चित्तौड़गढ़, (सलमान)। केंद्र की मोदी सरकार और राजस्थान सरकार निचले तबके के श्रमिकों और आम आदमियों को लाभ देने के लिए कई प्रकार की योजनाएं चला रखी। निर्माण श्रमिकों के लिए श्रमिक कार्ड बनाकर उन्हें ज्यादा से ज्यादा लाभ देने की कवायद करती है।
लेकिन श्रमिकों को लाभ देने वाला विभाग ही उनके गरीब तबके के लोगों के अधिकारों पर कैंची चला दे तो उसे क्या कहियेगा..? ऐसा काम चित्तौड़गढ़ के श्रम विभाग में देखा जा रहा है। श्रम विभाग के उप श्रम आयुक्त ने फरवरी माह में पदभार ग्रहण किया था। पिछले 5 माह में श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं में कुल 12 हजार 21 प्रकरणों के लिए मजदूरों ने अभ्यावेदन दिये लेकिन महज 149 प्रकरण ही स्वीकार किये गये। जबकि 9 हजार 500 प्रकरणों पर कैंची चला दी गई है। श्रम विभाग के पोर्टल से प्राप्त इन आकंड़ों से प्रतीत होता है कि विभाग के अधिकारी मजदूरों को लाभ देने में कितनी कौताही कर रहे है। पिछले दिनों श्रम विभाग का मामला विधानसभा सभा मे भी उठ चुका हैं।
●ढ़ाई हजार में से प्रसूति सहायता
योजना में महज 3 स्वीकृति
श्रम विभाग से मजदूरों को मिलने वाली लाभ की बानगी इसी बात से देखी जा सकती है कि गत 27 फरवरी से 24 जुलाई तक विभाग को प्रसूति सहायता में मिलने वाले लाभ के लिए 2529 आवेदन मिले लेकिन विभाग के आंकड़ों के अनुसार महज 3 प्रकरणों को ही स्वीकृति दी गई और 2203 प्रकरण निरस्त करते हुए 137 प्रकरण लम्बित बताये गये है। इसी तरह निर्माण श्रमिक शिक्षा कौशल विकास योजना में 6 हजार 950 प्रकरणों में से 135 प्रकरणों को स्वीकृति देते हुए 5 हजार 48 निरस्त कर दिये गये है। शुभ शक्ति योजना में तो 1440 में से एक भी प्रकरण में स्वीकृति नहीं दी गई है। जबकि टूल किट सहायता योजना में 162 में से एक ही व्यक्ति को सहायता मिल पाई है। अब ऐसे में सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं का कितना लाभ मजदूरों को मिल पा रहा है। यह देखने वाली बात है।
●क्या है प्रावधान
जानकारी के अनुसार श्रम विभाग द्वारा मजदूरों के लिए संचालित
योजनाओं प्रसूति सहायता योजना में लड़की होने पर 21 हजार व लड़के होने पर 20 हज़ार का प्रावधान है। जबकि हितधारी की सामान्य मृत्यु होने पर 2 लाख और दुर्घटना मृत्यु होने पर 5 लाख रूपये, निर्माण श्रमिक कौशल योजना में छठी क्लास से एमए तक 8 हजार से लेकर 50 हजार तक, टूल किट सहायता योजना में 2 से 5 हजार रूपये, आवास योजना में डेढ़ लाख।रूपये और शुभ शक्ति योजना में लड़की शादी होने पर 55 हजार रूपये मिलने का नियम है। श्रम विभाग द्वारा प्रदेश में करीब 8 योजनाएं संचालित है और मजदूरों के हितों के लिए यह योजनाएं सरकार ने चलाई है। जिसके लिए मजदूर श्रमिक कार्ड बनवाकर योजनाओं का लाभ लेते है। लेकिन विभाग के अधिकारी और कार्मिक ही इन योजनाओं पर पलीता लगाने में लगे है।
◆इनका कहना हें कि -
ई-मित्र से अपलोड हुए आवेदनों में जयपुर स्तर से अप्रैल में कई आवेदन निरस्त हुए थे। हालांकि डेटा जिन तिथियों के बीच देखा गया है यह रिपोर्ट ओवर ऑल नहीं है। सिटीजन पेडिंग के तहत कई आवेदन ऊपर के स्तर पर निरस्त किये गये है।
-गजराज सिंह, उप श्रम आयुक्त, चित्तौड़गढ़।
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