मीरा मंदिर लक्ष्मण व मेना राव के भजनों से गूंज उठा



चित्तौड़गढ़। मीरा स्मृति संस्थान द्वारा शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर भक्त शिरोमणि मीरा जयंती के उपलक्ष्य में दो दिवसीय मीरा महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। जिसके द्वितीय दिवस सोमवार को विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक दुर्ग स्थित मीरा मंदिर में राजस्थानी लोक गीत की प्रस्तुति के दौरान प्रसिद्ध भजन गायक लक्ष्मण राव व मेना राव द्वारा जब मीरा के प्रिय भजन ‘सावरा आवों तो सरी माधव रा मंदिर में मीरा एकली खड़ी‘ की प्रस्तुुति दी तो ऐसी अनुभूति हुई मानों मीरा अपने गिरधर गोपाल को मनोभाव से मेवाड़ की पावन धरा पर पुकार रही हो। इस भजन की प्रस्तुति के बीच दुर्ग दर्शन को आये देशी-विदेशी पर्यटक भी मीरा भाव से नृत्य कर भगवान श्री कृष्ण को रिझाते नजर आये। 
कलाकार राव ने गणेश वंदना से अपनी प्रस्तुति प्रारम्भ की। संयोगवश मीरा की जन्म स्थली मेड़ता से आये कलाकारों ने दरद दिवानी मीरा के प्रिय भजन मैं तो प्रेम दिवानी मेरो दरद न जाने कोय की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को आनंदित कर दिया। कार्यक्रम की प्रस्तुति से पूर्व मीरा मंदिर में पहुंचे कलाकारों ने जब भक्तिमति मीरा के दर्शन किये तो बरबस ही उनके नेत्रों से अश्रूधारा बह चली। उन्हें ऐसा लगा कि वे मीरा के दर्शन कर भाव विभोर हो गये। कत्थक गुरू हरीश गंगानी एंव दल द्वारा मीरा भाव को संजोते हुए शानदार नृत्य की प्रस्तुति देकर मीरा मंदिर को वृंदावन के महारास के अनुरूप प्रतिपादित करने में कोई कोर कसर नहीं रखी। उनकी प्रस्तुति देखकर सांसद सी पी जोशी ने भी कालाकारों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
 इसी दौरान दिव्या गैउबा ने अपने ही अंदाज में अजी थाने काई काई बोल सुनावा सावरा गिरधारी की प्रस्तुति देकर भक्त शिरोमणि मीरा के सावरा के प्रति उलाहने को प्रस्तुत कर न केवल श्रोताओं को आनंदित किया बल्कि स्वंय भी मीरा रूप में चरितार्थ करते हुए कत्थक की प्रस्तुति दी। प्रारम्भ में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरीश गंगानी एंव सांसद सी पी जोशी का संस्थान के अध्यक्ष सत्यनारायण समदानी, सचिव अर्जुन मूंदड़ा, जे पी भटनागर, विनायक द्विवेदी, अरविंद पुरोहित द्वारा आत्मीक स्वागत अभिनंदन किया गया। इस मौके पर संस्थान अध्यक्ष समदानी ने बताया कि वर्ष 1945-46 में स्वामी आनंद स्वरूप द्वारा शरद पूर्णिमा के अवसर पर मीरा मंदिर में प्रथम बार मीरा महोत्सव का आयोजन किया गया, लेकिन एक अंतराल के बाद 1990 में तत्कालीन जिला कलक्टर मालोविका पंवार के सानिध्य में पुनः मीरा स्मृति संस्थान का गठन कर मीरा महोत्सव का शुभारम्भ किया गया। इस बीच विगत दो वर्षो के कोरोना काल के बाद एक बार फिर उसी उत्साह से यह महोत्सव मनाया जा रहा है, जिसमें केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय, पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज तथाा उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पटियाला के ख्याति प्राप्त कलाकारों को आमंत्रित कर मीरा कर्म स्थली में इस महोत्सव को आकर्षक रूप देने का प्रयास किया गया है। मीरा मंदिर में करनल रणधीर सिंह सहित संस्थान के पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद थे।

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