नवरात्रि में माताजी हाथी पर सवार होकर सिद्ध योग में आएगी भक्तों के घर– डॉ मृत्युञ्जय



निम्बाहेड़ा। शारदीय नवरात्रि के समय भगवान राम ने लंका पर विजय पाने के लिए नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां ने उन्हें आशीर्वाद दिया और दसवें दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की थी। श्रीकल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ मृत्युञ्जय तिवारी ने बताया कि इसलिए ऐसी मान्यता कि जो लोग शारदीय नवरात्रि के समय देवी दुर्गा की आराधना विधि-विधान से करते हैं उन पर मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। उसे हर कार्यों में सफलता मिलती है। नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नव स्वरुपों की अलग-अलग रूपों में पूजा की जाती है।

कई शुभ संयोगो में नवरात्रि

इस वर्ष नवरात्रि के पूरे नौ दिनों में कई शुभ संयोग बन रहे हैं। नवरात्रि की शुरुआत 26 सितंबर को सर्वाद्ध सिद्धि योग और अमृत योग से हो रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग नवरात्रि के पांचवे दिन 30 सितंबर को और सातंवे दिन 02 अक्टूबर को भी है। वहीं नवरात्रि के चौथे दिनछठवें दिन और आठवें दिन रवि योग बन रहा है। डॉ तिवारी के अनुसार इस योग में मां भगवती की पूजा करना विशेष लाभकारी माना गया है।

नवरात्रि में माता रानी के आगमन और प्रस्थान का वाहन और महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि शारदीय नवरात्रि रविवार या सोमवार से शुरू होती है तो मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। चूंकी इस वर्ष यानी नवरात्रि 2022 की शुरुआत सोमवार से शुरू हो रही हैतो माता का आगमन हाथी पर होगा। धार्मिक दृष्टिकोण से हाथी पर माता का आगमन बहुत ही शुभ माना जाता है। हाथी को ज्ञान का प्रतीक माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब देवी दुर्गा का आगमन हाथी पर होता हैतो भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। दुर्गा माता का गमन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब बुधवार और शुक्रवार को नवरात्रि की समाप्ति होती है तब भी माता-रानी के प्रस्थान की सवारी हाथी ही होती है। यानी माता दुर्गा का प्रस्थान भी हाथी पर ही होगा।

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