पानी पर घमासान : बांध के गेट खोलने का बजा सायरन, विरोध में लोग उतरे नदी में


चित्तौड़गढ़, (सलमान)। 
राशमी क्षेत्र के मातृकुंडिया बांध का पानी कपासन और धमाणा तक ले जाने के लिए युवाओं और किसानों ने हुंकार भर ली हैं। आज शाम को मातृकुंडिया बांध से सायरन बजा कर बनास नदी में पानी छोड़ने के लिए गेट खोले जाने की भनक वहां पानी के लिए आंदोलन कर रहे लोगों को लगी तो वो सभी बांध के नीचे नदी में खड़े हो गए। कपासन तालाब में पानी ले जाने की जिद पर अड़ गए हैं। ऐसे में बांध के गेट भी नही खोल सके। 
आज मातृकुंडिया में कपासन सहित आसपास क्षेत्र के लोग धरना देने पहुंच। राजसमन्द के नंदसमन्द से होकर मातृकुण्डिया बांध ओवरफ्लो होने के बाद भी पानी को लेकर चित्तौड़गढ़ जिले में घमासान होता दिखाई दे रहा है। कपासन में पेयजल के लिए मातृकुंडिया बांध से पानी ले जाने के मुद्दे पर राजसमन्द के निकटवर्ती गांव के लोग विरोध में उतरे है इसलिए कपासन के तालाब का पेंदा भी नहीं ढका है, जबकि पहले से ही क्षेत्र में गंभीर पेयजल संकट की स्थिति है और आसन्न पेयजल संकट को देखते हुए क्षेत्र के जनप्रतिनिधि व क्षेत्रीय लोग आन्दोलन की राह पर चल पड़े है। रविवार को इसी मामले को लेकर भूपालसागर प्रधान हेमेन्द्र सिंह राणावत के नेतृत्व में लोग भूपालसागर और कपासन के तालाब पर पहुंच गए और धरना प्रदर्शन शुरु कर दिया। कपासन के लोगों की मांग है कि मातृकुण्डिया बांध के ओवरफ्लों के बाधा मेजा फीडर में पानी छोड़ दिया है और आसपास के गांवों के तालाबों और जलाशयों को भी भरा जा रहा है। जहां भूपालसागर तालाब करीब 11 फीट और धमाणा तालाब 7 फीट भर चुका है लेकिन कपासन तालाब न केवल रीता है बल्कि मिट्टी भी नहीं ढकी है। ऐसे में कपासन के पार्षद और जनप्रतिनिधि फीडर से कपासन पानी लाने की मांग को लेकर सिंदेसर पहुंच गए जहां राजसमन्द जिले के पछमता व जितावास गांव के लोग विरोध में उतर गए।
कपासन सहित अन्य खाली पड़े तालाबों में पानी लाने के लिए लोगों ने आंदोलन शुरू कर दिया हैं।

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