बोजून्दा जीवाश्म पार्क को लेकर हुई संगोष्ठी, आयोजित हुई हेरिटेज वॉक

चित्तौड़गढ़। बोजून्दा स्थित करोड़ों वर्ष पुराने जीवाश्म पार्क को लेकर जनजागृति अभियान हुआ।
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण पश्चिमी क्षेत्र द्वारा आजादी की 75वीं वर्षगांठ के अमृत महोत्सव के कल्चर ऑफ प्राइड के अंतर्गत आज चित्तौड़गढ़ के बोजुंदा में स्थित भू- विरासत स्ट्रोमैटोलाइट्स पार्क को लेकर भू विरासत संरक्षण एवं भू -पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जनजागृति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम मे बोजुंदा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय एवं केंद्रीय विद्यालय के छात्र- छात्राओं, शिक्षकों एवं स्थानीय निवासियों को बोजुंदा के जीवाश्म पार्क की महत्ता एवं इसकी प्रारंभिक उत्पत्ति एवं साक्ष्य के बारे में बताया गया।
 इस दौरान राजकीय माध्यमिक विद्यालय, बोजुंदा में एक संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया। जिसमें भू- सर्वेक्षण अधिकारी मुकेश कुमार मंडल ने बताया कि यह भू-विरासत निचले विंध्यन महा समूह  के भगवानपुरा संरचना में चुना पत्थर के भीतर स्ट्रोमैटोलाइट्स की विभिन्न प्रजातियों का उत्कृष्ट प्रमाण है। जो कि 90 करोड़ वर्ष पूर्व जीवन के शुरुआती रूप का उपलब्ध जीवाश्म  रिकॉर्ड का प्रतिनिधित्व करते हैं ।एवं आसानी से हम इसे देख सकते हैं । आयोजित कार्यक्रम में विद्यालय के छात्र छात्राओं के द्वारा एक  हेरिटेज वॉक का भी आयोजन किया गया। जिसमें इस विरासत को बचाने एवं संरक्षण करने की आम लोगों से अपील की गई। इस हेरिटेज वाक में भारतीय सर्वेक्षण विभाग के पदाधिकारियों के साथ शिक्षकों, छात्र-छात्राओं, स्थानीय आबादी एवं चित्तौड़ इंटेक चैप्टर के पदाधिकारी भी शामिल हुए। आयोजित कार्यक्रम जया लाल एडीजी और एचओडी , जीएसआई डब्ल्यू आर जयपुर के निर्देशानुसार आयोजित किया गया। इससे पूर्व एक संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसमें वक्ता के रूप में वरिष्ठ भूवैज्ञानिक आदित्य नारायण पालीवाल, मुकेश कुमार मंडल, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार एवं डॉ. गोपाल सालवी ने स्ट्रोमैटोलाइट्स पार्क के बारे में सभी को अवगत कराया गया। भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी एवं हेरिटेज वॉक  में प्राध्यापक आनंद चावला, देवी लाल अहीर और केंद्रीय विद्यालय के प्राध्यापक मंगना राम माली ने सहयोग प्रदान किया। भू विरासत संरक्षण के इस कार्यक्रम में खनिज विभाग के डीएमजी मनोज सालवी ,इंटेक् चैप्टर के सह संयोजक मनीष मालीवाल, विजय अजमेरा, जल संरक्षण एवं पर्यावरणविद  डॉ. के.के. जैन, ललित सिंह आदि मौजूद रहे ।भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग के द्वारा इस जीवाश्म पार्क के अवलोकन एवं अध्ययन  हेतु दो साइन बोर्ड भी लगाए गए। जिससे कि भू-पर्यटन वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों को जानकारी मिल सके ।इस अवसर पर जानकारी देते हुए डॉ. गोपाल सालवी ने बताया कि 80 -90 करोड़ वर्ष पूर्व यहां समुद्र था। उथले पानी के नीचे रहने वाले जीव जंतु के ही ये साक्ष्य हैं।
यहां पहाड़ी चट्टानों में समुद्र एवं जीव उत्पत्ति के साक्ष्य मिले हैं। किस प्रकार समुद्र के उथले पानी के नीचे रहने वाले बारीक जीव जंतु विशेष शैवाल, काई आदि के रूप में पाए जाते थे कालांतर में ये जीवाश्म मे बदल गये। एक सर्वे के अनुसार विश्व के 26% पर्यटक जिओ पार्क देखना चाहते हैं। भारत में ऐसे 32 राष्ट्रीय स्मारक में से 10 स्मारक राजस्थान में हैं। चित्तौड़ का स्मारक सूची में 16 वें नंबर पर हैं। इस भू-पर्यटन स्थल को सरकार के द्वारा विकसित किया जाना चाहिए। इंटेक चैप्टर चित्तौड़गढ़ के सह संयोजक मनीष मालीवाल  ने बताया कि शीघ्र ही चित्तौड़ इंटेक चैप्टर के द्वारा क्यूआर कोड स्कैन  माध्यम से विभिन्न स्थानों पर जीवाश्म पार्क के बोर्ड लगाए जाएंगे।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