नई दिल्ली। देश में आज एक जुलाई से तीन नए आपराधिक कानून लागू हो हो गए हैं। आज से नए कानून के तहत पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज होगी। कानून की यह संहिताएं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) हैं। नए कानूनों में कुछ धाराएं हटा दी गई हैं तो कुछ नई धाराएं जोड़ी गई हैं। कानून में नई धाराएं शामिल होने के बाद पुलिस, वकील और अदालतों के साथ-साथ आम लोगों के कामकाज में भी काफी बदलाव आ जाएगा। वे मामले जो एक जुलाई से पहले दर्ज हुए हैं, उनकी जांच और ट्रायल पर नए कानून का कोई असर नहीं होगा। एक जुलाई से सारे अपराध नए कानून के तहत दर्ज होंगे। अदालतों में पुराने मामले पुराने कानून के तहत ही सुने जाएंगे। नए मामलों की नए कानून के दायरे में ही जांच और सुनवाई होगी। अपराधों के लिए प्रचलित धाराएं अब बदल चुकी हैं, इसलिए अदालत, पुलिस और प्रशासन को भी नई धाराओं का अध्ययन करना होगा।
◆बदल गए न्याय संहिताओं के नाम
इंडियन पीनल कोड (IPC) अब हुई भारतीय न्याय संहिता (BNS),
कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (CrPC) अब हुआ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), इंडियन एविडेंस एक्ट (IEA) अब हुआ भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में अहम बदलाव हुए हैं।
●भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में हुए अहम बदलाव
भारतीय दंड संहिता (CrPC) में 484 धाराएं थीं, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 531 धाराएं हैं। इसमें इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ऑडियो-वीडियो के जरिए साक्ष्य जुटाने को अहमियत दी गई है। नए कानून में किसी भी अपराध के लिए अधिकतम सजा काट चुके कैदियों को प्राइवेट बॉन्ड पर रिहा करने की व्यवस्था है।
कोई भी नागरिक अपराध होने पर किसी भी थाने में जीरो एफआईआर दर्ज करा सकेगा। इसे 15 दिन के अंदर मूल जूरिडिक्शन, यानी जहां अपराध हुआ है, वाले क्षेत्र में भेजना होगा। सरकारी अधिकारी या पुलिस अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए संबंधित अथॉरिटी 120 दिनों के अंदर अनुमति देगी। यदि इजाजत नहीं दी गई तो उसे भी सेक्शन माना जाएगा। एफआईआर दर्ज होने के 90 दिनों के अंदर आरोप पत्र दायर करना जरूरी होगा। चार्जशीट दाखिल होने के बाद 60 दिन के अंदर अदालत को आरोप तय करने होंगे। केस की सुनवाई पूरी होने के 30 दिन के अंदर अदालत को फैसला देना होगा। इसके बाद सात दिनों में फैसले की कॉपी उपलब्ध करानी होगी। हिरासत में लिए गए व्यक्ति के बारे में पुलिस को उसके परिवार को ऑनलाइन, ऑफलाइन सूचना देने के साथ-साथ लिखित जानकारी भी देनी होगी। महिलाओं के मामलों में पुलिस को थाने में यदि कोई महिला सिपाही है तो उसकी मौजूदगी में पीड़ित महिला का बयान दर्ज करना होगा। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में कुल 531 धाराएं हैं। इसके 177 प्रावधानों में संशोधन किया गया है। इसके अलावा 14 धाराएं खत्म हटा दी गई हैं। इसमें 9 नई धाराएं और कुल 39 उप धाराएं जोड़ी गई हैं। अब इसके तहत ट्रायल के दौरान गवाहों के बयान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दर्ज हो सकेंगे। सन 2027 से पहले देश के सारे कोर्ट कम्प्यूरीकृत कर दिए जाएंगे।
●भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) में आया परिवर्तन
भारतीय साक्ष्य अधिनियम में कुल 170 धाराएं हैं। अब तक इंडियन एविडेंस एक्ट में 167 धाराएं थी। नए कानून में 6 धाराएं निरस्त कर दी गई हैं। इस अधिनियम में दो नई धाराएं और 6 उप धाराएं जोड़ी गई हैं। इसमें गवाहों की सुरक्षा के लिए भी प्रावधान है। दस्तावेजों की तरह इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी कोर्ट में मान्य होंगे। इसमें ई-मेल, मोबाइल फोन, इंटरनेट आदि से मिलने वाले साक्ष्य शामिल होंगे।
●भारतीय न्याय संहिता (BNS) में किए गए बदलाव
आईपीसी में जहां 511 धाराएं थीं, वहीं भारतीय न्याय सहिता में 357 धाराएं हैं।
महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराध : इन मामलों को धारा 63 से 99 तक रखा गया है। अब रेप या बलात्कार के लिए धारा 63 होगी। दुष्कृत्य की सजा धारा 64 में स्पष्ट की गई है। सामूहिक बलात्कार या गैंगरेप के लिए धारा 70 है। यौन उत्पीड़न को धारा 74 में परिभाषित किया गया है। नाबालिग से रेप या गैंगरेप के मामले में अधिकतम सजा में फांसी का प्रावधान है। दहेज हत्या और दहेज प्रताड़ना को क्रमश : धारा 79 और 84 में परिभाषित किया गया है। शादी का वादा करके यौन संबंध बनाने के अपराध को रेप से अलग रखा गया है। यह अलग अपराध के रूप में परिभाषित किया गया है।
अब धोखाधड़ी से संबंधित कानून की धारा का क्रम बदल गया है। नई भारतीय न्याय संहिता में धोखाधड़ी और ठगी करने वालों के खिलाफ धारा-318 लगेगी। यानी अब किसी भी ठग या धोखा देने वालों को 420 कहेंगे तो सटीक नहीं होगा। इसी तरह हत्या, रेप, डकैती, चोरी समेत हर धारा का नंबर भारतीय न्याय संहिता में बदल गया है। आईपीसी की दफा 302 बदलकर भारतीय न्याय संहिता में धारा 103 हो गया है। इसी तरह से तमाम बदलाव हुए हैं और बदले कानून के तहत ही अब एक जुलाई से मुकदमा दर्ज होगा और उसी के हिसाब से केस चलेगा। लेकिन, पहले से दर्ज मामले और उसका मुकदमा वैसे ही चलता रहेगा जैसा चल रहा है। मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा किसी पर हमला करना) के लिए अलग से प्रावधान किया गया है और मौत की स्थिति में फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है। नए कानून में शादी का वादा कर संबंध बनाने को रेप के दायरे से बाहर अलग अपराध बनाया गया है। साथ ही 12 साल तक की बच्ची से रेप में फांसी तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
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