चित्तौड़गढ़। राजस्थान धरोहर प्राधिकरण बोर्ड के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह जाड़ावत से उनके निवास स्थान पर थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों एवं परिवार जनों ने मुलाकात की।
थैलेसीमिया पीड़ित परिवार जनों ने बताया कि हमारे शहर चितौड़गढ़ में लगभग 2 दर्जन से ज्यादा बच्चे थैलेसिमिया रोग से ग्रसित है जिनमें 15 से 20 दिन के अन्दर रक्त चढ़ाया जाता है। इस बिमारी को देखते परिजन ने राज्यमंत्री से उनके इलाज में आ रही परेशानियां दूर कर परेशानियों से हमें राहत प्रदान करने के लिए मुलाकात कर बताया की वर्तमान में अभी भी कुछ बच्चे उदयपुर-जयपुर जाकर रक्त चढ़वाते हैं। अपनी मांगों के संदर्भ में उन्होंने राज्य मंत्री से आग्रह किया कि चित्तौड़गढ़ जिला अस्पताल में थैलेसीमिया का वॉर्ड होना चाहिए मरीजों की दवाइयों की पूरी व्यवस्था हो थैलेसीमिया पीड़ित परिवार के बच्चों के लिए स्पेशलिस्ट डॉक्टर की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे बच्चों की समय-समय पर जांच हो सके। जिस पर राज्य मंत्री सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने पीएमओ एवं अस्पताल प्रशासन के संबंधित डॉक्टरो से बात कर इनकी मांगों का तुरंत निदान करने का आश्वासन दिया और कहा कि जिला अस्पताल में थैलेसीमिया का अलग वार्ड शिफ्ट कर दिया जाएगा दवाई की उचित व्यवस्था होगी।
थैलेसीमिया परिवार जनों ने बताएगी ब्लड का एक नेट टेस्ट होता है जिसमें वायरल (HIV, HEPATITIS) इंफेक्शन विण्डो पिरीयड में होने पर भी पता चल जाता है वह टेस्ट अभी यहां उपलब्ध नहीं हैं जिस पर राज्य मंत्री सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने चिकित्सा अधिकारियों से बात कर इस लेब के संदर्भ के बारे में जानकारी मांगी और परिवार जनों को आश्वस्त किया कि चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय पर मेडिकल कॉलेज खुलने से आने वाले दिनों में इस बीमारी की जांच एवं मशीनों का मार्ग भी प्रशस्त होगा।
उल्लेखनीय है कि थैलेसीमिया रोग आमतौर पर बच्चों में उनके माता-पिता से मिलने वाला आनुवांशिक ब्लड डिसऑर्डर है। इस बीमारी से ग्रसित बच्चों के खून में हीमोग्लोबिन बनना बंद हो जाता है और रोगी के शरीर में खून की कमी हो जाती है, जिसके कारण रोगी को बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। थैलेसीमिया आमतौर पर माता-पिता से बच्चों में होते हैं। दरअसल, ये जेनेटिक ब्लड डिसऑर्डर है और अगर किसी बच्चें के माता-पिता इससे पीड़ित हैं, तो ये हीमोग्लोबिन जीन के माध्यम से बच्चों को भी ग्रसित करता है।
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