चित्तौड़गढ़। श्रमण संघीय उपप्रवर्तिनी वीरकान्ता की सुशिष्या साध्वी डाॅ. अर्पिता ने पर्युषण महापर्व की प्रवचन माला में चौथे दिन शांति भवन में फरमाया कि श्रद्धा, आस्था और विश्वास से परमात्मा हमारे भीतर ही प्रकट हो जाते हैं। उन्हें कहीं बाहर ढुँढने की आवश्यकता नहीं है। भगवान हर प्राणी के भीतर विराजमान है। मोबाइल नेटवर्क का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे मोबाइल का नेटवर्क है वह दिखाई नहीं देता परन्तु मोबाइल नेटवर्क व वाईफाई से ही चलता है।
इसी प्रकार जीवात्मा की हर क्रिया भगवान की नजरों में है। हम भगवान को सच्चे मन से याद करते हैं तो वो वाइब्रेशन उन तक पहुँचती है। जप, तप और मंत्र के प्रभाव से इन्द्र के सिंहासन डांवा डोल हो जाते हैं।
उन्होंने लौकिक देवो और अरिहन्त देव के मध्यअन्तर को समझाया। लौकिक देव केवल पुण्य के प्रभाव से मनोकामना पूर्ण करने का कार्य करते हैं। फास्टफूड की तरह केवल भूख शान्त करते हैं। अरिहन्त देव की आराधना से आत्मा को पोषण मिलता है। तीर्थंकर देव की उपासना से आत्मा अनन्त कर्मों की निर्जरा करती हैं। असली देव तो अरिहन्त देव है- लौकिक देव फास्ट फूड जैसे है जब बीमार होते हैं तो डाॅक्टर खिचड़ी, दूध लेने की सलाह देता है। फास्ट फूड खाने की नहीं देता।
कोई कहता है कि भगवान दिखता नहीं, आसमान में मन से सिगनल भेज कर तो देखें कनेक्शन जुड़ता कि नहीं? कब तक रेंज से बाहर रहेंगे। एक दिन तो नेटवर्क में आना ही पड़ेगा। स्वयं को भूला कर प्रभु में समा कर अपनी चेतना को जागृत करना होगा। प्रभु की मेमोरी से तु डिलिटेड नहीं है। जहां चाहे जब चाहे परमात्मा से कनेक्शन कर सकते हैं। खुद को अपने जीवन का निर्माण करना पड़ेगा।
साध्वी वीना ने अन्तगड़ दशा सूत्र का वाचन करते हुए गज सुकुमाल, सुमुख, दुर्मुख, जालि, मयालि उबयावलि, पुरूषसेन और वारिसेन आदि के चरित्र का वाचन किया। महिला मण्डल अध्यक्ष सरोज नाहर से बताया कि बड़ाकल्प के अवसर पर लगभग 400 महिलाओं ने उपवास के प्रत्याख्यान लिए। बहनों से बोले, तेले, चोले, एकासन आयम्बिल तप के भी प्रत्याख्यान लिए। संघ अध्यक्ष लक्ष्मीलाल चण्डालिया ने बताया कि 28 अगस्त को ‘‘माता-पिता है पहली पूजा, इनके सिवा ना तीर्थदूजा’’ विषय पर प्रवचन रहेंगे। सामूहिक दया व्रत का भी आयोजन रहेगा। बाल संस्कार शिविर में वर्द्धमान बनो प्रतियोगिता रहेगी।
उन्होंने लौकिक देवो और अरिहन्त देव के मध्यअन्तर को समझाया। लौकिक देव केवल पुण्य के प्रभाव से मनोकामना पूर्ण करने का कार्य करते हैं। फास्टफूड की तरह केवल भूख शान्त करते हैं। अरिहन्त देव की आराधना से आत्मा को पोषण मिलता है। तीर्थंकर देव की उपासना से आत्मा अनन्त कर्मों की निर्जरा करती हैं। असली देव तो अरिहन्त देव है- लौकिक देव फास्ट फूड जैसे है जब बीमार होते हैं तो डाॅक्टर खिचड़ी, दूध लेने की सलाह देता है। फास्ट फूड खाने की नहीं देता।
कोई कहता है कि भगवान दिखता नहीं, आसमान में मन से सिगनल भेज कर तो देखें कनेक्शन जुड़ता कि नहीं? कब तक रेंज से बाहर रहेंगे। एक दिन तो नेटवर्क में आना ही पड़ेगा। स्वयं को भूला कर प्रभु में समा कर अपनी चेतना को जागृत करना होगा। प्रभु की मेमोरी से तु डिलिटेड नहीं है। जहां चाहे जब चाहे परमात्मा से कनेक्शन कर सकते हैं। खुद को अपने जीवन का निर्माण करना पड़ेगा।
साध्वी वीना ने अन्तगड़ दशा सूत्र का वाचन करते हुए गज सुकुमाल, सुमुख, दुर्मुख, जालि, मयालि उबयावलि, पुरूषसेन और वारिसेन आदि के चरित्र का वाचन किया। महिला मण्डल अध्यक्ष सरोज नाहर से बताया कि बड़ाकल्प के अवसर पर लगभग 400 महिलाओं ने उपवास के प्रत्याख्यान लिए। बहनों से बोले, तेले, चोले, एकासन आयम्बिल तप के भी प्रत्याख्यान लिए। संघ अध्यक्ष लक्ष्मीलाल चण्डालिया ने बताया कि 28 अगस्त को ‘‘माता-पिता है पहली पूजा, इनके सिवा ना तीर्थदूजा’’ विषय पर प्रवचन रहेंगे। सामूहिक दया व्रत का भी आयोजन रहेगा। बाल संस्कार शिविर में वर्द्धमान बनो प्रतियोगिता रहेगी।
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