कालिदास जयंती पर वैदिक विश्वविद्यालय में होगी शोध संगोष्ठी



निंबाहेड़ा। साहित्य परिषद् श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय द्वारा आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा 30 जून गुरूवार को महाकवि कालिदास का कृतित्व एवं मूल्यबोध विषय को केंद्रित कर एक दिवसीय शोध संगोष्ठी का आयोजन होगा। संस्कृत साहित्य में अभी तक हुए महान कवियों में कालिदास जी अद्वितीय थे। उनके साहित्यिक ज्ञान का कोई वर्णन नहीं किया जा सकता। कालिदास द्वारा प्रदत्त उपमाएं बेमिसाल हैं और उनका ऋतु वर्णन अद्वितीय हैं। साहित्य परिषद सदस्य एवं हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ अशोक शर्मा के अनुसार मानो कि संगीत कालिदास के साहित्य के मुख्य अंग है। इसके साथ ही उन्होनें अपने साहित्य में रस का इस तरह सृजन किया है जिसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है। विश्वविद्यालय प्रवक्ता डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी ने बताया कि श्रृंगार रस को कालिदास ने अपनी कृतियों में इस तरह डाला है मानो कि पाठकों में भाव अपने आप जागृत हो जाएं। साहित्य परिषद प्रभारी एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ स्मिता शर्मा ने कहा कि विलक्षण प्रतिभा से निखर महान कवि कालिदास के साहित्य की खास बात ये है कि उन्होनें साहित्यिक सौन्दर्य के साथ-साथ आदर्शवादी परंपरा और नैतिक मूल्यों का समुचित ध्यान रखा है। कालिदास ने अपने जन्म के विषय में आषाढ प्रथम दिवस का उल्लेख किया है और यही उनकी जन्मतिथि मानी जाती है। इसीलिए आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा के दिन कालिदास के कृतियों में निहित मूल्य बोध को केंद्रित कर समाजोपयोगी और समाज को सही रास्ता दिखाने के ध्येय से किया जाएगा। सायं 4 बजे से इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक कर्मचारियों के साथ सामाजिक लोगों और विद्वानों को भी सुना जा सकेगा।

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