जहाजपुर, (रविकांत जोशी)। ज्ञान और चरित्र की शुद्धि से ही मनुष्य जीवन सार्थक है। मुनिश्री आदित्य सागर कस्बे में लघु पंचकल्याणक महोत्सव के आज दूसरे दिन भगवान का जन्म, तप एवं ज्ञान कल्याणक महोत्सव मुनिश्री आदित्य सागर महाराज ससंग के सानिध्य में मनाया जा रहा है, आज प्रातः कालीन बेला में भगवान का 8 बजे जन्म हुआ। जैसी ही भगवान के जन्म की घोषणा की गई पूरा पंडाल भगवान की जय कारों से गूंजायमान हो गया, चारों ओर खुशियां छा गई। पूरा राज दरबार खुशियां मना रहा था। कुबेर इंद्र रत्नो की वर्षा कर रहे थे। आज भगवान की शांति धारा करने का सौभाग्य चंदा देवी गोधा सपरिवार जहाजपुर एवं पारस कुमार सुरेश कुमार बाकलीवाल जहाजपुर को प्राप्त हुआ। मूलनायक भगवान नेमिनाथ पर चांदी का छत्र लगाने का सौभाग्य अशोक गोधा जहाजपुर को प्राप्त हुआ। वह भगवान आदिनाथ को वेदी पर विराजमान करने का सौभाग्य मनीष, श्रवण कोठारी भीलवाड़ा वालों को प्राप्त हुआ। भगवान को प्रथम पालना झुलाने का सौभाग्य श्रीमती पारसी देवी धर्मपत्नी पवन जैन को प्राप्त हुआ। मुनिश्री को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य धर्मचंद, नवीन झांझरी पेचकी बावड़ी वालों को प्राप्त हुआ। आज भगवान को पांडू शिला पर विराजमान कर 1008 कलशो से जन्माभिषेक किया गया। वह दिन में तप एवं ज्ञान कल्याण महोत्सव के दौरान भगवान का समवशरण, आहारचर्या, धर्म सभा राजदरबार लगाया गया। लघु पंच कल्याणक महोत्सव प्रतिष्ठाचार्य पीयूष भैया के सानिध्य में मनाया जा रहा है। समवशरण में आचार्य विशुद्ध सागर के परम प्रभावक श्रुव संवेगी शिष्य 108 आदित्य सागर महाराज, 108 अप्रमित सागर महाराज एवं 108 सहज सागर महाराज एवं क्षुल्लक श्रेयस सागर महाराज विराजमान थे। अलग-अलग कोठो में श्रावक श्राविकाएं भी विराजमान हैं। धर्म सभा को धर्म देशना देते हुए मुनिश्री ने बताया कि ज्ञान और चरित्र की शुद्धि से ही मनुष्य जीवन सार्थक है आज मनुष्य नाम और पैसे के पीछे भाग रहा है फिर भी संतुष्ट नहीं है। ज्ञान और चरित्र की वृद्धि व शुद्धि के लिए मुनिश्री ने पांच सूत्र बताए हैं जिससे अपना जीवन सफल कर सकते हैं संगति, उपयोग, अंतरंग की रुचि, निरंतर अभ्यास एवं शरणागत। मुनिश्री ने बताया कि अच्छे लोगों एवं भगवान की शरण में आओ समर्पण करो अच्छे लोगों की संगति करो जैसी संगति करोगे वैसी रंगत आएगी। जैसा खावे अन्न वैसा होवे मन, जैसा पीवे पानी वैसी बोले वाणी, संगत खराब होने से हमारा जीवन बर्बाद हो सकता है। हमारा उपयोग शुद्धोपयोग में लगना चाहिए। तत्व चिंतन करना चाहिए और मन को अच्छे कार्यों में लगाना चाहिए। हमारे अंतरंग की रुचि भी अच्छे कार्यों में होना चाहिए। वह अच्छे कार्यों का निरंतर अभ्यास में लाना चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि जिसको वित्त से राग है वह क्या वितरागी से राग करेगा।
कल भगवान का मोक्ष कल्याणक मनाया जाएगा व भगवान को बेदी में विराजमान किया जाएगा। इस कार्यक्रम में पूरे चौखला समाज देवली,अमरगढ़, भीलवाड़ा, पेच की बावड़ी, कोटा, बूंदी महुआ धामनिया पण्डेर कोटडी रोपा बांगूदार और भी कहीं जगह से भक्त लोग शामिल होकर धर्म देशना व धर्मामृत का पान कर रहे हैं। समाज के अध्यक्ष सुनील कुमार झांझरी ने बताया कि मुख्य पात्र में कैलाश चन्द पलासिय, विमल बाकलीवाल, नवीन बाकलीवाल, पारस बाकलीवाल, महेंद्र गोधा, टीनू गोधा, राजकुमार गोधा एवं गुलाब झांझरी सपरिवार भाग ले रहे हैं।
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