किसानों से सिंगल सुपर फास्फेट का रबी फसलों में अधिक से अधिक उपयोग करने का आहवान- जिला कलक्टर


चित्तौड़गढ़। अरविन्द कुमार पोसवाल जिला कलक्टर ने जिले के किसानों को डीएपी उर्वरक की तुलना में एसएसपी उर्वरक (राकोड़िया) के उपयोग करने का आहवान किया। एसएसपी उर्वरक डीएपी उर्वरक की तुलना में सस्ता एवं बाजार में आसानी से उपलब्ध है जिसका अधिक से अधिक उपयोग करने की किसानों से अपील की। इस हेतु कृषि विभाग के सभी अधिकारी एंव कार्मिको को व्यापक प्रचार-प्रसार करने हेतु निर्देशित किया गया।
उप निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. एस. एल. जाट ने बताया कि एक बैग डीएपी (एक बैग डीएपी में फास्फोरस 23 किलोग्राम व नाइट्रोजन 9 किलोग्राम) जिस हेतु 1350 रुपये लागत आती है जबकि विकल्प के रूप में तीन बैंग एसएसपी एवं एक बैग यूरिया का प्रयोग किया जाता हैं तो इससे (24 किलोग्राम फास्फोरस, 16 किलो सल्फर एवं 20 किलोग्राम नाइट्रोजन) प्राप्त होता है जिस हेतु 1617 रुपये की लागत आती है इसमें 16 किलो सल्फर अतिरिक्त मिलती है। केवल डीएपी क्रय करने पर सल्फर अतिरिक्त क्रय करना पड़ेगा जिसकी लागत 1600 रुपये अतिरिक्त आएगी। किसान भाइयों से अपील की हें की डीएपी के बजाय 3 बैंग एसएसपी के साथ एक बैग यूरिया का उपयोग करे।
जिले में 5 ईकाईयाँ एसएसपी की कार्यरत है। जिससे जिले में एसएसपी उर्वरक की कोई कमी नही है। डॉ. जाट ने कृषि आदान जैसे बीज, उर्वरक एवं कीटनाशक दवाईयों की गुणवत्ता को लेकर किसी भी तरह की शिकायत एवं कृषि आदानों की कमी होने पर तुरन्त क्षेत्र में कार्यरत सहायक कृषि अधिकारी / कृषि पर्यवेक्षक को अवगत कराने का कृषकों से आह्वान किया। डॉ. जाट ने क्षेत्र में कृषि आदानों की कालाबाजारी न हो जिस हेतु पुरी सतर्कता के साथ कार्य करने हेतु कार्मिकों को निर्देशित किया। यदि कहीं भी ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है तो तुरन्त जानकारी में लाने हेतु कहा जिससे नियमानुसार कार्यवाही की जा सकें।

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