चित्तौड़गढ़। जोहर क्षत्राणी संस्था द्वारा पहली बार क्षत्राणियों ने मिलकर नव वर्ष का स्वागत व गणगौर का पर्व बड़े ही स्नेह व हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस कार्यक्रम में चित्तौड़गढ़ से सभी क्षत्राणियों ने भाग लिया। अपने पूरी राजपूती गणवेश में क्षत्राणियों ने क्षत्रिय परंपरा, कुल का मान, हिंदुत्व की पहचान को कैसे जीवित रखा जाए इसका एक उदाहरण पेश किया।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम जोहर ज्योति मंदिर में माता सती को दीप प्रज्वलित कर श्रद्धांजलि अर्पित कर विश्वकल्याण व मानव जाति के मंगल की कामना की। तत्पश्चात पूर्ण रीति-रिवाजों के साथ गणगौर का स्वागत कर उनकी पूजा अर्चना की।
क्षत्राणियों ने गणगौर के दोहे गणगौर के गीत और गणगौर के महत्व को दर्शाया। दोहे द्वारा गणगौर पूजन में किस तरह पति का नाम पूर्ण सम्मान व प्रेम से लिया जाता है यह भी बताया गया।
इस सुंदर व पावन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भदेसर प्रधान श्रीमती सुशीला कंवर आक्या, चित्तौड़गढ़ प्रधान श्रीमती देवेंद्र कंवर डगला का खेड़ा रहे। कार्यक्रम में विशेष अतिथि हमीरगढ़ रानी श्रीमती दिव्या कुमारी व बिजापुर कंवराणी रहे।
जोहर क्षत्राणी संस्था के अध्यक्षा श्रीमती निर्मला कंवर राठौड ने बताया कि जोहर क्षत्राणी संस्था न केवल कोई संस्था है बल्कि यह हमारा एक छोटा सा परिवार है जिसमें हम सभी महिलाएं आपस में स्वयं को इस परिवार का सदस्य मान बड़े ही स्नेह प्रेम से अपने कर्तव्य का निर्वाह करते हैं और समय-समय पर ऐसे आयोजनों द्वारा हमारी संस्कृति और हमारी विरासत को जीवित रखने, आने वाले पीढ़ी को सही मार्गदर्शन हो और संस्कारों से व पूर्वजों के बनाए रीति-रिवाजों से किस प्रकार जोड़ा रखा जा सके इस पर विशेष प्रयास किया जाए यह कोशिश करते हैं।
महामंत्री श्रीमती सुनीता शक्तावत ने प्रश्नोत्तरी द्वारा गणगौर के महत्व रीती रिवाजों का महत्व समझाया।
विशेष अतिथि हमीरगढ़ रानी श्रीमती दिव्या ने अपने उद्बोधन में बताया कि हमें किस प्रकार अपनी रक्त शुद्धता को बनाए रखना चाहिए।
श्रीमती मीना कंवर चाकूड़ा ने कार्यक्रम का संचालन किया और श्री क्षत्रिय युवक संघ का महत्व बताते हुए संस्कार निर्माण हेतु बालिकाओं को शिविर में भेजने के लिए निवेदन किया।
सभी क्षत्राणियों ने घूंघट द्वारा यह संदेश दिया कि घुंघट को प्रथा बताना और उसका विरोध करना गलत है। घुंघट कोई बोझ नहीं या कोई कुप्रथा नहीं, घुंघट हमारे संस्कार हैं बड़ों के प्रति सम्मान है और घुंघट क्षत्राणियों के सोलह श्रृंगार में से एक श्रृंगार है।
इस आयोजन के द्वारा क्षत्राणियों ने यह संदेश दिया है कि आज भी आधुनिकता की इस दौड़ में हम क्षत्राणीयां कैसे अपने संस्कार अपनी धरोहर और अपनी पहचान को बनाए रखते हैं।
कार्यक्रम में श्रीमती कैलाश कंवर रूद, रेखा कंवर मुरोली, शैली कंवर औरडी,तृप्ति झाडोली, राज कंवर खेड़िया, सीमाखोर, हेमलता झाडोली, संगीता झाडोली, अनुप्रिया डगला का खेड़ा, प्रीति डगला का खेड़ा, मंजू कंवर राठौड़, टीना सिंगोली, मनिषा अमराणा, श्याम कंवर, सरोज कंवर सहित अनेक क्षत्राणियों ने कार्यक्रम में भाग लिया व अपना सहयोग दिया।
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