वृद्ध को जो भार मानता है, इससे बढ़कर उसका दुर्भाग्य और कुछ नहीं हो सकता-सन्त कमलमुनि


चिकारड़ा, (पवन अग्रवाल)। जो ज्ञान शास्त्रों से और संतो से भी नहीं मिल पाता वह अनुभव का ज्ञान जिंदगी में चढ़ाव उतार की ठोकरे खाने के बाद बुजर्गो अनुभव से परिपक्वता से प्राप्त होता है। उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने वात्सल्यधाम में शताब्दी गौरव उपाध्याय प्रवर मूलचंद जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि पर संबोधित करते कहा कि वृद्ध की सेवा करने पर उनकी आत्मा से मिलने वाला आशीर्वाद हमारे जीवन के लिए वरदान बनता है।
 मुनि कमलेश ने बताया कि युवाओं का जोश और वृद्धों का अनुभव दोनों का समन्वय हो जाए कई नए कीर्तिमान स्थापित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि वृद्ध आश्रम की संस्कृति आध्यात्मिकता की दुहाई देने वाले देश के मुंह पर करारा तमाचा है।  वृद्ध अनुभव का खजाना होता है। शास्त्रों में उसे भगवान के रूप में माना गया है। 
 राष्ट्रसंत ने कहा वृद्ध जो भार मानता है।  इससे बढ़कर उसका दुर्भाग्य और कुछ नहीं हो सकता उसके द्वारा किया गया दान पुण्य और साधना भी उल्टे घड़ी पर पानी डालने के समान होगी।  जैन संत ने कहा कि माता पिता ने अपनी जिंदगी दांव पर लगा के आपको इस योग्य बनाया उनको अनदेखा किया तो उनके आत्मा से निकलने वाली बद्दुआ हमें खाक में मिला देगी। अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच दिल्ली महिला शाखा जिला इकाई मंदसौर की वरिष्ठ कार्यकर्ता टीना वीरवाल ओर से वात्सल धाम में कुर्सियां भेंट की गई। नितिन भटेवरा, सुभाष बाबेल, अजीत खटोड़,धर्मेंद्र परिहार, शशि मारू,  सपना नाहर, नेहा जैन, सीमा चोर्डिया सभी कार्यकर्ताओं ने प्रसाद वितरण किया।

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