वेद विद्यालय में समारोह पूर्वक हुआ उपनयन संस्कार

सांवलियाजी (उमेश तिवारी)। शुक्रवार को सांवलियाजी में आयोजित हुए उपनयन संस्कार में बड़ीसादड़ी पुरुषोत्तमाचार्य आश्रम के महंत 1008 सुदर्शनाचार्य महाराज ने संबोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन में ऋषि परम्परा से ही मानव का उद्धार होता है। श्री सांवलियाजी मंदिर मंडल के द्वारा संचालित वैदिक पाठशाला गुरुकुल में नवप्रवेशित बटुकों का शुक्रवार को समारोह पूर्वक उपनयन संस्कार करवाया गया। श्री सांवलियाजी वेद विद्यालय में गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी 11 बटुकों का उपनयन संस्कार कार्यक्रम श्री सांवलिया वेद विद्यालय परिसर में आयोजन हुआ। आयोजन के मुख्य अतिथि स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज थे। सुदर्शनाचार्य महाराज ने वेद और जनेऊ का महत्व पर गंभीरता से प्रकाश डाला। धर्म ग्रंथों को विस्तार से बताया। महाराज ने अपने शब्दों में वेदों की महत्ता को और गुरुकुल परंपरा को उदाहरण देते हुए महाराज ने कहा कि वेदों के माध्यम से ही भारत पुनः विश्व गुरु बनेगा एवं महाराज ने हमारी संस्कृति को विस्तार से बताया। श्री सांवलियाजी मंदिर मंडल बोर्ड के अध्यक्ष भेरुलाल गुर्जर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन मंदिर मंडल करता रहता है और यह वेद विद्यालय हमारा अभिन्न अंग है। इस वेद विद्यालय के काम में कोई कमी नहीं आएगी। गुर्जर ने अपने वक्तव्य में कहा कि इस प्रकार के आयोजन से भगवान सांवलिया सेठ की जय जयकार होती है और मंदिर मंडल प्रबंधन समिति इस प्रकार के आयोजनों के लिए पाबंद है और हमेशा करेंगी। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विश्व एवं देश भर के वेद प्रचारक हरि शंकर ने भारतीय संस्कृत एवं संस्कृति पर गहरा प्रकाश डाला। हरि शंकर ने चारों वेदों के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि इस प्रकार के वेद विद्यालय देश भर में 55 गुरुकुल जो शुद्ध पद्धति से चल रहे हैं एवं संतों एवं महात्माओं के भी चल रहे हैं उनका भी हम सब लोग इस प्रकार से सहयोग करते हैं और आगे करते रहेंगे। गुरुकुल हमारी आस्था का विषय है संस्कृत और सभ्यता बिना गुरुकुल एवं बिना संत समाज के जीवित नहीं रह सकती है। कार्यक्रम में सर्वप्रथम वेद पूजन एवं यज्ञ और भारतीय परंपरा के अनुसार शुरू हुआ। कार्यक्रम का संचालन गुरुकुल के प्रधानाचार्य सुशील मिश्रा ने किया। अतिथियों का श्रीफल भेंट कर व उपरना पहनाकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के आचार्य अनंत मिश्रा, आचार्य निर्मल दहाल एवं दिल्ली एवं मथुरा के वेद विद्यालय से पधारे पांच आचार्य उन्होंने विधि विधान से इस कार्य को संपन्न कराया। कार्यक्रम में श्री सांवलियाजी मंदिर मंडल बोर्ड के सदस्य संजयकुमार मण्डोवरा, भैरू लाल सोनी, शंभू सुथार, प्रशासनिक अधिकारी नंदकिशोर टेलर, मंडार केसरी मनोहर लाल चौबे आदि समस्त सदस्यों का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि भारत राजस्थान के क्षेत्रीय संगठन मंत्री अविनाश ने अपने विचार में संस्कृत और वेद सिक्के के दोनों एक पहलू है, संस्कृत और वेद के आधार पर ही हम विश्व कल्याण की कामना करते हैं और संस्कृत और संस्कृति को दोनों को मिलाकर के संस्कृत के प्रचार-प्रसार पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के अंत में मंदिर मंडल द्वारा भोजन प्रसादी का आयोजन रखा गया। शांति पाठ के साथ में कार्यक्रम संपन्न हुआ।

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