चित्तौड़गढ़। हरी सेवा धाम के महंत एवं महामंडलेश्वर हंसराम उदासी ने कहा कि कोरोना से भी पूरी तरह से मुक्ति मिली ही नहीं, कि गाय माता में लंपी रोग आ गया, जबकि अन्य किसी जानवर में कोई रोग नहीं आया है। यह मनुष्य के लिए आगाह है, जिसने धर्म का अनुसरण करना कम कर दिया है। धर्म के नाम पर आडम्बर अधिक होने लगा है।
चित्तौड़गढ़ में सिंधी काॅलोनी स्थित श्रीचंद धाम में आयोजित तीन दिवसीय स्वामी बाबा भगवान दास की वर्सी के अंतिम दिन बुधवार को आयोजित एक धर्मसभा में महामडलेश्वर हंसराम उदासी ने विभिन्न स्थानों से आए बाबा भगवान दास के अनुयायियों से कहा कि धर्म के नाम पर होने वाले आडम्बर से बचना चाहिए। हमेशा हरी का नाम स्मरण करना चाहिए,जिससे मनुष्य को परम गति प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर जो पाप हो रहे है, वह बंद होने चाहिए।
उन्होंने सत्संग के माध्यम से संगत को संबोधित करते हुए कहा कि अपनी सभ्यता एवं संस्कृति को कभी भी भूलना नहीं चाहिए। अपनी भाषा जो मातृभाषा है, उसे नष्ट न करे, और सिद्धांतो पर चले। आने वाली पीढ़ी को हमेशा अपनी राष्ट्रभाषा एवं संस्कृति के महत्व के बारे में समझाए। उन्होंने कहा कि मनुष्य बार-बार जन्म नहीं लेता। कब उसे बुलावा आ जाए, कहा नहीं जा सकता। मनुष्य ने जन्म लिया है, तो उसकी मृत्यु आनी है, लेकिन इंसान कई बार इतनी धन दौलत एकत्रित कर लेता है कि उसे रखना भी मुश्किल हो जाता है, जबकि उसे खाली हाथ जाना है। अगले पल का उसको पता नहीं है,लेकिन वह जीवन भर की प्लानिंग कर लेता है।
इससे पूर्व हंसराम उदासी एवं महंत मय्या राम के यहां पहुंचने पर गुरदास उदासी, संतदास, रामदास उदासी, प्रदीप राजा उदासी, संजय उदासी एवं सिंधी पंचायत के पदाधिकारियों आदि ने उनकी अगवानी कर स्वागत किया। वर्सी के दौरान मंगलवार रात्रि को कोटा से आई पिन्टू एंड पार्टी द्वारा सत्संग प्रस्तुत किया गया। भंडारा के साथ वर्सी का समापन हुआ।
0 टिप्पणियाँ