गौ भक्तों ने वितरित की डेढ़ लाख ऐलोपैथिक गोलियाँ



चित्तौड़गढ़। गायों में तेजी से फेल रही लंपी बीमारी के बचाव को लेकर पशुपालकों को निशुल्क दवाइयों का वितरण किया जा रहा हैं। मुकेश नाहटा ने बताया कि लम्पी वायरस के चलते गौ माता की स्थिति बड़ी विकट है। इसी दौरान मोनू सोनी से वार्ता के दौरान एक फार्मा कम्पनी को फोन लगा कर चर्चा की गई तो उन्होंने औषधि निरीक्षक अधिकारी रामकृष्ण सिंह के निर्देशन में फार्मा सेल्स प्रोपराईटर अनुपम जैन एवं सुमन फार्मा जयपुर के सहयोग से डेढ़ लाख  Ivermectin Tab s.ppiy 12  गोलियाँ निशुल्क भिजवाई गई जिसे मोनू ऑप्टिकल कलेक्ट्री पर गौ भक्तों को निःशुल्क वितरित की गई। बीमारी से बचाव के लिए निर्देशानुसार सात गोलियों की एक डोस 80 मिग्रा के लगभग रोटी के साथ मिलाकर दी गई। सर्वप्रथम रामस्नेही सम्प्रदाय के संत दिग्विजय राम के द्वारा चन्देरिया में गौ भक्तों के साथ गायों को गोलिया खिला कर इसकी शुरूआत की गई वहीं मोनू ऑप्टिकल पर हजारेश्वर महादेव संत चन्द्रभारती महाराज के सानिध्य में गोलियाँ वितरित की गई। इसके लिए कार्यकर्ताओं ने घर-घर से रोटियाँ इकट्टी कर सहयोग लिया।
संत दिग्विजयराम ने कहा कि गाय बचेगी तो देश बचेगा। गाय ही एक ऐसी पशु है जिसे माँ का दर्जा प्राप्त है। इस वायरस में समस्त जन, विशेष कर युवा वर्ग आगे आकर गायों की सेवा में लगे ताकि गायों को बचा सके। वहीं संत चन्द्रभारती महाराज ने कहा कि अगर हम अभी लम्पी वायरस से गायों को नहीं बचा पाए और जिस प्रकार गायें मर रही है तो गायें सिर्फ निबन्ध में ही रह जाएगी। गाय बचाने का हमें हर संभव प्रयास करना चाहिये। कहते हैं 33 कोटि देवी-देवताओं का वास गाय में है। एक मात्र गौ ही ऐसा प्राणी है जो जीते-जी तो बहुत कुछ देती है किन्तु मरने के बाद भी काम में आती है। गौ माता के लिए सभी संगठनों को आगे आकर एक बड़ा युद्धस्तर पर कार्ययोजना बना कर सेवा करनी चाहिए।
लगभग 60 वार्डों व 100 से अधिक गाँवों में 6 गौशालाओं, संस्थानों को गोलियाँ वितरित की गई जिसमें गांधीनगर गौशाला, गोपाल गौशाला, सत्यनारायण गौशाला, मुरोली स्थित बालाजी गौशाला, बागेश्वर गौशाला, श्रीकृष्ण महावीर गौशाला, स्वामी विवेकानन्द संस्थान के साथ ही सुवानिया, नारेला, पुठोली, चिकसी, लांगच, सेमलपुरा, खरड़ी बावड़ी, बाबरियों का खेड़ा,
पालका, सतपुड़ा, गांगाजी का खेड़ा, गाडरी खेड़ा, कंथारिया, भैरूसिंह जी का खेड़ा, बड़ौदिया, गिलुण्ड, ओरड़ी, सादी, मंगलवाड़, ऐराल, ओडून्द, पुनावता, चैथपुरा, चटावटी, सुखवाड़ा, घोसुण्डा, सज्जनपुरा, नरपत की खेड़ी, रामथली, बोदियाना, खेरी, बानेड़ा, लसाड़िया, रूद, बनस्टी, भिण्डर, बिजयपुर घाटा, खेड़िया, आवरीमाता, पहुंना, नाहरगढ़, रूद का खेड़ा, गणेशपुरा, उदयपुर, गोपालनगर, कनेरा, जाटों की धनेत, गणेशपुरा, डगला का खेड़ा, सिरोड़ी, कश्मोर, सूरजपोल, बानिणा, धनेत, रघुनाथपुरा, गोपालपुरा, मेलाना, गंगरार व इसके आसपास के कईं गांवों सहित शहर को अलग अलग भागों में बांट कर गोलियाँ वितरित की गई जैसे किला, पुराना शहर, गांधीनगर, नाडोलिया, कीर खेड़ा, भोई खेड़ा, चन्देरिया, प्रतापनगर, कुम्भानगर, सेंती, मधुवन, चामटीखेड़ा, रेलवे काॅलोनी, रामदेवजी का चन्देरिया, मीठाराम जी का खेड़ा, नगरपालिका काॅलोनी सहित सभी क्षेत्रों में गोलियाँ वितरित की गई। सहयोगकर्ता गौभक्तों में सुशील शर्मा, मुकेश नाहटा, मोनू सोनी, अमन गौड़, विपुल सिंह, रजत गुर्जर, राहुल सोनी, अर्जुन, मयंक टांक, मयंक गौड़, रजत शर्मा, विशाल सोनी, देवेन्द्र सिंह, अर्जुन जोशी, मोनू गुर्जर, कमल, दिनेश अहीर, भेरू शर्मा ओडून्द, रौनक सोनी, भेरू सिंह, मनीष वैष्णव, पृथ्वी सिंह, प्रियांक, राज वैष्णव, किशनसिंह, कानजी नायक आदि कई कार्यकर्ताओं ने गली, मोहल्लों में अपनी सेवाएँ दी।

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