सहकारी समिति के संचालक मंडल के निर्वाचन का मामला, पूर्व सहकार संघ अध्यक्ष समदानी ने लगाये धांधली के आरोप


चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ क्रय-विक्रय सहकारी समिति लिमिटेड के संचालक मंडल के होने वाले चुनाव को लेकर एक बार फिर धांधली के आरोप लगे है और चुनाव प्रक्रिया में मतदाता सूची को फर्जी बताया गया है। आज इसी मामले को लेकर पूर्व सहकार संघ अध्यक्ष अनन्त समदानी, क्रय विक्रय सहकारी समिति पहुंच गए और वहां पहुंच कर प्रदर्शन करते हुए कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि खुद सहकारिता मंत्री के गृह जिले में धांधली हो रही है। इसके जिम्मेदार कौन है।
 उन्होंने इस दौरान मतदाता सूची पर सवाल उठाते हुए कहा कि 222 सदस्य होते हुए महज 21 सदस्यों को मताधिकार दिया गया है और शेष सदस्यों को मताधिकार से वंचित कर दिया है और इस मतदाता सूची में क्षेत्रीय विधायक, पूर्व प्रधान और बैंक चैयरमेन के परिवार के ही लोग है। इसके बाद अनन्त समदानी ने जिला कलक्टर अरविन्द कुमार पोसवाल से भी चर्चा की और उन्हें पूरे मामले से अवगत कराया जिस पर जिला कलक्टर अरविन्द कुमार पोसवाल ने मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया।
गौरतलब है कि क्रय-विक्रय सहकारी समिति के मतदाताओं से 11 सदस्यीय निर्वाचन मंडल का चुनाव किया जाना है और वे अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को निर्वाचित करेंगे।
5 हजार की खरीद करने वालों को दिया मताधिकार
क्रय-विक्रय सहकारी समिति के 222 सदस्यों में से महज 21 सदस्यों को ही मतदाता सूची में शामिल किया गया है जबकि शेष सदस्यों को मताधिकार से वंचित कर दिया गया। इस मामले में समिति की जनरल मैनेजर डॉ सरोज मीणा ने बताया कि 2014 में जारी विभागीय सर्कुलर के अनुसार जिस सदस्य ने पिछले वित्तिय वर्ष में 5 हजार रूपये की खरीद की है उसी को मतदाता सूची में जोड़ा गया है जबकि समदानी ने कहा कि इस संबंध में पहले सदस्यों को जानकारी नहीं दी थी जबकि ज्यादातर सदस्य प्रतिवर्ष हजारों रूपये का सामान समिति से ही खरीदते है लेकिन पूर्व में जानकारी नहीं होने से कोई भी व्यक्ति किराने आदि का बिल नहीं रखता है।

नाम से नहीं जारी होते बिल, फिर कैसे हो सत्यापित
क्रय-विक्रय सहकारी समिति के चुनाव में जिस सर्कुलर का हवाला देकर मतदाताओं की संख्या सीमित की गई है। उसके बारे में जानकारी लेने पर पता चला कि क्रय-विक्रय सहकारी समिति से कोई भी ग्राहक या सदस्य खरीदी करता है तो उसका बिल जारी किया जाता है लेकिन उस पर ग्राहक का नाम अंकित नहीं होता। ऐसे में सवाल यह है कि जिन सदस्यों को मतदाता सूची में शामिल किया गया है उन्होंने खरीद की है या फिर इधर-उधर से बिल लेकर मतदाता सूची में नाम अंकित करवा लिया। इधर इसी मामले में एक मतदाता संतोष धोबी भी मौके पर पहुंच गए जिनका मतदाता सूची में नाम अंकित है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पिछले वित्तिय वर्ष में समिति से 1 रूपये की खरीद नहीं की है तो फिर उनका नाम मतदाता सूची में कैसे शामिल है। ऐसेे में लगता है कि क्रय-विक्रय सहकारी समिति के चुनाव में जो मतदाता सूची जारी की गई है उसमें मिलीभगत की आशंका हो सकती है। 

पंच निर्णायक वाद कर सकते है दाखिल-निवार्चन अधिकारी
मतदाता सूची में धांधली के आरोप के बाद कवर स्टोरी ने निर्वाचन अधिकारी सौरभ शर्मा से बातचीत में उन्होंने बताया कि कुल 222 सदस्य है जिनमें से मतदाता सूची में 21 व्यक्तिगत मतदाता और 66 जीएसएस शामिल है। उन्होंने बताया कि नियम के अनुसार पिछले वित्तिय वर्ष में जीएसएस की 50 हजार की खरीद और व्यक्तिगत 5 हजार रूपये की खरीद पर ही सदस्य का मतदाता के रूप में नाम अंकित किया जा सकता है, लेकिन कोई भी सदस्य पिछले 4 दिनों में बिल लेकर नहीं आया। यदि वे 5 हजार के बिल लेकर आते तो उसे मतदाता सूची में शामिल कर लेते। लेकिन नामजद बिल जारी नहीं होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में यही व्यवस्था लागू है। इससे स्पष्ट है कि जब बिल में नाम ही अंकित नहीं है तो कैसे माना जाये कि उसने 5 हजार की खरीद की है। उन्होंने बताया कि अब इस मामले को अतिरिक्त रजिस्ट्रार सहकारी समितियों के समक्ष ले जाया जा सकता है क्योंकि एक बजे उन्होंने अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