कपासन। प्रख्यात सूफी संत हज़रत दीवाना शाह साहब र.अ. का तीन दिवसीय उर्स का समापन मेवाड का राजा दीवाना, दुल्हा बना है ख्वाजा, उर्से दीवाना मुबारक हो के नारों के साथ हुआ।
दरगाह वक्फ कमेटी के सैक्रेट्री मोहम्मद यासीन खाँ अशरफी के अनुसार बाबा हुजूर का 79वां तीन दिवसीय उर्स मंगलवार रात्रि 3ः30 बजे गुस्ल की रस्म अदा हुई व प्रातः 5 बजे देग का खाना तकसीम हुआ। 08ः15 बजे शाही महफिल खाने मे महफिले मिलाद से कुल की महफिल शुरू हुई। कव्वाल पार्टियो ने बारी-बारी से अपने कलाम पेश कर दाद बटोरी आखिर मे हज़रत महबूबे इलाही र.अ. के मुरीदे खास तूतीऐ हिन्द हज़रत अमीर खुसरो र.अ. द्वारा 800 साल पूर्व रचित ’’आज रंग है री माँ, रंग है री’’ पढ़ा तो पुरे दरगाह परिसर मे बैठे आशिके दीवाना झूम उठे। और दिल खोल कर कव्वालो को ईनाम दिया। उसके बाद कुल की महफिल हुई तिलावते कलामे पाक के बाद शिजरा पढा, हुजूर सरकारे दो आलम स.अ.व. बुजुर्गानेदीन एवं बाबा हुजूर के वसीले से पुरी दुनिया और खासकर अपने मुल्क मे अमनो सुकून की दुआ की गई तो पुरा दरगाह परिसर आमीन-आमीन की सदाओ से गूंज उठा। जो व्यक्ति जहा था वही खडा-खडा बाबा हुजूर से अपनी इल्तिजा मन-ही-मन मे इस तरह से कर रहा था मानो बाबा हुजूर उसके सामने खडे होकर सुन रहे है। कुल की फातिहा के बाद कुल के छींटे होते ही जायरीने दीवाना अपने-अपने घरो के लिए रवाना हो गए।
राजस्थान बार्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ जयपुर के चेयरमेन डॉ0 खानु खान बुधवाली ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, जिला प्रशासन, स्थानीय प्रशासन, पुलिस, नगरपालिका, बिजली, पानी, रोडवेज, रेल्वे अधिकारियों का शुक्रिया अदा किया व कहा की बाबा हुजूर की दरगाह मे जो गंगा जमनी तहजीब देखने को मिली आज पुरे मुल्क मे ऐसी ही जरूरत है। आज के दिन खास तौर से बाबा हुजूर के शिष्य मास्टर हरीराम कुमावत को याद कर कहा की ऑल राजस्थान मे पहली दरगाह है जहा पर किसी प्रकार का कोई अतिक्रमण नही है। राजस्थान के वक्फ बोर्ड के अधीन जितनी भी दरगाह कमेटीया है उन्हे चाहिए की कपासन मे आकर देखे की यहा की कमेटी केसे काम करती है कमेटी का हर सदस्य काम के प्रति जागरूक है
इस मौके पर 79वें उर्स मे राजस्थान बार्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ जयपुर के सदस्य हाजी युसूफ खाँ, शब्बीर शैख, राजस्थान मदरसा बोर्ड के सदस्य असरार कुरैशी, ख्वाजा गरीब नवाज खुद्दाम अन्जुमन कमेटी के सैक्रेट्री अब्दुल वाहीद अंगारा।
7 सितम्बर को प्रातः 5 बजे आस्ताना ऐ आलिया मे स्थित मुख्य मज़ार के पट आम जायरीन के दर्शन हेतु खोले जाएगें।
दरगाह वक्फ कमेटी के सदस्य सैयद अख्तर अली बुखारी के अनुसार बाबा हुजूर का विसाल 8 सफर 1363 हिजरी को हुआ व 8 सफर 1364 हिजरी का पहले उर्स का पेम्पलेट मिला जिसमें मजीदी प्रेस अजमेर द्वारा छपवाया गया है उस पेम्पलेट के हिसाब से यह उर्स 79वां न होकर 81वाँ होना चाहिए। इसलिए अब जो 1445 हिजरी का उर्स होगा वह उर्स 82वां उर्स कहलाएगा। इस बात का सभी जायरीन ने स्वागत किया।
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