उपप्राचार्य सीधी भर्ती के सुझाव पर व्याख्याताओं में आक्रोश, जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन


चित्तौड़गढ़। उपप्राचार्य पद पर सीधी भर्ती हेतु शिक्षा विभाग द्वारा सुझाव मांगे जाने पर राज्य के 54000 व्याख्याताओं ने विरोध व्यक्त कर बुधवार को राजस्थान शिक्षा सेवा प्राध्यापक संघ रेसला के जिला अध्यक्ष शशि कुमार उपाध्याय के नेतृत्व में  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
जिलाध्यक्ष उपाध्याय ने बताया कि शिक्षा विभाग के व्याख्याताओं और माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के बरसों पुराने पदोन्नति विवाद को समाप्त करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट 2021-22 में उपप्राचार्य का पद अतिरिक्त प्रमोशनल पद के रूप में सृजित करने की घोषणा की थी जिस पर शत् प्रतिशत व्याख्याताओं से ही पदोन्नति करने का प्रावधान किया गया था। उक्त घोषणा की पालना में कार्मिक व विधि विभाग की स्वीकृति से कैबिनेट  की अनुमति की मोहर के बाद मुख्यमंत्री की बजट 2021-22 की घोषणा को साकार करने के लिए 12421 पदों का उपप्राचार्य का कैडर बनाया जिस पर शत् प्रतिशत व्याख्याताओं की पदोन्नति किए जाने का प्रावधान किया गया। किंतु शिक्षा विभाग के निदेशालय में बैठे कुछ विशेष विचारधारा के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री और केबिनेट के फैसले को नकारते हुए, इन पदों पर डीपीसी कराने के बजाय आम शिक्षकों से राय मांगने के लिए एक विवादास्पद पत्र जारी किया है। विभागीय अधिकारियों की इस अविधिक नियमानुसार प्रकिया से राज्य के व्याख्याताओं में विभाग के विरुद्ध आक्रोश व्यक्त हैं। विभाग के इस पत्र के विरोध में प्राध्यापक संघ रेसला ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया है जिसमें बीस नवंबर से पहले उपप्राचार्य पद पर शत प्रतिशत व्याख्याताओं से ही डीपीसी की मांग की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि ऐसा नहीं होता है तो रेसला इक्कीस नवंबर से जयपुर में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन करेगा। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष शशि कुमार उपाध्याय, जिला उपाध्यक्ष शहजाद बेग, राजीव मीणा, जिला कोषाध्यक्ष हरिश तानान, जिला महामंत्री जितेन्द्र सोनी, दिनेश कुमावत, चित्तौड़गढ़ ब्लॉक अध्यक्ष देवेंद्र सिंह, घनश्याम जाजपुरा, महीपाल चौधरी,अशोक गौड़, शैलेन्द्र निगम, सुरेश जोशी,सहित कई व्याख्याता उपस्थित थे।

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