जहाजपुर (माय सर्कल न्यूज @रविकान्त जोशी)। युग महापुरुष परम सन्त बाबा जय गुरुदेव महाराज के उत्तराधिकारी एवं जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था, मथुरा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूज्य पंकज महाराज कल सायंकाल जयगुरुदेव आश्रम जहाजपुर पधारे। यहां वर्षा के बावजूद बड़ी संख्या में उपस्थित भाई-बहनों, बच्चों, संभ्रान्तजनों ने यात्रा का भव्य स्वागत किया। वह भीलवाड़ा जिलान्तर्गत 33 सत्संग कार्यक्रमों में आम जनता को भगवान की भक्ति करने की प्रेरणा, शाकाहारी-सदाचारी बनने व शराब जैसे नशों को त्यागकर अच्छे समाज के निर्माण में भागीदार बनने, सामाजिक समरसता लाने आदि के आत्म-जनकल्याणकारी संदेश देगें।
आज 10 जुलाई को पहला कार्यक्रम शाहपुरा रोड स्थित बावड़ी में सम्पन्न हुआ। महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि परमात्मा ने यह अनमोल शरीर आत्म कल्याण के लिये दिया है। ‘‘नर समान नहिं कवनिउ देहीं। जीव चराचर याचत जेही’’ को उद्धृत करते हुये कहा मनुष्य शरीर चौरासी लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ है क्योंकि इसमें प्रभु के पास जाने का दरवाजा है जिसका भेद सन्त महात्मा ही जानते हैं। महात्माओं ने मनुष्य शरीर को परमात्मा का बनाया हुआ सच्चा हरि मंदिर बताया। इसमें निरन्तर प्रभु के देश से आने वाली आकाशवाणियां, वेदवाणियाँ, कलमा उतर रही हैं। वर्तमान में इस कलियुग में मनुष्य की उम्र घट गई, शारीरिक बल घट गया, मनुष्य का प्राण अन्न में चला आया, मन बड़ा चंचल हो गया। इसलिये इस कलियुग में अवतरित होने वाले सन्तों, फकीरों ने पुरानी कठिन साधना की पद्धतियों पर रोक लगा दिया और सुरत-शब्द योग (नाम योग) का रास्ता जारी किया जिसे बिना घर-बार छोड़े किया जा सकता है। सन्त सत्गुरूओं ने प्रभु की भक्ति के तीन साधन बताया। ‘‘कलयुग तीन सार उन बरने। और साधन सब थोथे जान।’’ पहला- सुमिरन, दूसरा-ध्यान, तीसरा- भजन।
उन्होंने आध्यात्मिक विज्ञान के महत्व को समझाते हुए कहा कि सारी आत्माये/रुहें आकाशवाणी, अनहद वाणी, धुर की वाणी व कलमा पर उतार कर लाई गयीं। अब उससे हमारा सम्बन्ध टूट गया। जब प्रभु की प्राप्ति करने वाले सन्त महात्मा फकीर आपको मिल जायेंगे तो उस मालिक को याद करने, भजन करने का तरीका बता देंगे तथा अपनी दया कृपा का सहारा देकर आपकी आत्मा का कल्याण करा देंगे। आपका जीवन सफल व धन्य हो जायेगा।
संस्था प्रमुख ने कहा जातियां उस प्रभु ने नहीं बनाई। धर्मराज के दरबार में सबका हिसाब एक ही जगह होता है। आज 10 जुलाई है आज के ही दिन हमारे गुरू महारान ने धर्म नगरी वाराणसी में सन् 1952 में कुछ लोग के बीच आम सत्संग जारी किया था जो नाले, नदी से बढ़कर समुद्र का रूप ले लिया। हम उनके मिशन को आगे बढ़ाने व आम जन को प्रभु की भक्ति में संलग्न करने, शाकाहारी-सदाचारी बनाने, शराब आदि व्यसनों से दूर करके अच्छे समाज के निर्माण के कार्यक्रमों में लगे हुये हैं साथ ही आगे आने वाली विभिन्न प्रकार की भारी मुसीबतों से बचाने के लक्ष्य के साथ निरन्तर प्रयास में भी लगे हुये है। चाहते है शराब आदि नशों की गिरफ्त में आ रहे नवयुवकों को इन व्यसनों से बचाया जाय। सामाजिक समरसता आये, लोग एक-दूसरे के काम आये, प्रेम से मिलजुल कर रहें।
जयगुरुदेव आश्रम मथुरा में आगामी 20 से 24 दिसम्बर तक आयोजित होने वाले पूज्यपाद स्वामी घूरेलाल महाराज ‘दादा गुरूजी’ के 75वें वार्षिक भण्डारा महापर्व में भाग लेने का निमंत्रण दिया। कल (आज) का सत्संग शाहपुरा के कादी सहना में होगा। इस अवसर पर जयगुरूदेव संगत राजस्थान के अध्यक्ष विष्णु कुमार सोनी, उपाध्यक्ष हरिनारायण ‘भोपाजी’, महावीर सिंह, सुगन जाट, सुखदेव जाट, प्रकाश शर्मा, उदयलाल प्रजापति (प्रजापति), मोहन रेगर (पूर्व सरपंच), गोपाल, देवराज शर्मा आदि सहित संस्था के कई पदाधिकरी एवं प्रबंध समिति एवं सामान्य सभा के कई सदस्य मौजूद रहे। यह जानकारी जयगुरुदेव संगत जिला-भीलवाड़ा के प्रवक्ता अनिल सोनी ने दी।
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