिक कार्यकर्ता, नेताओं व पत्रकारों को स्िमलित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईआरसीपी में भीलवाड़ा-शाहपुरा जिले को स्िमलित कर लिया गया तो वर्ष 2050 तक पेयजल समस्या का समाधान होने के साथ ही उद्योगों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो जाएगा। जिससे उनका पलायन भी रूकेगा। उन्होंने जानकारी दी कि मेजा बांध से रतन गढ़ बांध तक के लिए एक योजना भी बनी थी, पर समय के साथ-साथ ठण्डे बस्ते में चली गई। शर्मा ने बताया कि उक्त योजना से भीलवाड़ा, शाहपुरा और चिŸाौडगढ़ को जोडना अति आवश्यक है। भीलवाड़ा-शाहपुरा जिले की 25 लाख जनसंख्या है। जहां 40 से अधिक बांध और तालाब है। भीलवाड़ा, चिŸाौडगढ़ शाहपुरा जिले बीसलपुर केचमेंट में आने के कारण भविष्य में कोई बांध की योजना नहीं बनाई जाएगी। भीलवाड़ा से बहने वाली बनास नदी में ब्रह्माणी व मेनाली नदी को चम्बल नदी से जोडने का प्रस्ताव एवं समय समय पर इनको जोडने के लिए सर्वे हो चुके है। परन्तु कार्य आगे नहीं बढ़े है। अगर यह नदिया जुड़ती है तो बीसलपुर बांध में भराव क्षमता में इजाफा होगा और बीसलपुर बांध कभी खाली नहीं रहेगा। राजस्थान में सबसे कम लागत में यह योजना पूरी होगी। उदयपुर से लेकर मातृकुंडिया तक एवं मातृकुण्डिया से भीलवाड़ा मेजा डेम तक सभी बांधों को फीडर द्वारा एक-दूसरे को मिलाया हुआ है, परन्तु मेजा डेम से मांडल तालाब एवं हुरड़ा, बनेड़ा, शाहपुरा, कोटड़ी, जहाजपुर के बांधी व तालाब फीडर के माध्यम से जोड़े जा सकते हैं। मातृकुंडिया से मेजा डेम तक फीडर का निर्माण हो रखा है। मेजा बांध व अन्य बांधों को जोडना जरूरी है एवं भविष्य में कोई भी बड़ी परियोजना भीलवाड़ा में नहीं बनाई जा सकती है। जिले में एक- दूसरे नदियों एवं बांधों को माध्यम से जोडना जरूरी है। भीलवाड़ा नगर विकास न्यास द्वारा मेजा डेम को वर्ष २०१२-१३ में पेराफेरी में शामिल किया गया था उसका मुख्य उद्देश्य था कि न्यास द्वारा बहुउद्देश्यीय योजना के साथ-साथ मेजा से कोठारी डेम तक एक रिवर फ्रंट का निर्माण करने के साथ ही सरकारी कार्यालय आदि की योजना बनी थी परन्तु यह योजना 10 वर्षों से कागजों में ही है। उक्त रिवर फ्रंट लगभग 45 किमी का होता है इससे 30 किमी नगर विकास न्यास द्वारा बनाया गया था व 15 किमी. जलदाय विभाग के अन्तर्गत आता है। इनका बहुउद्देश्य योजना से हजारों करोड़ का लाभ मिलता। जिले के 380 गांवों का जल स्तर बढ़ता। जिससे किसानों, उद्योगों को लाभ के साथ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इस अवसर पर चेतन डीडवानिया, महेश सोनी, दुर्गेश शर्मा आदि उपस्थित थे।

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