चित्तौड़गढ़। विभिन्न शिक्षक समस्याओं के निराकरण के प्रति राज्य सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये के विरोध में राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) के आन्दोलन के अन्तर्गत आज राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर पत्रकार वार्ता आयोजन की श्रृंखला में जिला चित्तौड़गढ़ में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश सभाध्यक्ष अरविन्द व्यास एवं प्रदेश पर्यवेक्षक राजेन्द्र सिंह सारंगदेवोत ने बताया कि संगठन द्वारा बार-बार आग्रह करने व लोकतान्त्रिक तरीके से विरोध प्रकट करने के उपरांत भी सरकार ने न तो
संगठन से कोई संवाद स्थापित किया और ना ही अपने स्तर पर कोई कार्यवाही की है। संगठन ने गत वर्षों में निरंतर राज्य सरकार के समक्ष सभी स्तरों एवं माध्यमों द्वारा सम्पर्क कर समाधान हेतु आग्रह किया, किन्तु संवेदनहीनता अपनाते हुए समस्याओं को हल करने का कोई सार्थक प्रयास नही किया।
जिला अध्यक्ष तेजपाल सिंह शक्तावत ने बताया कि अन्तिम प्रयास के रुप में संगठन ने 23 फरवरी से 09 मार्च 2023 के मध्य जनप्रतिनिध के नाते राज्य के माननीय विधयाकों को संगठन का 11 सुत्रीय माँगों का ज्ञापन प्रेषित कर आग्रह किया कि शिक्षकों की न्ययोचित माँगों के निराकरण हेतु अपने प्रभाव का उपयोग करते हुए उच्च स्तर पर ज्ञापन प्रषित कर सरकार से उचित निराकरण करवाने की मांग हैं।
11 सुत्रीय माँगों के बारे में विस्तृत जानकरी देते हुए जिला मंत्री प्रकाश चन्द्र बक्षी ने कहा कि संगठन ने शिक्षक हित की निम्न बाजिब समस्याओं का समाधान करने के लिये आन्दोलन की राह अपनाई है।
ये प्रमुख 11 सूत्रीय मांगे
1. वेतन विसंगति के निराकरण हेतु गठित सावंत एवं खेमराज कमेटी की रिपोर्टों को तत्काल सार्वजनिक कर लागू किया जावे एवं विभिन्न वेतन विसंगतियों का ततकाल निवारण किया जावे।
2. समस्त राज्य कर्मचारियों को 8-16-24- 32 वर्ष पर ए.सी.पी. का लाभ देकर पदोन्नति पद का वेतनमान प्रदान किया जाए।
3. एनपीएस कार्मिकों के लिए लागू हुई पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की समस्त तकनिकी खमियों को दुरस्त करते हुए
एनपीएस फण्ड की जमा राशि शिक्षकों को देने के साथ-साथ जी.पी.एफ. 2004 के खाता नम्बर तत्काल जारी किये जाए।
4. संपूर्ण सेवाकाल में परिवीक्षा अवधि केवल एक बार एक वर्ष के लिए हो तथा नियमित वेतन श्रृंखला में फिक्सेशन के
समय परिवीक्षा अवधि को भी जोड़ा जाए।
5. शिक्षा विभाग की ऑन लाईन निर्भरता को दृष्टिगोचर रखतें हुए राज्य के समस्त शिक्षकों को एवं संस्थाप्रधानों को मासिक इंटरनेट भत्ता तथा एन्ड्राइड फोन उपलब्ध करवाया जावे।
6.राज्य कर्मचारियों को सेवा निवृति के समय तीन सौ उपार्जित अवकाशों की सीमा को समाप्त किया जाए तथा सेवा निवृति पश्चायात 65, 70, एवं 75 वर्ष की आयु पुर्ण करने पर क्रमाशः 5,10 एवं 15 प्रतिशत पेन्शन वृद्धि की जाए।
7. शिक्षा विभाग में की जा रही संविदा आधारित नियुक्ति प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाकर नियमित भर्ती से ही
पद भरे जाने की कार्यवाही की जाए।
8. अध्यापक संवर्ग के स्थनान्तरण पर तत्काल प्रतिबंध हटाया जाए एवं राज्य के शिक्षकों के स्पष्ट स्थनान्तरण नियम बनाए जाए और समस्त पदो की नियमित वर्षवार एवं नियमानुसार डी.पी.सी. आयोजित की जा कर समय पर पद स्थापन किया जाए।
9. बीएलओ सहित समस्त प्रकार के गैर शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से मुक्त किया जाए। वर्तमान में
जारी जनआधार अघिप्रमाणीकरण एवं डी.बी.टी. योजना के लिए शिक्षकों एवं संस्था प्रधानों को जारी हो रहे अनावश्याक कारण बताओं नोटिस तत्काल प्रभाव से बन्द हो एवं जारी नोटिस वापस लिये जाए।
10. 3 संतान होने पर राज्य कर्मचारियों को पदोन्नति में एक बार पीछे रखने के बाद उनकी मूल वरिष्ठता पुनः बहाल की जाए एवं तीन संतान वाले कार्मिकों को केन्द्र सरकार के नियमानुसार राहत प्रदान की जाए।
11. माध्यमिक शिक्षा में स्टाफिंग पेटर्न तत्काल लागू कर पदों का श्रृजन किया जाए तथा विद्यालय में पद आवंटन में हिन्दी एवं अंग्रेजी माध्यम का विभेद समाप्त कर समान रुप से पद आवंटन प्रक्रिया अपनाई जाए।
संगठन के जिला अध्यक्ष तेजपाल सिंह शक्तावत ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए बताया कि राज्य के समस्त शिक्षक संवर्ग की उक्त न्यायोचित माँगों का तत्काल निराकरण करवाया जाए। राज्य सरकार द्वारा उक्त माँगों पर कोई निर्णय नही किये जाने की स्थिति में संगठन को उग्र आन्दोलन किया जाएगा।
इस अवसर पर प्रदेश सभाध्यक्ष अरविंद व्यास, प्रदेश पर्यवेक्षक राजेन्द्र सिंह सारंगदेवोत, जिलाध्यक्ष तेजपाल सिंह शक्तावत, जिला मंत्री प्रकाश चन्द्र बक्षी, जिला सभाध्यक्ष सैय्यद मुकर्रम अली, जिला महिला मंत्री मधु जैन, नोसर जाट आदि मौजूद रहे।
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