चित्तौड़गढ़। नेशनल बी किपिंग एण्ड हनी मिशन मिनी मिशन प्रथम अन्तर्गत जिला स्तरीय सेमीनार दिनांक 11-12 सितम्बर को ‘‘वैज्ञानिक तरीके से मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन‘‘ विषय पर कान्हा रिर्सोट, पुराना औद्योगिक एरिया, बाई पास, कीरखेडा पट्रोल पम्प चित्तौडगढ, पर आयोजन किया जा रहा है जिसमें प्रथम दिवस में कृषकों के पंजीयन के उपरान्त उपनिदेशक उद्यान डॉ. शंकर लाल जाट ने सेमिनार के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए उपस्थित कृषकों, वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।
सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ के0 एन0 ओझा, सेवानिवृत प्रोफेसर एपीकल्चर, कोटा कृषि विश्वविद्यालय ने वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन एवं प्रबंधन, शहद गुणवत्ता पैरामीटर, प्रसंस्करण, परीक्षण, प्रामाणिकता और मिलावट उपस्थित कृषकों को विस्तृत जानकारी प्रदान की गई एवं इससे संबंधित कृषकों द्वारा अवगत करवाई गई समस्याओं का समाधान भी बताया गया। डॉ. प्रकाश चन्द्र खटीक, सहायक निदेशक उद्यान ने मीठी क्रांती केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान की। जोगेन्द्र सिंह राणावत, कृषि अधिकारी उद्यान ने भी विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए लाभ लेने के लिए उपस्थित कृषकों को अपील की गई। डॉ. विमल सिंह राजपूत, कृषि अधिकारी उद्यान ने भी विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की। सेमिनार में श्रीमती अंशु चौधरी, कृषि अधिकारी, श्रीमती नोविना शेखावत सहायक कृषि अधिकारी, गोपाल लाल शर्मा सहायक कृषि अधिकारी उद्यान, सहायक कृषि अधिकारी एवं कृषि पर्यवेक्षक तथा कृषकों सहित कुल 210 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
सेमिनार में उपस्थित मधुमक्खी पालक मोहन लाल खटीक द्वारा उत्पादित मधुमक्खी उत्पादों की संजीव प्रदर्शनी लगाई गई। जिसका वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा अवलोकन कर कृषकों की हौसला अफजाई करते हुए किसानों को कृषि आधारित सहायक व्यवसाय के रूप में मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित किया। अन्य कृषकां को भी सीखने का आवाहन किया गया। मधुमक्खी पालन एक महत्वपूर्ण, टीकाउ अभिन्न कृषि गतिविधि है क्यों यह पोषण, आर्थिक और पारिस्थितिक सुरक्षा और संतुलन प्रदान करता है। मंच संचालन जोगेन्द्र सिंह राणावत, कृषि अधिकारी उद्यान ने किया।
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