चित्तौड़ के निजी अस्पताल में पांव का करवाया ऑपरेशन, उदयपुर में डॉक्टरों ने कहा-काटना पड़ेगा पांव, परिजनों के उड़े होश, किया हंगामा

चित्तौड़गढ़। निजी अस्पताल के गलत ऑपरेशन की वजह से एक व्यक्ति को कई परेशानियों में लाकर खड़ा कर दिया हैं। चित्तौड़गढ़ के एक निजी अस्पताल में ईलाज करवाने के बाद तबियत बिगड़ी तो इसे उदयपुर ले गए जहाँ डॉक्टरों में उसके पैर काटने को कहा तो परिजनों के होश उड़ गए। चित्तौड़गढ़ शहर के पीजी कॉलेज के सामने एक निजी चिकित्सालय द्वारा दुर्घटना में घायल मरीज का ऑपरेशन कर गलत इलाज करने का आरोप लगाते हुए मरीज के परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया है और अस्पताल के बाहर ही धरना दे
दिया। इस मामले में मरीज के परिजनों ने अस्पताल के बाहर हंगामा किया जिस पर सदर थाना अधिकारी विक्रम सिंह, कार्यवाहक सीएमएचओ डॉ राकेश भटनागर भी मौके पर पहुंचे लेकिन चिकित्सालय की ओर से कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सेंती मार्ग पर स्थित राजस्थान हॉस्पीटल में 21 वर्षीय कन्हैयालाल पुत्र शंकरलाल भील निवासी बस्सी की दुर्घटना होने पर उसे राजस्थान हॉस्पीटल ले गए और यहां ऑपरेशन के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई जिसे चिकित्सालय प्रबन्धन ने उदयपुर रेफर कर दिया। उदयपुर में चिकित्सकों ने उसके पैर में गैंगरीन होने की बात कहते हुए पैर काटने को कहा तो
परिजनों के होश उड़ गये और वे मरीज को लेकर परिवार सहित चित्तौड़गढ़ राजस्थान हॉस्पिटल के बाहर पहुंच गये और हंगामा खड़ा दिया।
इस दौरान पूर्व उपप्रधान सीपी नामधराणी, चित्तौड़ी आठम महोत्सव समिति के मुकेश नाहटा और भील समाज के जिलाध्यक्ष गोपाल भील भी पहुंचे और चिकित्सालय प्रबन्धन के खिलाफ कार्यवाही की मांग
की। इस दौरान थाना प्रभारी विक्रम सिंह ने चिकित्सालय प्रबन्धन से बात करने की कोशिश की लेकिन सम्पर्क नहीं हो पाया। विवाद बढ़ता देख थानाप्रभारी विक्रम सिंह ने कहा कि फरियादी की रिपोर्ट पर मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट ली जायेगी और मुकदमा दर्ज कर नियमानुसार कार्यवाही
की जायेगी। राजस्थान अस्पताल के बाहर परिजनों के हंगामे के बाद चिकित्सालय के प्रभारी डॉ कामिल पहुंचे और मरीज का निःशुल्क उपचार करने की बात कही लेकिन मुआवजे से इंकार कर दिया। परिजनों ने उससे इलाज कराने पर
असहमति जताई। इस बीच सामान्य चिकित्सालय की टीम भी पहुंची और चिकित्सालय की जांच की जिसमें कई कमियां पाए जाने की जानकारी सामने आयी है। अस्पताल में हंगामे के दौरान नर्सिंग कर्मचारियों के अतिरिक्त कोई चिकित्सक नहीं था जिस पर सदर थानाधिकारी विक्रम सिंह ने भी नाराजगी जाहिर की। चिकित्सक ड़ॉ कामिल द्वारा मुआवजे से इंकार किये जाने के बाद अस्पताल में फिर हंगामा शुरु हो गया और परिजन मरीज को लेकर धरने पर बैठे रहे।


इनका कहना हैं कि-

कन्हैयालाल 4 जुलाई को बाइक दुर्घटना में घायल हो गया था जिसे चिकित्सालय भर्ती कराया गया जहां से उसे राजस्थान हॉस्पीटल लेकर आए। 5 जुलाई को दाएं पैर का ऑपरेशन किया और 2-3 दिन बाद उदयपुर जाने को बोल दिया। 10 जुलाई को परिजन उसे अहमदाबाद लेकर गये तो वहां गलत ऑपरेशन करने की बात कहते हुए चिकित्सकों ने पैर में गैंगरीन बताया और पैर काटने की कहा। इस मामले में अब चिकित्सालय प्रशासन गायब है। उसके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए।

-गोपाल भील, जिलाध्यक्ष राणा पूंजा भील समाज

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