साथ ही पकने के बाद भी मक्के का पौधा हरा रहता है। जिससे अच्छी गुणवत्ता का चारा भी मिलेगा। इसी महाविद्यालय के एग्रोनॉमी प्रोफेसर डॉ सुभाष धाकड़ ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए दलहन और तिलहन की खेती करने के साथ-साथ पशुपालन एवं जैविक खेती करने पर विशेष जोर दिया। पशुपालन से किसानों को जैविक खाद का प्रयोग करने का लाभ भी मिलेगा जिससे खेती पैदावार बढ़ेगी तथा खेतों में रासायनिक खादों का प्रयोग कम करना होगा। इससे मनुष्य को होने वाली घातक बीमारियों से भी बच सके। गोष्टी के अगले क्रम में पशु चिकित्सक डॉ नितिन आरबर्ड ने पशुपालन पशुओं में लगने वाली बीमारियों एवं उसके उपचार के संबंधी जानकारी से किसानों को अवगत कराया सहायक निदेशक भगवान सिंह कुंपावत कृषि विभाग की योजनाओं की विस्तृत जानकारी के साथ प्राकृतिक प्रकोप से होने वाले फसलों में नुकसान की भरपाई हेतु फसल बीमा अवश्य करवाने की सलाह कार्यशाला में कृषकों को दी। कृषि अधिकारी रामजस खटीक द्वारा किसानों को समन्वित कृषि प्रणाली के अंतर्गत सब्जी की खेती पशुपालन मछली पालन के बारे में बताया गया। उन्होंने बताया कि कैसे फसलों के डटल सड़ी गली एवं बेकार सब्जियों तथा सूकर एवं बतख के गिटथा का प्रयोग करके किसान समन्वित कृषि प्रणाली को अपनाकर अपने लागत को कम एवं आमदनी को बढ़ा सकते हैं। कृषि अधिकारी डॉ शिवांगी जोशी ने खरीफ की फसलों में ज्यादातर दीमक कीट अधिक लगते हैं। इसके लिए उन्होंने बेबेरिया, वैसियाना तथा क्लोरो पायरीफास दवाओं का प्रयोग करने के लिए कहा। कृषि अधिकारी जसवंत कुमार जाटोलिया ने मक्का की फसल को नष्ट कर देने वाला मुख्य कीट फॉलआर्मीवर्म के प्रबंधन के बारे में विस्तृत जानकारी दी। कृषिअनुसंधान अधिकारी नानालाल माली ने मृदा जांच क्यों आवश्यक है एवं इसका नमूना कैसे तैयार किया जाता है। इस पर विस्तृत चर्चा किसानो से की कार्यशाला का संचालन सेवानिवृत्ति कृषि पर्यवेक्षक शिव शंकर उपाध्याय द्वारा किया गया कार्यशाला में जिला प्रवक्ता आशा जोशी व पंचायत समिति कपासन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी ग्राम पंचायत के कृषि पर्यवेक्षक एवं प्रगतिशील एवं सामान्य 100 कृषकों ने कार्यशाला में भाग लिया।
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