चित्तौड़गढ़, (सलमान)। आगामी फसलों की तैयारियों में किसान अपने खेतों की निराई गुड़ाई में लगे हुए हैं। चित्तौड़गढ़ जिले में इस बार मक्का फसल की बम्पर बुआई हुई हैं। वही सोयाबीन की बुआई का रकबा धीरे-धीरे घटता जा रहा हैं। इस मानसून में जिले में 90 फीसदी से अधिक बुआई हो चुकी हैं। खेतों में देसी मक्का व हाईब्रीड बीज 20 से लेकर 400 रुपए किलो तक का बीज खरीदकर किसानों ने अपने खेतों में बुवाई की हैं। मक्का बुआई के बाद जमीन से निकले इन पौधों पर अब खतरा मंडराने लगा हैं। तितलियों का लार्वा फाल आर्मी वर्म मक्का के पौधों को चट करने लगा हैं। अब हालात यह हो रहे हैं कि किसानों को महंगे भाव की दवाइयों का छिड़काव मक्का की फसल पर करना पड़ रहा हैं। चित्तौड़गढ़ जिले में इस बार एक लाख 46 हज़ार हेक्टेयर के करीब मक्का फसल की बुआई की गई हैं। खेतों में किसान निराई गुड़ाई में जुटे हुए हैं। जमीन से निकले मक्का के पौधे बड़े होने से पहले ही खराब होने लगे हैं, कारण तितलियों के लार्वा यानी फाल आर्मी वर्म जिसे स्थानीय भाषा मे लट बोला जाता हैं।
लट इन मक्का के पौधों को चट करने में लगा हुआ हैं। किसानों ने महँगे भाव के बीज खरीद कर बुआई की और अब इस लट के नुकसान से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही हैं। भारत में पहली बार फाल आर्मी वर्म को 2018 में कर्नाटक में मक्का की फसल में देखा गया। इसके बाद देश के कई राज्यों में तेजी से फैलने लगा। मक्का की फसल में फाल आर्मी वर्म एक बहुत ही विनाशकारी कीट है जो फसल पर एक समूह के रूप में आक्रमण करता है तथा फसल में एक गंभीर नुकसान करने की क्षमता रखता है, यह कीट बहुभक्षी होता है जो कि मक्का के अतिरिक्त गन्ना, ज्वार, बाजरा, या अन्य धान्य फसलों को नुकसान पहुंचाता है।
मक्का की फसल के शुरुआती दौर से ही फाल आर्मी वर्म पौधे पर अपना डेरा जमा लेती और अलग-अलग अवस्थाओं में ये मक्का के भुट्टों तक को नुकसान पहुंचाती हैं। जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ता हैं। यह कीट मक्के के छोटे-छोटे पौधों को जड़ से ही काटकर खेतों में गिरा देते हैं एवं पौधे कि प्रारंभिक अवस्था में फॉल आर्मी वर्मा यानी इल्लियों के समूह में पत्तियां खुरचकर हरा भाग खाती हैं जिसके फलस्वरूप सफेद धब्बे दिखाई देने लगते हैं, इल्लियों पौधे के अंदर छुपी रहती है, बड़ी इल्लियाँ पत्तियों को खाकर उसमें छोटे से लेकर बड़े गोल छेद कर नुकसान पहुंचाती है। ऐसे में किसान मक्का की फसल के साथ-साथ मूंगफली, ग्वार समेत कम नुकसान और अधिक मुनाफा वाली फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। फॉल आर्मी वर्म से प्रभावित मक्का के पौधे को पशुओं को भी नही खिलाना चाहिए। इससे पशु को बीमार समेत उनकी मौत भी हो सकती हैं। कृषि विस्तार केंद्र के निदेशक दिनेश जागा ने बताया कि चित्तौड़गढ़ में फॉल आर्मी वर्म 2019 में मक्का की फसल में देखने को सामने आया। उदयपुर से कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने चित्तौड़गढ़ आकर मक्का की फसल में लगे कीट की पहचान फॉल आर्मी वर्म के रूप में की।
2019 के बाद चित्तौड़गढ़ जिले में तेजी से फॉल आर्मी वर्म ने अपने पांव पसारे और मक्का की फसलों को बर्बाद करना शुरू किया। कृषि अधिकारियों ने फाल आर्मी वर्म यानी इल्लियों से बचाव के लिए उपचार व दवाइयों के छिड़काव की जानकारी भी किसानों को समय-समय पर देते रहते हैं। फाल आर्मी वर्म के पतंगे अपने भोजन की तलाश में 100 किलोमीटर से भी अधिक की एक रात में उड़ान भर सकते हैं। एक मादा पंतगा अपने जीवनकाल में एक हज़ार से अधिक अंडे देती है। अंडों का इन्क्यूबेशन 4 से 6 दिन का होता है। इनकी लार्वा अवस्था ही मक्के के फसल को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देती है। फसलों को चट करने के लिए फाल आर्मी वर्म रात में ही सक्रिय होते हैं।इनकी जीवन चक्र की कुल अवधि 31 से 35 दिन की होती है।
संयुक्त निदेशक कृषि अधिकारी दिनेश जागा ने बताया कि जिले में तीन लाख 25 हज़ार 810 हेक्टेयर में विभिन्न फसलों की बुआई टारगेट रखा गया जिसमें से 90 फीसदी बुआई पूरी हो गई। इस लक्ष्य में एक लाख 46 हज़ार हेक्टेयर का मक्का बुआई का हैं जबकि एक लाख से अधिक हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई की गई हैं। दलहनी फसलों में मूंग 275 हेक्टेयर, उड़द 58 सौ हेक्टेयर की बुआई की गई हैं। तिल की फसल 310 हेक्टेयर में की गई हैं। मूंगफली की फसल के रकबा में बढ़ोतरी करते हुए 33 हज़ार 250 हेक्टेयर में बुवाई की गई। वही ज्वार के रकबे में कटौती करते हुए 18 हज़ार हेक्टेयर में बुवाई की गई।
●कीट का प्रकोप होने पर इन दवाइयों का करें प्रयोग
कृषि अधिकारी शंकर लाल जाट ने मक्का फसल में फाल आर्मी वर्म कीट के नियंत्रण हेतु अजाडीरेक्टिन 1500 पी०पी०एम० 2.5 ली प्रति हेक्टर प्रकाश पास/फेरोमोन ट्रेप 5 प्रति एकड अथवा इमाबेक्टिन बेन्जोएट 5 एस०जी० 0.4 ग्गाम प्रति लीटर अथवा स्पाइनोसेड 0.3 मिली लीटर पानी या थायोमेथोक्साम 12.6 प्रतिशत, लेम्डा सायहेलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत की 0.5 मिली लीटर या क्लोरेन्ट्रोनिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत की 0.4 मिली लीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करने की सलाह कृषकों को दी हैं।
सोयाबीन में सेमीलूपर कीट के नियंत्रण हेतु क्यूनॉलफॉस 25 ई.सी. 1 लीटर अथवा एसीफेट 75 एसपी 1 ग्राम प्रति लीटर पानी के साथ 20-20 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करने की सलाह दी हैं।
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