चित्तौड़गढ़। जिला मुख्यालय की चित्तौड़गढ़ विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत की तीसरी बार करारी हार के बावजूद इस हार के लिए जिम्मेदार नगर परिषद के सभापति संदीप शर्मा बजाय हार की जिम्मेदारी लेने के उल्टे निर्दलीय चुनाव लड़कर विधायक बने चन्द्रभान सिंह आक्या के समर्थकों को नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे है। इस संबंध में पूर्व यूआईटी चैयरमेन व पूर्व पालिकाध्यक्ष सुरेश झंवर ने सभापति संदीप शर्मा के पलटवार पर जवाब देते हुए कहा कि चित्तौड़गढ़ शहर में कांग्रेस का बोर्ड बनने के बाद नगर परिषद क्षेत्र मुलभूत सुविधाओं से जूझ रहा है। शहर की सड़के, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट जैसी मुलभूत सुविधाओं के लिए शहरवासी मजबूर है यहीं कारण रहा कि चित्तौड़गढ़ शहर से कांग्रेस प्रत्याशी को नगर परिषद की गलतियों का खामियाजा भुगतना पड़ा और आक्या और भाजपा के वोटों को जोड़कर देखा जाये तो 16 हजार 603 मतों की करारी हार झेलनी पड़ी है जो एक रिकॉर्ड है और अब तक के इतिहास में चित्तौडग़ढ़ नगर परिषद क्षेत्र में कांग्रेस की यह शर्मनाक स्थिति नहीं हुई है। कांग्रेस की इस शर्मनाक एवं करारी हार के बावजूद सभापति संदीप शर्मा जिम्मेदारी लेने उल्टा चोर कोतवाल को डांटे की कहावत को चरितार्थ कर रहे है और खुद की जिम्मेदारी से बच रहे है।
झंवर ने संदीप शर्मा के भाजपा के पहचान देने वाले बयान पर जवाब देते हुए कहा कि चुनाव से ऐन पहले कांग्रेस प्रत्याशी सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत का टिकट कटने की संभावित स्थिति पर जिस तरह कांग्रेस को जेबी संगठन बनाते हुए सभापति और उनके कथित साथियों ने बयानबाजी की और इस्तीफे दिये जाने के साथ-साथ वर्तमान कांग्रेस प्रत्याशी तक को निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा था जो जगजाहिर है। वहीं झंवर ने कहा कि दूसरी ओर उन्होंने तो पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया और चुनाव मैदान में उतरे निर्दलीय प्रत्याशी चन्द्रभान सिंह आक्या के समर्थन मे चुनाव की कमान संभाली और जीत हासिल की जो कांग्रेस के लिए सबक है।
पूर्व चैयरमेन झंवर ने चार वर्ष के कार्यकाल में चित्तौडग़ढ़ नगर परिषद की जनता के साथ भेदभाव का आरोप लगाया और विकास कार्यों में कोताही बरतने की बात कही। वहीं उन्होंने कहा कि नगर के उद्यानों और वृक्षारोपण के नाम पर जितनी राशि व्यय की गई यह भी आने वाले समय में जनता के सामने होगा। शहर की सफाई व्यवस्था चौपट कर दी गई और जिर्णाेद्धार के नाम पर लाखों रूपये फूंक कर विकास का ढिंढोरा पीटने वाले सभापति को खुद की गिरेबान में झांकने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि शहर के नालों की सफाई में हुई बंदरबांट, स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर पेटिंग कर लाखों रूपये की सरकारी राशि का धुंआ करना किसी से छुपा हुआ नहीं है और इसके बावजूद आत्मचिंतन करने के बजाय सभापति अपनी पार्टी के प्रत्याशी के सामने नम्बर बढ़ाने के लिए दूसरों को उपदेश देने से नहीं चूक रहे है और यही कारण है कि इनकी कार्यशैली का परिणाम यह रहा कि शहर की जनता ने उन्हें पूरी तरह नकार दिया है।
इसलिए एक बार उन्होंने पुन: मांग करते हुए हार की जिम्मेदारी लेते हुए सभापति संदीप शर्मा को नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग की है।
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