चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग, अब चन्दा मामा पास के



वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत और तकनीक, बुधवार को सफल हो गई। वे वैज्ञानिक जो महीनों अपने घर नहीं गए। जिन्होंने वर्षों अथक मेहनत की, उनकी सफलता इस रूप में हुई कि भारत दुनिया का पहला देश हो गया है जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचा है। यूँ तो चाँद पर हमसे पहले अमेरिका, रूस और चीन भी पहुँच चुके हैं लेकिन दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने वाला भारत पहला देश है।
भारत दक्षिणी ध्रुव पर इसलिए पहुँचा क्योंकि जिस सतह तक कोई नहीं पहुँच सका वहाँ की स्थिति के बारे में पता लगा सके। बुधवार को जब इसरो के वैज्ञानिक चंद्रयान -3 की कहानी सुना रहे थे, अपने अनुभव साझा कर रहे थे, करोड़ों लोगों की आँखों में ख़ुशी के आंसू थे। इसके पहले की विफलता के ताने और उन सब को सहन करते हुए चंद्रयान को सफलता का पर्याय बनाने के पीछे की कहानी भावुक भी थी और सबक़ देने वाली भी।
यह सफलता इसलिए भी बड़ी है क्योंकि हाल ही में रूस का चंद्रयान लूना विफल हो चुका है। यह दुनिया के सामने हमारी वैज्ञानिक ताक़त का तिरंगा है। जो देश कभी भारत को ताना मारा करते थे, यह उन्हें हमारा करारा जवाब है। यह सफ़र भारत ने चंद्रयान -1 से शुरू किया था और चंद्रयान तीन के रूप में मिली बड़ी सफलता उस शुरूआत का ही फल है जो चंद्रयान -1 से शुरू हुई थी।
अब चंद्रयान चाँद की सतह का अध्ययन करेगा। हो सकता है वहाँ पानी की तलाश भी करें। धरती के चौदह दिन बराबर होता है चाँद का एक दिन। इस एक दिन में भारत को कई सफलताएँ मिलने की उम्मीद है। निश्चित तौर पर नई पीढ़ी के लिए यह सफलता एक ऐतिहासिक उदाहरण साबित होगी। हिंदुस्तान की यह चंद्रक्रांति वर्षों तक याद रखी जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब जोहानसबर्ग से भारतीयों को चंद्रयान की सफलता की बधाई दे रहे थे, तो जिस ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने वे गए हैं, वहाँ मौजूद देश भी यह सब सुन रहे थे। ख़ासकर, चीन जिसने कभी कहा था कि चाँद को मामा कहने वाले क्या जाएँगे चाँद पर, वह भी हैरत में पड़ गया होगा। आख़िरकार हम चाँद पर पहुँच गए और हमने कर दिखाया।

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