चित्तौड़गढ़। राजस्थान मध्यप्रदेश के एक लाख 60 हजार अफीम किसानों की पांच सूत्री मांगों को लेकर वर्ष 2008 से आज तक संघर्ष कर रहे संघर्षशील किसानों के प्रतिनिधियों ने भारतीय अफीम किसान संघर्ष समिति के बैनर तले चित्तौड़गढ़ जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट चौराहे पर एक दिवसीय धरना दिया। किसानों ने जिला कलेक्टर चित्तौड़गढ़ को भारत सरकार के नाम ज्ञापन प्रेषित किया साथ ही चित्तौड़गढ़ स्थित नारकोटिक्स कार्यालय में जिला अफीम अधिकारी को नारकोटिक्स कंट्रोलर नई दिल्ली, नारकोटिक्स आयुक्त ग्वालियर, नारकोटिक्स उपायुक्त कोटा के नाम ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में पांच सूत्री मांगों में अफीम नीति 2022-23 संशोधित किया जाने की मांग करते हुए कहा गया कि पूरे देश में अफीम खेती राजस्थान मध्यप्रदेश और यूपी के कुछ क्षेत्रों में ही होती है और कभी भी सरकार से अफीम किसानों सीपीएस पद्धति की मांग नहीं की फिर भी सरकार ने अफीम किसानों का शोषण करने के लिए सीपीएस पद्धति ईजाद कर उन पर थोप दी है जिससे किसानों की लागत मुल्य भी नहीं मिल पा रही है। इसलिए सभी अफीम किसानों की एकमत राय होकर मांग है की सीपीएस पद्धति के आदेश को अपास्त (निरस्त) किया जाए और नए सिरे से वर्ष 1997- 98 से अभी तक जिन भी किसानों के किसी भी कारणवश पट्टे निरस्त किए गए उन्हें पहले की तरह ही लुवाई चिराई के अधिकार सहित अफीम पट्टे दिए जाए।
संघर्षशील अफीम किसानों ने कहा कि चित्तौड़गढ़ की धरती पर 24 नवंबर 2013 को प्रधानमंत्री बनने से पहले स्वयं वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लुवाई चिराई के अफीम पट्टे बहाली के लिए आश्वस्त किया था।
धरना प्रदर्शन एवं ज्ञापन के दौरान भारतीय अफीम किसान संघर्ष समिति के संरक्षक मांगीलाल मेघवाल बिलोट, जिला सचिव भेरू लाल जटिया चिकसी, शंकर लाल मेनारिया, मांगीलाल, गोपी लाल, रतनलाल, मदन लाल जटिया, देवी लाल सेन, डूंगला तहसील अध्यक्ष प्रकाश जाट रती का खेड़ा, शंकर लाल मीणा, भेरूलाल मीणा सहित राजस्थान मध्य प्रदेश के किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे।
0 टिप्पणियाँ