फर्जी डिग्री मामले में एसओजी की कार्यवाई : मेवाड़ यूनिवर्सिटी के एग्जाम कंट्रोलर और सेक्शन ऑफिसर गिरफ्तार

अजमेर। हिंदी लेक्चरर भर्ती-2022 में फर्जी डिग्री मामले में एसओजी ने चित्तौड़गढ़ के गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी के एग्जाम कंट्रोलर सुशील शर्मा और सेक्शन ऑफिसर राजेश राणावत को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों ने डीन कौशल किशोर चंद्रल के साथ मिलकर कई लोगों को फर्जी डिग्रियां बांटी थी। एसओजी ने इस मामले में अब तक दो महिला अभ्यर्थियों सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एडिशनल एसपी मुकेश 
सोनी के नेतृत्व में मामले की जांच की जा रही है। सोनी के अनुसार अभी यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ और लोगों की गिरफ्तारी संभव है। जांच में यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री बेचने वाली गैंग की पुष्टि हुई है। डीन चंदूल को पहले गिरफ्तार किया जा चुका है। पूछताछ
में चंद्रुल ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। डीन ने बताया कि उसे नहीं पता कि वह आज तक कितने छात्रों को फर्जी डिग्रियां बांट चुका है। वह पिछले 5 साल
से छात्रों को फर्जी डिग्रियां बांट रहा था। उसने चित्तौड़गढ़ ही नहीं नोएडा में भी कई फर्जी डिग्रियां बांटी हैं। एसओजी ने चंदुल के बयान के आधार पर जांच कर एग्जाम कंट्रोलर सुशील शर्मा और सेक्शन ऑफिसर राजेश राणावत को गिरफ्तार किया है। राणावत फर्जी डिग्री के एक अन्य मामले में गुजरात में गिरफ्तार हुआ था। पुलिस हिरासत में तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में उपचार के बाद डिस्चार्ज होने पर अजमेर एसओजी ने उसे गिरफ्तार किया। राणावत को कोर्ट के आदेश से जेल भेजा गया है, जबकि शर्मा को दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। टीम ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के डिप्टी कंट्रोलर आफ एग्जामिनेशन सुशील शर्मा और सेक्शन ऑफिसर राजेश सिंह को 5 जून को गिरफ्तार किया था। दोनों आरोपियों को 6 जून को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से सुशील शर्मा को 11 तारीख तक रिमांड पर लिया है। वही सेक्शन ऑफिसर को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। 
यह था मामला
आरपीएससी की हिंदी लेक्चरर भर्ती 2022 में फर्जी डिग्री लगाकर मेरिट हासिल करने वाली दो अभ्यर्थियों कमला और ब्रह्माकुमारी को आयोग की मदद से एसओजी ने गिरफ्तार किया था। दोनों ने बताया कि उन्हें एमए की फर्जी डिग्री उनके भाइयों ने लाकर दी थी। इनके बयान के आधार पर एसओजी ने सांचौर से सरकारी टीचर दलपत सिंह और डॉ. सुरेश बिश्नोई को गिरफ्तार किया था।

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