हत्यारे का कोई धर्म और जाति नहीं होती-कमलमुनि

डूंगला। धर्म और जाति के आधार पर किसी की मृत्यु पर खुशियां अथवा मातम मनाना शैतान के लक्षण है। उक्त विचार राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने मनासा में स्व. भंवरलाल जैन की श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति हिंदू और मुसलमान से पहले इंसान हैं तथा धर्म ग्रंथों में लिखा है किसी इंसान की हत्या करना संपूर्ण इंसानियत का कत्ल करने के समान है एवं कोई भी धर्म निर्दोष को मानसिक यातना की इजाजत नहीं देता।
मुनि कमलेश ने बताया कि हत्यारे का कोई धर्म और जाति नहीं होती वह तो धर्म और मानवता के नाम पर कलंक है। अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली की ओर से भंवरलाल जैन के हत्यारे पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की गई।
राष्ट्रसंत ने दुख के साथ कहा कि सफेदपोश और स्वार्थी तत्वों ने कितना खून निर्दोष इंसानों को बहाया है उतना तो हथियारों से भी नहीं हुआ।
 जैन संत ने सभी धर्माचार्य से आव्हान किया संप्रदाय से ऊपर उठकर मानवता की रक्षा के लिए आगे आए। मानव की हत्या धर्म और भगवान की हत्या से बढ़कर पाप है। संगरिया के अंबालाल ने समारोह की अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि के रूप में विद्यालय परिवार के प्रमुख उपस्थित थे। मंगलवार को बड़ी सादड़ी मंगलमय प्रवेश के बाद सुबह 9 बजे जैन दिवाकर सामायिक भवन में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ बड़ी सादड़ी की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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