चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने गुरुवार को विधानसभा में पंचायती राज विभाग की मांग संख्या 50 एवं ग्रामीण विकास विभाग की मांग संख्या 53 पर बोलते हुए जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच, राशन डीलर एवं ई मित्र संचालकों की मांगों को प्रमुखता से उठाया। भाजपा मीडिया प्रभारी मनोज पारीक ने बताया कि सदन में बोलते हुए विधायक आक्या ने बताया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार 2018 में अपने घोषणा पत्र में यह वादा करके सत्ता में आई थी कि वह हर गांव में 1 किलोमीटर लंबी सड़क बनाएंगे, गांव में इंटरलॉकिंग टाइल्स लगवाएंगे, जहां तक मेरे विधानसभा क्षेत्र का सवाल है मेरी विधानसभा की 46 ग्राम पंचायतों में कहीं पर भी इस प्रकार की सड़क नहीं बनी है, अन्य किसी विधानसभा सदस्य के विधानसभा में बनी हो तो पता नहीं। उन्होंने पंचायती राज प्रारंभ होने से लेकर पंडित नेहरू, अटल बिहारी वाजपेयी, भैरो सिंह शेखावत को याद करते हुए बताया कि जबसे पंचायती राज लागू हुआ है , अच्छा सोच समझ कर इसको लागू किया गया था लेकिन वर्तमान में इस व्यवस्था में जो पंचायत समिति सदस्य मिलकर प्रधान बनाते हैं एवं जिला परिषद सदस्य मिलकर जिला प्रमुख बनाते हैं, इन दोनों प्रकार के सदस्यों के पास किसी प्रकार की वित्तीय शक्ति नहीं होने से इनकी सीटों पर कोई चुनाव नहीं लड़ना चाहता, उनमें उत्साह नहीं रहता है, सरकार से मांग करूंगा कि ऐसी कोई व्यवस्था करें जिससे पंचायत समिति सदस्यों व जिला परिषद सदस्यों को वित्तीय पावर मिले ताकि वे अपने क्षेत्र का विकास करा सके क्योंकि लगभग 2 ग्राम पंचायत पर एक पंचायत समिति सदस्य होता है और लगभग 10 ग्राम पंचायतों पर एक जिला परिषद सदस्य होता है, इसलिए सरकार को उनके बारे में सोचना चाहिए। इसी प्रकार सरपंचों की हड़ताल के बारे में कहा कि आए दिन सरपंच अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर रहते हैं, आए दिन पंचायतों में ताले लगते हैं, प्रधान कार्यालय पर ताले लगते हैं, सरपंच आज की तारीख में एक ताकतवर जनप्रतिनिधि है लेकिन अपनी पुरानी बजट बकाया को लेकर वे सभी परेशान हैं क्योंकि उनकी किश्ते काफी समय से बकाया है और पिछले सरपंचों का बकाया भी उनके जिम्मे आता है तो वैसे ही काफी परेशान है, इसलिए सरकार को सरपंचों की मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए उनकी बकाया किश्तें जारी करनी चाहिए जो कि 2020, 2021 की भी बकाया है। इसके अलावा उन्होंने ग्राम पंचायत स्तर पर टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि कई बार यह देखा गया है कि सरपंच चुनाव में हारा हुआ व्यक्ति भी टेंडर डाल कर टेंडर ले लेता है और वह अपनी दो लाख तीन लाख की राशि जब्त करवाकर पंचायत के कार्य रुकवा देता है। इसी प्रकार राशन डीलरों की मांगों को उठाते हुए विधायक आक्या ने सरकार से मांग की कि अभी भी जयपुर में 10,000 से ज्यादा राशन डीलर धरने पर बैठे हुए हैं, सरकार को उनकी मांगों को सहानुभूति पूर्वक सुनना चाहिए और उनका कमीशन या मानदेय या प्रतिमाह किस प्रकार से उनको एक निश्चित राशि दी जा सके ताकि वह भी आसानी से अपना कार्य कर सकें। पंचायती राज के रिक्त पदों को भरने की भी मांग करते हुए आक्या ने बताया कि सचिवो के पास वैसे ही 1 से अधिक पंचायतें हैं और काम नहीं हो पाता है तो सरकार को इन पदों को शीघ्रता से भरना चाहिए। इसी प्रकार जो पूर्व पंचायत सहायक थे उनको अब शिक्षा विभाग को दिए जाने से भी पंचायतों की व्यवस्था बिगड़ गई है अतः सरकार को 1 ग्राम पंचायत में लगभग 4 विद्यार्थी मित्र थे तो सरकार को या तो दो सहायकों को ग्राम पंचायत को सौपे या उनके लिए कोई नया व्यक्ति मानदेय पर रखें। ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था पर बोलते हुए आक्या ने मांग की कि सरकार को ग्राम पंचायत जो पेयजल सप्लाई करती है उस पर जो सिंगल फेस की मोटर लगी हुई है उनके विद्युत बिल काफी समय से बकाया चल रहे हैं, जिसकी वजह से उनके कनेक्शन काट दिए गए हैं, क्योंकि ग्राम पंचायतों के पास इस प्रकार का अलग से कोई बजट नहीं होता है और किसी ग्राम पंचायत के 10 लाख बकाया है किसी के 50 लाख और किसी के करोड़ से भी ज्यादा बकाया है और यही नहीं 10 से 15 वर्षों से भी बिजली के बिल बकाया चल रहे हैं जिसकी वजह से कनेक्शन काट दिए गए हैं, या तो सरकार उन बिलों को माफ करें या कोई अन्य व्यवस्था हो सकती है तो मंत्री जी को इस पर सहानुभूति पूर्वक विचार करना चाहिए। जिससे आने वाली गर्मियों में पेयजल की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रह सके। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्शन की समस्या पर बोलते हुए उन्होंने मांग की कि सरकार को ग्रामीण क्षेत्र के सभी सरकारी कार्यालयों ग्राम पंचायत, विद्यालय, आंगनवाड़ी भवन, किसान सेवा केंद्र सभी पर ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से इंटरनेट कनेक्शन दिए जाने चाहिए। इसी प्रकार ईमित्र संचालकों की समस्याओं को उठाते हुए विधायक आक्या ने मांग की कि सरकार को इनके संचालकों को भी न्यूनतम कोई फिक्स राशि या मानदेय देना चाहिए अंत में आक्या पूरे सदन से मांग की, कि हम सभी को मिलकर सोचना चाहिए कि हम किस प्रकार सरपंच को, पंचायत समिति सदस्यों को, जिला परिषद सदस्यों को, प्रधान को मजबूत कर सकते है जिससे कि पंचायतीराज मजबूत हो सके।
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