जहाजपुर (माय सर्किल न्यूज़ @रविकांत जोशी)। कस्बे के शाहपुरा राेड स्थित दिगंबर जैन 1008 श्री मुनि सुब्रत नाथ अतिशय क्षेत्र स्वस्ति धाम जहाजपुर में पर्यूषण पुनीत पावन पर्व पर आज उत्तम शौच धर्म की पूजा आराधना की गई । जिसमें सभी धर्म प्रेमी बंधुओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया उत्तम शौच यानी पवित्रता शरीर की नहीं, मन की आत्मा की। लोभ समाप्त होने पर जो पवित्रता प्राप्त होती है वही उत्तम शौच धर्म है पवित्र मन सबसे उत्तम तीर्थ है।
क्षुल्लिका 105 श्री संस्कृति भूषण माताजी ने आज धर्म सभा को संबोधित करते हुए बताया की हृदय में संतोष धारण करके, शरीर से तपस्या करनी चाहिए निर्दोष शौच धर्म ही सर्व जगत में प्रसिद्ध है ,आशा अर्थात इच्छा रूपी नाग महा दुःख को देने वाला है, संतोष को धारण करने वाले प्राणी सुख प्राप्त करते हैं। यह जीव शील, जप, तप, ज्ञान के प्रभाव से पवित्रता प्राप्त करता है, गंगा जमुना आदि नदियों एवं समुद्र में निरंतर नहाने से भी पवित्रता नहीं होती क्योंकि इस शरीर का स्वभाव ही अपवित्र (अशुचिता) है यह शरीर ऊपर से तो मल रहित पवित्र दिखाई देता है परंतु इसके भीतर मल भरा हुआ है तब ऐसे शरीर को किस प्रकार से पवित्र कहा जाए जिनका शरीर तो बहुत मेला है परंतु जो उत्तम गुणों के भंडार हैं ऐसे महावर्ती साधु ही इस उत्तम शौच गुण को प्राप्त करते हैं।
मीडिया प्रभारी नेमीचंद जैन ने बताया
पूजा भक्ति भाव करने वालों में नेमीचंद जैन ज्ञानेंद्र जैन, पारस कुमार जैन, अनिल जैन, लक्ष्मी लाल टोंग्या भागचंद सोगानी
दानमल जैन, देवेंद्र टोंग्या प्रवीण
एवं महिला मंडल की सभी महिलाएं थी।
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