निर्जला एकादशी उपवास रख सुनी कथा

 जहाजपुर, (रविकांत जोशी)। शास्त्रों की मान्यता के अनुसार साल भर में आने वाली एकादशी एवं पूरे साल में यह एक बार आने वाली निर्जला एकादशी की मान्यता अधिक मानी गई है। आचार्य पंडित कृष्ण गोपाल जोशी ने बताया कि पूरे वर्ष की एकादशी करना और एक निर्जला एकादशी का व्रत रखना 100 के बराबर माना गया है निर्जला एकादशी के पावन पर्व पर आज कस्बे में जगह-जगह लोगों ने आमजन को शरबत पिलाया एवं गायों को चारा डालकर दान पुण्य किया गया। निर्जला एकादशी के अवसर पर नगर के सभी मंदिरों में झांकियां सजाई गई एवं भगवान सत्यनारायण की कथा का आयोजन हुआ उसके बाद महा आरती कर भगवान का प्रसाद वितरण किया गया। निर्जला एकादशी की मान्यता के अनुसार आज के दिन ब्राह्मणों को भोजन करना वस्त्र दान करना एवं गौ माता को चारा खिलाने से जीवन में किए गए सभी पाप धुल जाते हैं। इसी मान्यता के चलते महिलाओं एवं पुरुषों ने निर्जला एकादशी का उपवास रख अपने घर परिवार की खुशहाली की मनोकामनाएं मांगी एवं दान पुण्य किया।

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