आत्मा की शक्ति को साधना और भक्ति से जगाकर राष्ट्र सेवा संभव – राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश


निंबाहेड़ा। साहित्य परिषद एवं संस्कृत विभाग श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को दोपहर बजे से एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय सभागार में किया गया। मुख्यातिथि के रूप में राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश जी रहे। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि राष्ट्र हित का संकल्प प्रत्येक भारतीय का होना चाहिए। सुख सुविधाओं में उलझकर आज का जीवन भोग विलासिता का बनकर रह गया है। प्रकृति और पर्यावरण से प्रेम करना सीखेंसुख सुविधाओं के भरोसे ना रहें। मेवाड़ की पहचान महाराणा सांगाजयमल राठौड़कल्लाजी राठौड़महाराणा प्रताप आदि शूरवीरों की भूमि से है। जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व दाव पर लगा दियाउनसे आज के युवाओं को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय परिसर कल्याण लोक स्थित नक्षत्र वाटिकागौशालाउद्यानब्रह्मांड आरण्य आदि देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। कमल मुनि ने विश्वविद्यालय से निंबाहेड़ा-उदयपुर राजमार्ग को कल्याण मार्ग करने के लिए प्रशासन से निवेदन किया। प्राकृत भाषा एवं जैन दर्शन के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सभी प्रकार की सहायता देने का आश्वासन देने के साथ एक हजार पुस्तके उपलब्ध करवाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में प्राकृत भाषा का संस्कृति एवं संस्कृत के विकास पर विश्वविद्यालय सहायक कुलसचिव डॉ विकास चौधरी ने विस्तार से प्रकाश डाला। 


अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के चेयर पर्सन कैलाशचंद्र मूंदड़ा ने भारतीय संस्कृति की विलक्षणता पर गौरव जताया। उन्होंने भारतीय दर्शनों में जैन दर्शन द्वारा गौ संवर्धन के महत्व को विस्तार से बताया। बटुकों एवं छात्रों में राष्ट्र प्रेम को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय के साहित्य परिषद एवं संस्कृत विभाग की प्रसंशा की। कार्यक्रम संयोजक डॉ मृत्युञ्जय तिवारी ने विषय प्रवर्तन करते हुए शास्त्रों के प्रयोजन पर प्रकाश डाला और शास्त्र रक्षा से ही संस्कृति और समाज के सुरक्षा की बात कही। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय एवं वेदपीठ के सभी आचार्य एवं छात्रों सहित परीक्षा नियंत्रक डॉ. चंद्रवीरसिंह राजावतसहायक कुलसचिव डॉ विकास चौधरीसंस्कृत विभाग से रचना शर्मात्रिलोक शर्माऋषिकेश मिश्रओम पाण्डेयअमरीश त्रिपाठी सहित लेखाकार हरिशंकर जोशीसाक्षी मिश्रासंजय झलोया आदि उपस्थित रहे।

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