चित्तौड़गढ़। पुरोहितों का साँवता गांव स्थित डालू सुथार के कुंए में रसैल वाईपर साँप गिर गया था। राप्रावि रैदास काॅलोनी के संस्था प्रधान राजू लाल तेली की सूचना पर डिण्डोली बीआरकेजीबी में कार्यरत वन्य जीव प्रेमी पीयूष कामले, मातृकुण्डिया निवासी सर्पमित्र हरलाल सिंह कच्छावा पहुँचे। तीस फीट गहरे पानी में गिरे 4 फीट लम्बे रसैल वाईपर साँप को कुंए में उतरकर सुरक्षित बाहर निकाल कर जंगल में छोड़ा गया।
वन्यजीव प्रेमी पीयूष कामले ने बताया कि रसैल वाईपर साँप भारत के 4 सबसे जहरीले साँपों की श्रेणी में से एक है जिसे स्थानीय भाषा में हम चित्ती कहते हैं। ये चुहे खा कर किसानों के फसलों की सुरक्षा करते हैं एवं पर्यावरण के हितेषी होते है इसलिये इन्हें मारना पर्यावरण को नुकसान है। रेस्क्यू ऑपरेशन में कैलाश अहीर, राधेश्याम सुस्थार, जगदीश, राजु सुस्थार, राजु अहीर, मांगीलाल, लक्ष्मण अहीर ने सहयोग किया।
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