चित्तौड़गढ़। मेवाड़ में महाराणा प्रताप के साथ जंग लडने वाले गाडिया लौहारों की 500 साल पहले की कसम तुडवाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने गाड़िया लौहार को किले पर प्रवेश करवाने को लेकर विजय मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। गाड़ियां लौहार घुमंतू समाज की ओर से आगामी 5 व 6 अप्रैल को विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
गाड़ियां लौहार घुमन्तु महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कालू राम चौहान फौजी बाबा ने माय सर्कल न्यूज़ को जानकारी देते हुए बताया कि 500 साल पहले महाराणा प्रताप के साथ जंग लड़ी गई। मुगलों से युद्ध करने के लिए गाड़िया लौहार ने 1568 में ये 5 कसमें लेकर चले गए थे। गाड़िया लौहार समाज ने कसम ली कि हे, वीर भूमि, जब तक तुम्हें आजाद न कर लेंगे, तब तक बस्ती या जंगल कहीं भी पक्का घर बनाकर नहीं रहेंगे, खाट पर नहीं सोयेंगे, चित्तौड़गढ़ किले पर नहीं चढेंगे, दीपक नहीं जलाएंगे, पानी खींचने का रस्सा नहीं रखेंगे आदि की कसमें लेकर चले गए।
मेवाड़ प्रजामंडल के नेता माणिक्यालाल वर्मा ने नेहरूजी को पत्र लिखा था और फिर देशभर में घुमक्कड जीवन जी रहे गाडिया लौहारों तक संदेश भेजकर चित्तौड़गढ़ में एकत्र किया गया। उनको मुश्किल से यह समझाया गया कि वे आजादी के जिस संकल्प के साथ कठोर जीवन यापन कर रहे, वो पूरा हो चुका है। अब आपका चित्तौड़ भी आजाद है। नेहरूजी चाहते थे कि गाड़ियां लौहार समाज का दुर्ग प्रवेश बहुत भव्य हो। इसको लेकर 6 अप्रैल 1955 को चित्तौड़गढ़ में आयोजित सभा में बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ी थी।
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पंडित जवाहर लाल नेहरू की उपस्थिति में 6 अप्रेल 1955 को गाड़ियां लौहार समाज की कसम तुड़वाकर उन्हें सम्मान पूर्वक किले पर ले जाया गया। नेहरूजी के साथ राजस्थान के सीएम मोहनलाल सुखाडिया सहित सभी प्रमुख नेता व मेवाड़ महाराणा भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि विजय मुक्ति दिवस पर 5 अप्रेल को गाड़ियां लौहार कॉलोनी अहिंसा नगर में सत्संग का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। 6 अप्रेल को सुबह 10 से 12 बजे तक एक सभा का आयोजन होगा जिसमें वक्ता अपनी बात रखेंगे। इसी दिन दोपहर 12 बजे बाद रैली का आयोजन होगा। रैली गाड़िया लौहार कॉलोनी से शुरू होगी जो रेल्वे स्टेशन, गाड़ियां लौहार छात्रावास, शहीद स्मारक, कलक्ट्रेट चौराहा से सुभाष चौक होते हुए पाडन पोल पहुँचेगी जहां लगाएं गए पट्टिका के पास हवन किया जाएगा। उसके बाद रैली किले पर कालिका माता मंदिर पहुँचेगी जहाँ झंडा चढ़ाया जाएगा। उसके बाद रैली वापस आई लाछा मन्दिर पहुुँचेगी जहाँ पूजा अर्चना के बाद रैली का समापन होगा।
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