दीवाना शाह सारअ के 82वें उर्स में उमड़े जायरीन, दरगाह परिसर में की आकर्षक विद्युत सजा

कपासन। प्रख्यात सूफी संत हज़रत दीवाना शाह साहब र.अ. के 82वें उर्स में हजारों नमाजियों ने जुम्आ की नमाज़ अदा की।
दरगाह वक्फ कमेटी के सैक्रेट्री मोहम्मद यासीन खाँ अशरफी के अनुसार जुम्आ की नमाज मे ओलिया मस्जिद, हॉजे उल्फत, अहाता ए नूर एवं शाही महफिल खाना मे नमाजियो ने नमाज अदा की। वही मस्तुरात ने बारी-बारी से आयशा मस्जिद मे जोहर की नमाज़ अदा की। इस मोके पर नमाजियो के लिए वजू बनाने से लेकर नमाज अदा करने तक माकूल इंतजाम किए गए। हाईवे व स्टेशन से बुलन्द दरवाजा तक, दरगाह के आगे व पीछे जायरीन की आमदो रफ्त, बुलन्द दरवाजे के बाहर फकीरो की कतारे, धुणा मे तरीकबन्द फूकरा हज़रात की धूम, अन्दर दाखिल होते समय मेटल डिटेक्टर, चारो तरफ जिधर देखो उधर दीवाना-दीवाना की गूंज, देग में श्रद्धा अनुसार सुखा मेवा पेश करते हुवें, फूलो की दुकानो पर चादर, फूल, ईत्र, अगरबत्ती, लेते हुवे आशिके दीवाना, शाही महफिल खाने मे एक के बाद एक कलाम पेश करते कव्वाल, लंगरखाने के बाहर बाबा हुजूर का लंगर हासिल करने के लिए कतार बद्ध बेठे गरीब - अमीर सभी आस्ताना ए आलिया के बाहर तक हाथो में फूल, चादर, ईत्र लिए हुए आशिके दीवाना, गुलाब के फूलों से महकता हुआ मुख्य मज़ार, हॉजे उल्फत पर वजू बनाते हुए दीवाना के मतवाले, औलिया मस्जिद में हर नमाज मे एक ईमाम की आवाज पर रूकूअ, सजदा और सलाम फेरते हुए बन्दगाने खुदा, आयशा मस्जिद मे अपने सर को सजदे में रख कर सुब्हान रब्बी यल अल्लाह पढती ख्वातीन, आस्ताना ऐ आलिया मे अपने सुकून के लिए चुमते चादर तो बाबा हुजूर को अकीदतो मोहब्बत में फूल पेश कर एक तरफ खडे होकर दोनों हाथ उठाकर तो कोई हाथ जोडकर बाबा हुजूर को अपना दर्द, दुखडा आंसू बहाकर, लब बन्द मगर ऐसे सुना रहा है की मै बाबा हुजूर को तो नही देख सकता मगर यह तो मुझे देख रहे है, अल्लाह के वली का वास्ता देकर इनके वसीले से मालिक मेरी दुआ जरूर-जरूर कुबूल करेगा। मन्नत के धागे बांधते हुवे बाबा हुजूर के परवाने, छोटे-छोटे बच्चो को झूले-चकरी मे बिठाकर उन्हे हँसते मुस्कुराते देखते माता-पिता, खरीदारी करते हुए जायरीने दीवाना, खरीदारी कर दो पल सुकून के गुजारने के लिए बाबा हुजूर का महबूब पार्क, हर तरफ खुश्बू ही खुश्बू गुलाब की खुश्बू से महक उठा पुरा दरगाह परिसर किसी भी मजहबो मिल्लत का कोई भेद नही, कानून व्यवस्था एवं शान्ति बनाए रखने के लिए डी.वाई.एस.पी. बुद्धराज टांक, सी.आई. गजेन्द्र सिंह, आकोला, राशमी, भोपालसागर के थाना प्रभारी के अलावा चप्पे-चप्पे पर खडे पुलिस के जवान, सिक्योरेटी गार्ड, वॉलेन्टियर्स, अपना-अपना काम अंजाम देते हुवे कमेटी सदस्य, स्वयं सेवक, दरगाह कर्मचारी। बाबा हुजूर हज़रत दीवाना शाह साहब र.अ. के उर्स का यह मंजर देख कर आशिके दीवाना पुकार उठा।
’’ये केसी भीड़ है ऐ अशरफी, आका के रोजा पर, लगा है उर्स का मेला मेरे दीवाना बाबा का।

प्रख्यात सूफी संत हज़रत दीवाना शाह साहब र.अ. के 82वें उर्स का शनिवार को होगा समापन  26 अगस्त प्रातः 6 बजे से देग का खाना तकसीम होगा तत्पश्चात शाही महफिल खाना मे सुबह 8ः00 बजे कुल की महफिल शुरू होगी और जोहर की अज़ान से पहले कव्वाल पार्टी द्वारा रंग पढने व कुल की फातेहा के साथ उर्स सम्पन्न होंगे।
27 अगस्त आस्ताना ए आलिया स्थित मुख्य मज़ार के पट आम जायरीन के दर्शन हेतु खोले जाएंगे। 

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