ठाकुरजी के दिव्य दर्शन के साथ ही सप्तदश कल्याण महाकुंभ हर्षोल्लास पूर्वक संपन्न

निंबाहेड़ा। मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री शेषावतार कल्लाजी वेदपीठ पर विराजित ठाकुरश्री कल्लाजी सहित पंच देवों के आषाढ़ कृष्णा अष्टमी को अनुपम, अद्भुत एवं चमत्कारिक दिव्य दर्शन के साथ सप्तदश कल्याण महाकुंभ हर्षोल्लास पूर्वक संपन्न हो गया।108 प्रकार के फूलों से सजी झांकी के बीच स्वर्ण आभा में ठाकुरश्री एवं रजत पावासन पर विराजित कल्याण नगरी के राजाधिराज के दिव्य दर्शन के लिए मेवाड़, मारवाड़, मालवा, गुजरात, वागड़, हाड़ौती सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालु अपने आराध्य की एक झलक पाने को आतुर दिखाई दिए। मंदिर पर आचार्य वीरेन्द्रकृष्ण दौर्गादत्ती, गोपाल सत्संग आश्रम बड़ीसादड़ी से पीठाधीश्वर स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज एवं ठाकुरजी के कई संतों-महंतों, गादी पतियों के सानिध्य में मंदिर पर आचार्यों एवं बटुकों द्वारा किए गए वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ध्वज चढ़ाया गया। इस दौरान सुमंतु कथा मंडप सहित समूचा द्युलोक आपार जनमेदनी से खचाखच भरा हुआ था। घण्टाघड़ियाल, शंख ध्वनि के साथ ही ठाकुरश्री कल्लाजी के गगनभेदी जयकारों के बीच ठीक 12.32 बजे जब मुख्य मंदिर के पट खुले तो हर कोई श्रद्धालु अपने आराध्य की एक झलक पाने को आतुर था, वहीं श्रंगार आरती में मेवाड़ राज घराने के महाराज कुमार लक्ष्यराजसिंह, बोहेड़ा राव हनुमंतसिंह, भूपेन्द्रसिंह बड़ौली, भानुप्रतापसिंह, लक्ष्मणसिंह बड़ौली के साथ ही आचार्य वीरेन्द्र कृष्ण दौर्गादत्ती, स्वामी सुदर्शनाचार्य जी ने कल्याण नगरी के राजाधिराज के अनुपम दर्शन कर न केवल स्वयं को धन्य किया। वरण इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि मेवाड़ की इस पावन धरा में ठाकुर श्री कल्लाजी के विराजमान होने से यहां लौकिक, वैदिक एवं धर्म की त्रिधारा प्रवाहित हो रही है। श्रंगार महाआरती के साथ मनोहारी झांकी के बीच ठाकुरजी का अनुपम श्रंगार इतना लुभावना था कि हर कोई अपने आराध्य की छवि को नैत्रों में बसा कर स्वयं को धन्य कर रहा था। इस मौके पर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्री कल्लाजी के सेवकों, गादीपतियों, संतों-महंतों का वेदपीठ की ओर से सम्मान करते हुए आत्मिक अभिनन्दन किया गया।


पूर्णाहुति के साथ पंच दिवसीय श्री मार्तण्ड महायज्ञ संपन्न

कल्याण महाकुंभ के अन्तर्गत द्युलोक स्थित श्री मार्तण्ड यज्ञशाला में आयोजित पंच दिवसीय श्री मार्तण्ड महायज्ञ आषाढ़ कृष्णा अष्टमी मंगलवार को पूर्णाहुति के साथ संपन्न हो गया। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में यजमान, वेदपीठ के न्यासी, पदाधिकारी, आचार्य, बटुक, वीर वीरांनाएं, शक्ति ग्रप की बालिकाओं के अलावा कई कल्याण भक्त मौजूद थे। भगवान सूर्यनारायण को समर्पित इस महायज्ञ की सफलता के साथ ही सभी ने सर्वत्र सुख शांति, अच्छी वर्षा एवं वैदिक विश्वविद्यालय को विश्व के वैदिक मानचित्र पर विशिष्ट पहचान बनाने की कामना की।


