भूमि विकास बैंक के अध्यक्ष पद से कमलेश पुरोहित को फिर हटाया, सामाजिक संस्थाओं से भी दिए इस्तीफे


चित्तौड़गढ़। भूमि विकास बैंक के अध्यक्ष कमलेश पुरोहित को अयोग्य घोषित कर पद से हटाने के बाद आज भूमि विकास बैंक के उपाध्यक्ष बैंक कमेटी सदस्य लेहरू लाल जाट ने अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाल लिया। इस दौरान निवर्तमान अध्यक्ष पुरोहित ने सोसाइटी और निलिया महादेव गौशाला समिति सेकेट्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए कहा कि वे इस मामले में न्यायालय की शरण लेंगे।
भूमि विकास बैंक से चैयरमेन के पद से हटाये जाने के बाद आज कमलेश पुरोहित ने बैंक में मीडियाकर्मियों के समक्ष कहा कि उन्हें राजनीति करके जिस प्रकार हटाया गया है उनका मन व्यथित हो गया है और अब वे सामाजिक कामों से जुड़ी संस्थाओं से इस्तीफा दे रहे है। उन्होंने कहा कि वीरभूमि एज्युकेशन सोसायटी और नीलिया महादेव गौशाला के सचिव पद को भी त्याग रहे है ताकि राजनीति में खुलकर काम कर सके। उन्होंने कहा कि विरोधियों को समय आने पर जवाब दिया जायेगा।

50 लाख के लोन के मामले में पुरोहित को हटाया
भूमि विकास बैंक की बेगूं शाखा में वीर भूमि एजूकेशन सोसायटी के नाम से 10 वर्ष के लिए 50 लाख का ऋण स्वीकृत कराया गया था। जिसमें बतौर प्रार्थी कमलेश पुरोहित अध्यक्ष, बसन्त कुमार आमेटा सचिव और पुष्पा पालीवाल कोषाध्यक्ष थे और इस सोसायटी के माध्यम से बेगूं तहसील के मरावदा में महाविद्यालय भवन का निर्माण किया जाना था। इस ऋण के मामले में सचिव की रिपोर्ट प्राप्त हुई जिसमें त्रैमासिक किश्त हर बार अवधि पार जमा कराई गई और 2 लाख 48 हजार रूपये समय निकल जाने के बावजूद बकाया रहे। सहकारिता विभाग द्वारा पुरोहित को हटाये जाने के आदेश में लिखा गया है कि इस संबंध में कमलेश पुरोहित से जवाब मांगा लेकिन पुरोहित ने कोई ठोस रिकॉर्ड आधारित जवाब प्रस्तुत नहीं किया। अपने आदेश में विभाग ने लिखा कि जो स्वयं बैंक का अध्यक्ष है और अवधिपार ऋण उन पर बकाया रहता है तो दूसरे सदस्यों पर गलत उदाहरण प्रस्तुत होता है और बैंक की नियमित वसूली को प्रभावित करता है। गत 9 मार्च को हुई सुनवाई में कमलेश पुरोहित उपस्थित हुए थे और उसके बाद विभाग ने आदेश जारी कर दिया था।
गौरतलब है कि कार्यकाल पूरा हो जाने पर दो माह पूर्व भी संचालक मंडल को भंग करते हुए कमलेश पुरोहित को हटाकर प्रशासक नियुक्त किया था लेकिन न्यायालय के आदेश से पुरोहित पुन: इस पद पर आसीन हो गए थे।

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