गैंगेस्टर की हत्या के गवाह को गोलियों से भूनने का 13 साल पुराना मामला, एक महिला सहित 5 को उम्र कैद की सजा


कोटा। चित्तौड़गढ़ में गैंगस्टर की हत्या के गवाह को गोलियों से भूनने के 13 साल पुराने मामले में कोटा एडीजे कोर्ट (अपर जिला एवं सैशन न्यायाधीश कोर्ट क्रम 5) ने एक महिला समेत 5 दोषियों को सजा सुनाई है। इनमें गैंगस्टर भानुप्रताप गिरोह के नन्दू उर्फ नरेंद्र, भाया उर्फ सत्येंद्र, किशन जंगम, वसीम, शाहिना को अंतिम सांस तक उम्र कैद की सजा सुनाई है। आज शनिवार दिन में करीब 4 बजे फैसला आया। सभी को गैंगस्टर लाला बैरागी हत्याकांड के गवाह बृजराज और उसके साथी जितेंद्र की हत्या के मामले में सजा सुनाई गई है। सरकारी वकील अख्तर खान अकेला ने बताया कि गैंगस्टर भानुप्रताप समेत कुल 9 आरोपी थे। भानुप्रताप और राजेश कमांडो की मौत के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई बंद की गई। बाकी 5 लोग दोषी पाए गए। एक आरोपी बिट्टू उर्फ दिग्विजय कोर्ट में पेश नहीं हुआ है। इस वजह से उसे फरार घोषित किया गया है।
कोर्ट ने बृजराज और जितेंद्र की हत्या करने का दोषी 4 (नन्दू उर्फ नरेंद्र, भाया उर्फ सत्येंद्र, किशन जंगम, शाहिना) को माना है, जबकि वसीम को षड्यंत्र रचने का दोषी माना है। पांचों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। एक आरोपी सुमेर सिंह के खिलाफ अलग से कार्रवाई चल रही है।
मृतक जितेंद के भाई सूरज ने चित्तौड़गढ़ जिले के बेंगू थाने में शिकायत दी थी। बेंगू थाने में हत्या का मामला दर्ज हुआ था। बेंगू कोर्ट में सुनवाई के दौरान गवाहों को जान का खतरा था। साल 2016 में राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर कोटा डीजे कोर्ट में केस ट्रांसफर हुआ। फिर एडीजे क्रम 2 में आया। बाद में एडीजे क्रम 5 में आया।
इस मामले में कोर्ट ने 103 पेज का फैसला दिया। 65 गवाह के बयान हुए। 139 दस्तावेज व 14 आर्टिकल पेश किए। अख्तर खान अकेला ने बताया कि गंभीर मामला था। समाज के अंदर खौफनाक वातावरण पैदा करने वाला था। किसी व्यक्ति की गवाही नहीं देने के चलते हत्या करने का मामला है। इसलिए ऐसे व्यक्तियों को रेयर रेस्ट टू रेयर रेस्ट मानकर मृत्युदंड दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस मामले को रेयर रेस्ट टू रेयर रेस्ट केस नहीं माना। लेकिन सांस लेने तक उम्र कैद की सजा सुनाई।

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