देव दुर्लभ मानव तन पाने का एक ही लक्ष्य है, जीते जी भगवान की प्राप्ति- पंकज महाराज


जहाजपुर (माय सर्कल न्यूज़ @रविकांत जोशी)। जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था के मुख्यालय मथुरा से 9 जुलाई को संस्थाध्यक्ष पंकज महाराज के सानिध्य में निकली। शाकाहार सदाचार आध्यात्मिक वैचारिक जनजागरण यात्रा ने कल रात्रि में जयगुरुदेव आश्रम खजूरी में पड़ाव किया। अब इसे केन्द्र बनाकर तहसील जहजपुर के गांगीथला सहित कई गांवों में जयगुरुदेव सत्संग समारोह आयोजित हैं। 
जयगुरुदेव संगत भीलवाड़ा के जिला प्रवक्ता अनिल कुमार सोनी ने बताया कि आज गांगीथला में पहुंचने पर बैण्डबाजा, पुष्पवर्षा, कलश यात्रा के साथ ग्रामवासियों ने यात्रा का स्वागत किया। 
यहाँ आयोजित सत्संग में अपना प्रवचन करते हुये सन्त पंकज जी महाराज ने कहा सन्त महात्मा फकीर कोई कौम या धर्म मजहब चलाने नहीं आते हैं। वे समदर्शी होते हेैं, सबके होते हैं, सबकी भलाई का काम करते हैं। युग महापुरुष परम सन्त बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ऐसे ही महापुरुष थे, जिन्होंने अथक परिश्रम करके तथा अपने आध्यात्मिक शक्ति का सहारा देकर बीसों करोड़ लोगों को बदल कर भगवान की भक्ति में लगाया तथा जीवों के लोक-परलोक कल्याण के लिये ‘जयगुरुदेव’ प्रभु का नाम जगाया। अपने सत्संग में उन्होंने कहा जब मौत का समय आयेगा तो बोल तो पाओगे नहीं, अपने सभी इष्टों की याद कर लेना जब कोई सहायता न करे तो ‘जयगुरुदेव’ याद करना, मैं आप को मिलूंगा आप का सेवक हूं। आपकी आत्मा को नर्को में नहीं जानें दूंगा l
महाराज जी ने कहा देव दुर्लभ मानव तन पाने का एक ही लक्ष्य है, जीते जी भगवान की प्राप्ति करना जिसने पाया सुरत-शब्द योग (नाम योग) साधना से पाया। यह परमात्मा का बनाया हुआ चेतन ईश्वरीय मन्दिर है। कुदरती काबा है इसी में रहते हुये उस मालिक की प्राप्ति कर लें। यही मनुष्य शरीर पाने का असली उद्देश्य है। मर्मभेदी महात्मा पंकज जी महाराज ने जीते जी प्रभु प्राप्ति की साधना के लिये सुरत-शब्द योग (नाम योग) साधना के लिये नामदान दिया तथा सुमिरन, ध्यान, भजन की क्रिया समझाया।
समाज की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुये उन्होंने कहा स्कूल, कालेज, विश्वविद्यालय इसीलिये खुले हुये हैं उसमें भौतिक और सामाजिक सेवा की शिक्षा ग्रहण की जाय न कि शराबों, कबाबों और नशों के सेवन से जीवन बर्बाद किया जाय। भारत धर्म-कर्म की भूमि है यहां चरित्र उत्थान व इंसानियत की शिक्षा दी जाती रही। जीवन को सात्विक बनायें मांसाहार और शराब तथा अन्य नशों का त्याग करें। प्रभु की भक्ति कमा लें जो अन्त समय में आपके काम आये।
 इस अवसर पर जयगुरुदेव संगत राजस्थान प्रान्त के उपाध्यक्ष हरिनारायण गुर्जर  घनश्याम शर्मा, ओमप्रकाश स्वर्णकार,  उदय लाल सोनी, राम प्रसाद टांक, भैरूलाल रेंगर, रामस्वरूप रेंगर व ग्रामवासी उपस्थित रहे। अगला सत्संग कार्यक्रम रविवार 6 अगस्त को तहसील जहाजपुर के गांव रावतखेड़ा में सायं 3.30 बजे से आयोजित है। पहुंचकर आत्मिक लाभ प्राप्त करें।

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