चित्तौड़गढ़। मेवाड़ यूनिवर्सिटी में शिक्षक दिवस धूमधाम से मनाया गया। जिसमें गुरू-शिष्य की सदियों से चली आ रही परम्परा और गुरू की महिमा वर्णन की अनूठी झलक देखने को मिली। कविताओं और नाटक के माध्यम से विधार्थियों ने गुरू और शिष्य के रिश्तों की गहराई और समर्पण भाव पर आकर्षक प्रस्तुतियां पेश की। यह कार्यक्रम कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग और कंप्यूटर एप्लीकेशन संकाय के सहयोग से आयोजित किया गया था। जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस मौके पर विद्यार्थियों को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई और सभी को उनके जीवन और चरित्र से प्रेरणा लेने के लिए संकल्पित किया गया।
कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्वलन से की गई। यूनिवर्सिटी वाइस चांसलर डॉ. आलोक कुमार मिश्रा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के जीवन में गुरू का स्थान सर्वाेपरि होता है। गुरू एक दिये की तरह होते है जो शिष्यों के जीवन को रोशन कर देते है। आज सबसे बड़ी जरूरत शिक्षा के लोकतंत्रीकरण की है। एजुकेशन को एक सीमित प्रिविलेज्ड दायरे से निकलकर जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है तभी सहीं मायनों में शिक्षा का उद्देश्य पूरा होगा। इसमें गुरू को अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।
वरिष्ठ सलाहकार डॉ. आर. ए. गुप्ता ने कहा कि एक शिक्षक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी यही होती है कि वह विद्यार्थियों के अंदर छिपे टैलेंट और संभावनाओं को पहचानते हुए मार्गदर्शन करें ताकि बच्चे का बहुमुखी विकास हो। डॉ. अरूणा दूबे ने स्वामी विवेकानंद के दर्शन पर आधारित एक उद्धरण बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों में ज्ञान जन्मजात होता है केवल शिक्षक अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए उस ज्ञान के पर्दे का अनावरण कर दे, फिर उस स्टूडेंट्स को ऊंचाईयां प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकता। आर्ट एवं कल्चर तथा म्यूजियम की महानिदेशिका डॉ. चित्रलेखा सिंह ने कहा कि गुरू के बगैर ज्ञान नहीं मिलता और यहीं ज्ञान मनुष्य को मनुष्य बनाता है। कार्यक्रम का समापन करते हुए कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग संकाय के विभागाध्यक्ष बी.एल.पाल ने कहा कि टेक्नोलॉजी जरूर शिक्षण को आसान और उन्नत बनाने में मददगार हो सकती है लेकिन टेक्नोलॉजी कभी शिक्षक के समर्पण की भावना का स्थान नहीं ले सकती। इसलिए हमें गुरू का सम्मान करना चाहिए। कार्यक्रम को सफल बनाने में स्वीटी, अंकित, नरेंद्र, युवराज, रितु बघेल और उमर गुल आदि विद्यार्थियों का सहयोग रहा।
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