संयोजक पूर्व सरपंच बानसेन रमेश स्वर्णकार ने बताया कि कलश यात्रा वाघन नदी के समीप स्थित खाकल देव मंदिर से पोटला खुर्द होती हुई कथा स्थल तक बड़ी धूम-धाम से नाचते गाते हुए पहुंची।
शिव महापुराण के प्रथम दिवस मेवाड़ बड़ीसादड़ पुरुषोत्तमाचार्य आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी सुदर्शनाचार्य महाराज के मुखारविंद से शिव महा पुराण कथा का महात्म्य बताते हुए चार वर्णाश्रम की सुंदर व्याख्या एवं प्राचीन सनातन धर्म व प्राचीन भारत की संस्कृति का वर्णन किया।
ठाकुरजी के भजनों पर सभी ने भार विभोर होकर नृत्य किया। दुर्गा वाहिनी की प्रांत संयोजिका लता पंड्या ने भी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।
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