85 वर्षीय वृद्धा की भलाई करना पड़ा भारी, खाप पंचायत ने परिवार को दिखाया बाहर का रास्ता

चित्तौड़गढ़। खांप पंचायत का डर भी ऐसा कि अपने ही जवाई को अपनी सांस की तीसरे की बैठक से उठा कर रवाना कर दिया और तो और खाप पंचायत के दबाव के चलते सगे मामा ने अपनी सगी भांजी से उसकी सांस के पीहर में चल रहे सम्पत्ति के कानूनी विवाद के निपटारे को लेकर आश्वासन पत्र पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिए।
चित्तौड़गढ़ जिला पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी को दिए ज्ञापन में पीड़ित प्रार्थी पुठोली निवासी चंद्रप्रकाश भावसार ने खाप-पंचायत के तुगलकी फरमान जारी होने के बाद जिला पुलिस अधीक्षक से जान-माल की सुरक्षा की मांग करते हुए खाप पंचायत के फर्जी पंचों पर कार्रवाई करने की मांग करते हुए गुहार लगाई है। 

बता दें कि पुठोली निवासी चंद्रप्रकाश भावसार ने अपने पिता पृथ्वीराज भावसार के साथ गुरुवार के दिन जिला पुलिस अधीक्षक चित्तौड़गढ़ के कार्यालय में उपस्थित होकर खाप पंचायत के तथाकथित पंचों जिनमें अध्यक्ष सुरेश कुमार भावसार उमरडा, भंवरलाल मिश्रीलाल बम्बोरा अंबालाल, पन्ना भावसार इडरा, गिरीराज भावसार अरनेड, लक्षमी लाल, शंकर लाल भावसार फीला, पारस, जगदीश, पन्ना लाल भावसार पालोद, शंकर लाल करावली, दीपक, गोपाल काका, किशन काका मंगलवाड, जगदीश नंगावली, शंकर लाल नारायणपूरा, सोहन लाल, रतन, शंभूलाल जैतपुरा, लक्ष्मी लाल मेनार, कैलाश माता जी खेड़ा के अलावा अन्य पचास पंचों के विरुद्ध परिवाद जिला पुलिस अधीक्षक को सौंपते हुए बताया कि चित्तौड़गढ़ जिले के मंगलवाड थानान्तर्गत मंगलवाड चौराहा स्थित उसके ससुराल में 20 मार्च के दिन मांगीबाई का देहांत हो गया था जिनका 22 मार्च को उठावणा था और उस दिन मैं यानी कि मृतका का जमाई और मेरे पिताजी वहां बैठने के लिए जाते हैं लेकिन खाप पंचायत के फर्जी पंच उन्हें देखकर खफा हो जाते है और एक के बाद एक उठकर जाने लगते हैं और साइड में जाकर खुसुर-फुसुर करने लगते हैं और मुझ पीड़ित के सुसराल पक्ष के परिवार दबाव बनाकर उनसे उन्हीं के जमाई यानी कि मुझसे कहलवाया जाता है कि आप लोग यहां से चले जाओ नहीं तो पंचों के कारण हमारे माताजी का कार्यक्रम बिगड़ जाएगा तब लोक लिहाज को ध्यान में रखकर मैं प्रार्थी बीना कुछ कहें ही सुनकर वहां से चला जाता हूं और बाद में मेरी पत्नी पर खाप पंचायत द्वारा दबाव बनाकर कोरे कागज पर लिखवा लिया जाता है कि मेरे यानी कि पीड़ित के ननिहाल की प्रॉपर्टी में हमारा हक हिस्सा नहीं है जबकि वह मामला विगत चौदह वर्षों से न्यायालय उपखंड मजिस्ट्रेट उदयपुर में विचाराधीन है।

 पीड़ित चंद्रप्रकाश भावसार ने बातचीत करते हुए बताया कि खाप पंचायत ऐसा निर्णय इसलिए ले रही है कि भविष्य में हमारी बहिनों को भी हक हिस्सा नहीं देना पड़े लगता है कि कथित पंचों ने  कहीं ना कहीं मेरे ननिहाल पक्ष से मोटी रकम ले रखी है। पीड़ित चंद्रप्रकाश ने बताया कि बात अब हद से बाहर हो चुकी है जिससे परेशान हो कर मजबूरन आज हमें ज्ञापन देना पड़ा। प्रार्थी ने अपनी जान माल की सुरक्षा के लिए चित्तौड़़गढ़ जिला पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देते हुए सुरक्षा की गुहार भी लगाई है और भविष्य में समाजजनों एवं पंचों को पाबंद करने का अनुरोध किया है। चंद्रप्रकाश भावसार ने अपने ही ससुराल में तीसरे की बैठक से उसे बाहर करने के तुगलकी फैसले के विरुद्ध खाप पंचायत के तथाकथित पंचों पर उचित कानूनी कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने कहा कि समय रहते अपराधियों पर अंकुश नहीं कसा गया तो हमारे जैसे प्रार्थी गणों को आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ेगा। 

चंद्रप्रकाश भावसार ने कहा कि खांप पंचायतों के तुगलकी फैसले आजादी के 77 साथ होने के बाद आज भी समाज में कैंसर और दीमक की तरह समाज को खोखला कर खत्म कर रहे हैं फिर भी सरकारें लगाम नहीं लग पा रही है। इस तरह से समाज में काफी सारे व्यक्तियों के निमंत्रण बन्द है और उन्हें समाज से बहिष्कृत कर रखा है। ऐसे सामाजिक पंचों के सामाजिक रजिस्ट्रेशन को देखकर सरकार/ प्रशासन को उचित कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में आमजन भय मुक्त हो सकें। 
प्रार्थी का यह भी कहना है कि हमारी किसी भी सामाजिक पंच से निजी दुश्मनी नहीं, मात्र एक 85 वर्षीया महिला पूंजी बाई का सहयोग करना हमारे लिए एक आत्मघातक सिद्ध हुआ। हमारे मामा के लड़के अंबालाल पिता भैरूलाल के कहने से उनके मौसी के लड़के गिरिराज व अम्बा लाल और अन्य बार-बार  सामाजिक कोई भी कार्यक्रम जहां पर भी होते उनके द्वारा इस तरह से दबाव बनाया जाता है और हमें और हमारे परिवार को सामाजिक कार्यक्रमों से वंचित रखा जाता है।
पीड़ित चंद्रप्रकाश भावसार ने अपने पिता पृथ्वीराज भावसार के साथ मिलकर न्याय की गुहार करते हुए पंचों पर कार्यवाही के साथ जान माल की रक्षा की मांग की है।

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