मातृ-पितृ पूजन ने शिवलोक की कराई अनुभूति

वेदपीठ की परम्परानुसार प्रत्येक महाकुंभ के यज्ञ में विराजित होने वाले यजमानों एवं कल्याण भक्तों को मातृ-पितृ पूजन की सीख देने तथा भावी पीढ़ी को पाश्चात्य संस्कृति की बजाय भारतीय संस्कृति के अनुरूप माता-पिता को पूरा सम्मान देने के उद्देश्य से मंगलवार को सुमंतु कथा मंडप में सामूहिक मातृ-पितृ पूजन का आयोजन किया गया। जिसका विहंगम दृश्य शिवलोक से कम नहीं था। आचार्यों के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पुत्रों एवं पौत्रों द्वारा अपने माता-पिता का चरण प्रक्षालन, पुष्प अक्षत अर्पण कर दीप ज्योति से शिव पार्वती स्वरूप में आरती करने के बाद जब माता-पिता की परिक्रमा की गई तो इस दृश्य ने बरबस ही प्रथमेश पूज्य भगवान श्री गणेश द्वारा शिव पार्वती की परिक्रमा कर समूचे ब्रह्माण्ड की परिक्रमा का दृश्य कथा मण्डप में परिलक्षित था। इस बीच पायलसिंह ने मॉ की महिमा पर अपने ही अंदाज में एक गीत प्रस्तुत किया। वहीं आचार्य दौर्गादत्ती ने मातृ-पितृ पूजन को भारतीय संस्कृति का परिचायक बताते हुए कहा कि महाकुंभ के बहाने यह आयोजन भावी पीढ़ी को संस्कारवान बनाने का सशक्त माध्यम साबित होगा।

द्वादश वेद विद्यार्थियों को प्रदान की उपाधि

राजस्थान संस्कृत अकादमी की ओर से स्थानीय वेद विद्यालय में अध्ययन कर चुके द्वादश विद्वान बटुकों को व्यासपीठ पर विराजित आचार्य वीरेन्द्रकृष्ण दौर्गादत्ती ने दीक्षान्त समारोह के अनुरूप उपाधि प्रदान कर जीवन में श्रेष्टतम वेदपाठी एवं विद्वान बनने का आशीर्वाद दिया।

भगवत प्राप्ति के लिए इष्ट का आश्रय ले- आचार्य दौर्गादत्ती

पुराण मर्मज्ञ आचार्य वीरेन्द्रकृष्ण दौर्गादत्ती ने कहा कि भगवत प्राप्ति के लिए प्रत्येक व्यक्ति को इष्ट का आश्रय लेना चाहिए। वहीं कल्याण नगरी वासियों के लिए श्री कल्लाजी का आश्रय मिल जाना सौभाग्य की बात है। आचार्य दौर्गादत्ती मंगलवार को सुमंतु कथा मंडप के व्यासपीठ से भविष्य पुराण के विश्राम से पूर्व हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 7 बाते ऐसी है, जो हमेशा बढ़ती जाती है। जिनमें आलस्य, भोग, निद्रा, भूख, क्रोध में हमेशा वृद्धि होती है। जिस पर नियंत्रण पाना नितांत आवश्यक है। उन्होंने दृष्टांत देते हुए कहा कि हमारा मनरूपी बकरा हमेशा चरने को उद्यत रहता है। जिस पर प्रभावी नियंत्रण के बाद ही भगवत प्राप्ति संभव है। उन्होंने एक संत का उदाहरण देते हुए कहा कि एक राजा की घोषणानुरूप उसके बकरे का पूरा पेट भरना था, तभी ऐसे व्यक्ति को आधा राज्य मिल सकता था। यह सुनकर संत ने बकरे को अपने साथ ले जाकर घास तो दिखाई लेकिन मनरूपी बकरे को नियंत्रित करने के लिए पिटाई भी करते रहे। जिसका नतीजा यह रहा कि राजा के परीक्षण में भी वह बकरा घास त्याग चुका था। इसी प्रकार हमें भी भटकते मन को नियंत्रित कर प्रभु की शरण लेनी चाहिए। उन्होंने ऋषि सुमंतु के संदर्भ में कहा कि प्राय मानव अपनी भूलोंको छिपाकर दूसरों पर आरोप लगाता है यदि इस प्रवृति को त्याग दे तो प्रत्येक व्यक्ति आरोप-प्रत्यारोप से मुक्त हो सकता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि भविष्य पुराण से जीवन संवारने का संकल्प ले। उन्होंने कहा कि कलयुग में मानसिक पूजा से ही प्रभु की कृपा प्राप्ति सहज संभव है।

