चम्बल पानी परियोजना : 1170 एमसीएफटी पानी रिजर्व कर लाया जाएगा बेगूं, चित्तौड़गढ़ और निम्बाहेड़ा

चित्तौड़गढ़, (सलमान)। अध्यक्ष राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र की महती आवश्यकता को देखते हुए लंबे समय से चंबल पानी परियोजना का लाभ विधानसभा क्षेत्र के वाशिंदों को मिले इसके लिए प्रयासरत रहे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व पीएचडी मंत्री महेश जोशी से मिलकर योजना कक प्रशासनिक व वितीय स्वीकृति जारी करने हेतु किए। 17 जून को एडिशनल सेकेट्री एंड चीफ इंजीनियर जल संसाधन जयपुर द्वारा जारी आदेश में जल अधिग्रहण और आपूर्ति की योजना को जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृति दी गई है। ऐसे में प्रभावित गांवों को भूजल के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि सतही जल उपलब्ध होगा। मेवाड़ में प्यासे गांवों के लिए अगले 30 साल का बंदोबस्त मानते हुए प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है। चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों को प्रोजेक्ट में शामिल किया गया है।
चम्बल प्रोजेक्ट कोटा बैराज चम्बल कमान क्षेत्र विकास की ओर से क्रियान्वित की जा रही परियोजना के पूरा होने पर 130 एमक्यूएम पानी बचेगा। जिससे पेयजल परियोजना के लिए 122.723 एमसीयूएम (मिलीयन क्यूबिक मीटर) जल रखा गया है। यहां का 1170 एमसीएफटी पानी बेगूं, चित्तौडग़ढ़ और निम्बाहेड़ा विधानसभा क्षेत्र के गांवों में रिजर्व कर लाया जाएगा।
स्वीकृति हुई परियोजनाएं उदयपुर संभाग के लिए काफी महत्वपूर्ण है। अभी तक सैद्धान्तिक सहमति हो गयी थी।जिसे अब प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मिली है। तकनीकी स्वीकृति के साथ ही आगामी तीन-चार महीने में काम शुरू हो जाएगा।
अधिशासी अभियंता(परियोजना), पीएचइडी द्वारा योजनाओं को मूर्तरूप मिलने पर मिशन के उद्देश्य के अनुसार गुणवत्तायुक्त पानी मिलने लगेगा। पेयजल समस्या का समाधान होगा, वहीं भूजल स्तर में भी बढ़ोतरी होगी। ये परियोजनाएं संभाग के प्यासे गांवों के लिए मिल का पत्थर साबित होगी।
स्वीकृति हुई परियोजनाएं पूरे उदयपुर संभाग के लिए काफी महत्वपूर्ण है। अभी तक औपचारिक सहमति चल रही थी, जिसे अब प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मिली है। तकनीकी स्वीकृति के साथ ही आगामी तीन-चार महीने में काम शुरू हो जाएगा। पीएचइडी योजनाओं को मूर्तरूप मिलने पर मिशन के उद्देश्य के अनुसार गुणवत्तायुक्त पानी मिलने लगेगा। पेयजल समस्या का समाधान होगा, वहीं भूजल स्तर में भी बढ़ोतरी होगी। ये परियोजनाएं संभाग के चित्तौड़गढ़ जिले में प्यासे गांवों के लिए मिल का पत्थर साबित होगी।

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