भाजपा द्वारा मनाया गया आपातकाल काला दिवस कार्यक्रम


  चित्तौड़गढ़, (सलमान)। भाजपा प्रदेश संगठन के निर्देशानूसार चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं द्धारा आज का दिन आपातकाल के काले दिवस के रूप में मनाया गया कार्यक्रम में उपस्थित सभी भाजपा पदाधिकारियों ने काली पट्टी बांधकर आपात काल के विरोध में  काला दिवस मनाया गया।
भाजपा नगर मीडिया प्रमुख मनोज पारीक ने बताया कि विरोध प्रदर्शन में भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और धरना दिया। विरोध प्रदर्शन के मुख्य वक्ता भाजपा प्रदेश मंत्री अशोक सैनी ने कहा कि जिन वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ताओं ने आपातकाल की पीड़ा को झेला है उसका आभास हमें आज़ उनके भाषण में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। हर युवा कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि वो आपातकाल के समय के पार्टी  के वरिष्ठ लोगों से मार्गदर्शन प्राप्त कर लोकतंत्र की हत्या कर आपातकाल जैसे काले कानून लागू करने वाली कांग्रेस के बारे में  हर उस व्यक्ति को जागरूक करे जिसने आपातकाल के बाद जन्म लिया हो। 
आपातकाल में देश की लोकतांत्रिक संस्थाओ का सुनियोजित दुरूपयोग कर भारतीयों के संवैधानिक अधिकारों को छीन लिया गया था इस बात का पता बूथ स्तर तक लगना चाहिये।
जिला संगठन प्रभारी हेमंत विजयवर्गीय ने आपातकाल को काला दिवस मनाने के लिए आयोजित कार्यक्रम में आपातकाल के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि देश में आपातकाल की तीन परिस्थितियों- गृह युद्ध की स्थिति हो, आंतरिक सुरक्षा का खतरा हो, देश की सीमाएं सुरक्षित न हो 
में से एक भी परिस्थिति न होने के बाद भी सिर्फ अपनी सत्ता को बचाने के लिए कार्यपालिका और न्यायपालिका को धता बताते हुए कांग्रेस द्वारा लोकतंत्र की हत्या की गई। आज ईडी द्वारा राहुल गांधी से नियमानुसार पूछताछ करने को लोकतंत्र की हत्या करने की बात कहने वाली कांग्रेस भूल गई है कि इंडिया इज इंदिरा एंड इंदिरा इज इंडिया कहने वालों ने लोकतंत्र की हत्या की है।
 भाजपा जिलाध्यक्ष गौतम दक ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा लोकतंत्र का मखौल उड़ाया है। भारतीय लोकतंत्र में 25 जून 1975 का वह काला दिन कांग्रेस की निरंकुशता के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा। कांग्रेस की निरंकुशता के कारण एक तरफ जहां देश के विपक्षी दलों के नेताओं को जेल जाना पड़ा वहीं पूरी दुनिया में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का मजाक बना दिया गया था। विधायक चन्द्रभान सिंह आक्या ने कहा कि 25 जून 1975, भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में इस दिन को देश के सबसे दुर्भाग्यपूर्ण दिन की संज्ञा दी जाती है। 46 साल पहले आज के ही दिन देश के लोगों ने रेडियो पर एक ऐलान सुना और देश में खबर फैल गई कि सारे भारत में अब आपातकाल की घोषणा कर दी गई है। 46 साल के बाद भले ही देश के लोकतंत्र की एक गरिमामयी तस्वीर सारी दुनिया में प्रशस्त हो रही हो, लेकिन आज भी अतीत में 25 जून का दिन डेमॉक्रेसी के एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है। आपातकाल के बाद प्रशासन और पुलिस के द्वारा भारी उत्पीड़न की कहानियां सामने आई थीं। प्रेस पर भी सेंसरशिप लगा दी गई थी। हर अखबार में सेंसर अधिकारी बैठा दिया गया, उसकी अनुमति के बाद ही कोई समाचार छप सकता था। सरकार विरोधी समाचार छापने पर गिरफ्तारी हो सकती थी। यह सब तब थम सका, जब 23 जनवरी, 1977 को मार्च महीने में चुनाव की घोषणा हो गई।  
विधायक अर्जुनलाल जीनगर, डॉ आई एम सेठिया, पूर्व पालिकाध्यक्ष गोविन्द काबरा, जिला महामंत्री तेजपाल रेगर, सरपंच रणजीत सिंह भाटी ने भी विचार व्यक्त किये। संचालन नगर महामंत्री अनिल ईनाणी ने किया।
भाजपा जिला महामंत्री कमलेश पुरोहित, तेजपाल रेगर, जिला उपाध्यक्ष करनल सिंह राठौड़, रघु शर्मा, श्रवण सिंह राव, आशा पोखरना, पूर्व न्यास अध्यक्ष सुरेश झंवर, नगर अध्यक्ष सागर सोनी, वरिष्ठ भाजपा नेता आई एम सेठिया, पूर्व पालिकाध्यक्ष गोविंद काबरा, सरपंच रणजीत सिंह भाटी, सावा मंडल अध्यक्ष रतन डांगी, चन्देरिया मंडल अध्यक्ष रोहिताश जाट, भदेसर मंडल अध्यक्ष पवन आचार्य,घोसुंडा मंडल अध्यक्ष दिनेश शर्मा, जिला कोषाध्यक्ष शैलेंद्र झंवर, जिला मीडिया प्रभारी सुधीर जैन, पूर्व प्रधान प्रवीण सिंह राठौड़, नगर महामंत्री अनिल ईनाणी, विश्वनाथ टांक, पूरण राणा, नगर उपाध्यक्ष गोवर्धन जाट, अनिल भटनागर,नगर कोषाध्यक्ष लोकेश त्रिपाठी, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ जिला संयोजक एम डी शेख, सतपाल दुआ, विधि प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष प्रदीप काबरा, नगर कार्यालय प्रमुख चेतन गौड, शेखर शर्मा, प्रकाश बोर्डे,  विनीत तिवारी , पार्षद हरीश ईनानी, शांतिलाल जाट, नरेंद्र पोखरना,बालकिशन भोई,रामचंद्र गुर्जर, छोटू माली,बेगूं मीडिया प्रभारी राजू धाकड़, ओबीसी मोर्चा जिला उपाध्यक्ष राजन माली, सुरेश बांगड़,दीपक शर्मा, किशन गुर्जर, कमलेश गुर्जर,  राजेश मोची, दिलीप सेन, रेणु मिश्रा, संजू लड्ढा, कुसुम जायसवाल, भारती दाधीच,वैभव पगारिया आदि उपस्थित थे।

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