कल्याण नगरी में महाकुंभ का आयोजन सौभाग्य का प्रतीक– स्वामी सुदर्शनाचार्य

बड़ीसादड़ी के गोपाल सत्संग आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी सुदर्शनाचार्य ने कहा कि देश में 12 वर्षों में कुंभ के आयोजन होते है, लेकिन धन्य है मेवाड़ की ये पावन धरा कल्याण नगरी जहां ठाकुरश्री कल्लाजी की कृपा से प्रतिवर्ष कल्याण महाकुंभ का आयोजन होता है। जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों को भारत की सनातन संस्कृति और धर्म से रूबरू होने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि जीवन में अष्टादश पुराणों का श्रवण दर्शन नहीं किया तो मानव जीवन व्यर्थ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जानवर हमेशा प्रकृति के सिद्धांत के अनुरूप चलते है, लेकिन मनुष्य ही हमेशा प्रकृति के नियमों को तोड़ने में विश्वास करता है। ऐसे स्थिति में प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वे ईश्वर के प्रति श्रद्धा रखते हुए अपना जीवन संवारे।

संस्कृति को जीवन्त रखकर भारत को फिर से विश्वगुरू बनाना होगा – महाराज कुमार लक्ष्यराज सिंह

मेवाड़ राज घराने के महाराज कुमार लक्ष्यराजसिंह ने कहा कि भारत ही दुनिया में एक ऐसा देश है जहां गुरू और माता पिता को पूरा सम्मान दिया जाता है। वहीं मेवाड़ की परम्परानुरूप कल्याण नगरी में ठाकुर श्री कल्लाजी की प्रेरणा व अनुकम्पा से सनातन भारतीय संस्कृति को जीवन्त रखने का जो प्रयास किया जा रहा है, उससे कहा जा सकता है भारत एक बार फिर विश्व गुरू बनने की ओर अग्रसर है। महाराज कुमार मंगलवार को कल्याण महाकुंभ क अष्टम दिवस ठाकुरजी के अनुपम दिव्य दर्शन कर सुमंतु कथा मंडप में हजारों लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने महाकुंभ के दौरान बड़ी संख्या में वीर-वीरांगनाओं, शक्ति ग्रुप बालिकाओं, वेदपीठ के आचार्यों एवं बटुकों के साथ ही कल्याण भक्तों द्वारा अपने आराध्य के प्रति समर्पित भाव से की जा रही सेवा को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि यहां से भावी पीढ़ी संस्कारवान बनेंगी। वहीं हमारे पुरखो द्वारा किए गए कार्यों को यथावत सम्पादित करना सौभाग्य की बात है। इस मौके पर पल्लवन संस्था की ओर से महाराज कुमार, आचार्य दौर्गादत्ती एवं स्वामी सुदर्शनाचार्य जी को महाराणा प्रताप की छवि भेंटकर उनका स्वागत एवं अभिनन्दन किया। प्रारंभ में महाराज कुमार ने श्री कल्लाजी के चरणों में नमन करते हुए पंडित नरेन्द्र मिश्र की कविता मेवाड़ ने कभी झुकना नहीं सीखा से अपनी बात प्रारंभ करते हुए समूचे वातावरण को मेवाड़ी जोश से भर दिया।

