चित्तौड़गढ़। देहली गेट, छीपा मोहल्ला अशरफी चौक स्थित हजरत सैय्यद सरदार अहमद अकेडमी मे 17वॉ जश्ने आमदे रसूल का 10 रोजा जलसा बड़ी शानो शौकत के साथ मनाया गया। जलसे मेम नवासाए मख्दूमे मिल्लत जानशीने मुहाफ़िज़े मिल्लत मौलाना मोहम्मद उमैर अशरफी ने सीरतुन्नबी पर बड़ी शानदार और जामेअ तकरीर की। उन्होंने बताया कि पैगम्बरे इस्लाम के आने से पहले अरब के लोग लड़कियों को ज़िंदा दफन कर देते और विधवा औरतों को मनहूस समझते थे जब पैगम्बरे इस्लाम ने नबुव्वत का ऐलान फरमाया और अरब के ग़लत रिति रिवाज को ख़त्म किया और फरमाया कि बेटियाँ अल्लाह की रहमत होती है और औरत अल्लाह की नेअमत होती है। जिस घर में औरत ना हो वो घर वीरान लगता है। इस तरह पैगम्बरे ने लोगों को इस्लाम की खूबी और सच्चाई बताई तो लोग अरब के अलावा दूर-दूर मुल्कों से इस्लाम में शरीक होने लगे। मौलाना जुबेर साहब अशरफी ने तकरीर की और पैगम्बरे इस्लाम की तालीमात को आम करने पर ज़ोर दिया। अगर सही ज़िन्दगी गुज़ारना चाहते हो तो पैगम्बरे इस्लाम की ज़िन्दगी पर अमल करो और ज़िन्दगी के हर मैदान में चाहे वो घरैलू हो, समाजी हो या कारोबारी हो। क्योंकि पैगम्बरे इस्लाम किसी एक जमाअत या एक कबीला या एक गिरोह के लिए नहीं बल्कि अल्लाह तआला ने हमारे नबी को सारे जहानों के लिए रहमत बनाकर भेजा।
जलसे की सदारत हाजी मोहम्मद यूसुफ अशरफी और शहर काज़ी अब्दुल मुस्तफा चिश्ती करीमी ने की और निज़ामत मौलाना जुनैद अशरफी ने की। मौलाना अब्दुर्रशीद बरकाती ने तकरीर की। नात शरीफ हाफिज़ सरदार अहमद, नूरुद्दीन बस्तवी और सलीम खान ने पेश की।
अशरफी यूवा जमात की तरफ से मौलाना उमैर अशरफी की दस्तार बंदी की गई। तमाम औलमा व मशाइख़ की दस्तार बंदी की गई। इस मौक़े पर हाफ़िज़ जावेद, गुलाम नबी चाचा, शरीफ छीपा, यासीन अशरफी, शाहिद अशरफी, सोनू अशरफी, अशरफ़ भाटी, ओवेस छीपा, बिलाल खान, फ़िरोज़ खान, यूसुफ छिपा, अब्दुस्समीअ मंसूरी व अशरफी युवा जमाअत के सभी मेम्बरान सहित हज़ारों लोगों ने शिरकत की।।आखरी में मौलाना उमैर अशरफी ने तारीखी दुआ फरमाई और लंगर तकसीम किया गया।
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