यज्ञ परिक्रमा एवं दर्शन के लिए लगा तांता

कल्याण महाकुंभ के अष्टम दिवस को पंच दिवसीय श्री मार्तण्ड महायज्ञ के तहत 51 कुण्डों की विशाल यज्ञशाला के परिक्रमा करने तथा ठाकुरश्री कल्लाजी के चमत्कारिक स्वरूप के दर्शनों के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। हर कोई यज्ञ की पवित्र भस्मी मस्तक पर चढ़ाकर स्वयं को धन्य कर रहा था, वहीं कई श्रद्धालु अनवरत यज्ञ परिक्रमा करते नजर आए। दूसरी ओर दूर दराज के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं, कल्याण भक्तों ने भी अपने आराध्य के मन भावन दर्शन करने में गहरी रूचि दिखाई। जिसके फलस्वरूप श्रंगार दर्शन से लेकर शयन आरती तक भक्तों का तांता लगा रहा।

कल्याण महाकुंभ की भव्यता के साथ सफलता पर जताया आभार

सप्तदश कल्याण महाकुंभ की भव्यता के साथ एक नया इतिहास रचने में योगदान करने वाले समस्त कल्याण नगरी वासियों, धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों, जिला एवं पुलिस प्रशासन, चिकित्सा एवं आयुर्वेद विभाग, पत्रकार जगत, वीर बालकों, वीरांगनाओं, शक्ति ग्रुप की बालिकाओं, कृष्णा शक्ति दल की माता-बहनों सहित दृश्य एवं अदृश्य रूप से महाकुंभ को द्विगुणित करने में योगदान देने वालों के प्रति वेदपीठ की ओर से आभार व्यक्त किया गया है। वेदपीठ के पदाधिकारियों के अनुसार इतने भव्य एवं विशाल आयोजन में प्रत्येक व्यक्ति की अनुकरणीय भागीदारी नहीं होती तो महाकुंभ की यह ऐतिहासिक सफलता संभव नहीं थी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वेदपीठ एवं वैदिक विश्वविद्यालय के प्रत्येक आयोजन में सभी की यहीं भावना वेदपीठ का संबल होगी।

महेन्द्रसिंह राठौड़ की भजन संध्या में कल्लामय हुआ वातावरण

प्रसिद्ध लोक भजन गायक पाली के महेन्द्रसिंह राठौड़ एवं साथियों दिनेश, राणा, समीर व लाड़ला, द्वारा सोमवार रात्रि को प्रस्तुत भजनों की स्वर लहरियों के बीच उन्होंने कल्लाजी को रिझाने में कोई कोर कसर नहीं रखी, जिसके फलस्वरूप अंतिम दिवस की भजन संध्या एक शाम कल्लाजी के नाम सार्थक होते हुए समूचे वातावरण को कल्लामय बना दिया। गणेश वंदना से प्रारंभ की गई भजन संध्या में गायक महेन्द्रसिंह राठौड़ ने चालो चालो जी कल्लाजी के धाम …सहित कल्लाजी के कई भजन प्रस्तुत कर दर्शकों को ठाकुरजी के जयकारे लगाने के लिए विवश कर दिया। वहीं उन्होंने चौसठ योगिनी मॉ भवानी आंगणिये रम जाए, श्री राम स्तुति, पूनम की है रात पाबूजी पधारो, वारी जाऊ बलिहारी जाऊ गुरूजी तथा श्रीराम मंदिर के परिपेक्ष में भगवा रंग चढने लगा है, मंदिर अब बनने लगा है…जैसे भजनों की प्रस्तुति के दौरान सैकड़ों श्रोताओं ने भी तालिओं के साथ संगत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मध्यरात्रि के बाद तक चली भजन संध्या में बड़ी संख्या में भक्तगण भक्तिरस सरोवर में गौते लगाते नजर आए। प्रारंभ में भजन गायकों का वेदपीठ की ओर से तुलसी माला एवं उपहरणे से स्वागत किया गया। वहीं कलाकारों ने भी अपने आराध्य श्री कल्लाजी को नमन कर भक्ति संध्या को परवान चढ़ाने का आशीर्वाद लिया।


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